{"_id":"64aaa5a6d7bef63ad90ac1b7","slug":"nand-kishore-shukla-set-out-on-padyatra-to-create-awareness-about-chhattisgarhi-language-in-janjgir-champa-2023-07-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"JanjgirChampa News: छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए पदयात्रा पर निकले नंद किशोर शुक्ला; बोले- राजभाषा से हो रही राजनीति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
JanjgirChampa News: छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए पदयात्रा पर निकले नंद किशोर शुक्ला; बोले- राजभाषा से हो रही राजनीति
Sun, 09 Jul 2023 05:48 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जांजगीर-चांपा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जांजगीर-चांपा
Published by: मोहनीश श्रीवास्तव
Updated Sun, 09 Jul 2023 05:48 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ भाषा के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हमर चिन्हारी छत्तीसगढ़ी मंच के संरक्षक नन्द किशोर शुक्ला ने पदयात्रा पर निकले हैं। यह पदयात्रा जांजगीर से चांपा तक चलेगी। उन्होंने कहा कि, किसी प्रदेश की पहचान वहां की बोली जाने वाली भाषा होती है।
विज्ञापन
छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए जागरूक करने पदयात्रा पर निकले नंद किशोर शुक्ला।
- फोटो : संवाद
विस्तार
छत्तीसगढ़ भाषा के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हमर चिन्हारी छत्तीसगढ़ी मंच के संरक्षक नन्द किशोर शुक्ला ने पदयात्रा पर निकले हैं। यह पदयात्रा जांजगीर से चांपा तक चलेगी। उन्होंने कहा कि, किसी प्रदेश की पहचान वहां की बोली जाने वाली भाषा होती है। 2007 से छत्तीसगढ़ राजभाषा भले ही घोषित हो गई है, लेकिन अब तक प्रदेश के लोग छत्तीसगढ़ी को नहीं अपना सके हैं। हम लोगों को छत्तीसगढ़ी भाषा में बोलने, पढ़ने और लिखने के लिए जागरूक करने मे जुटे हैं।
विज्ञापन
जांजगीर के कचहरी चौंक से रविवार को नन्द किशोर शुक्ल ने पद यात्रा शुरू की है। 82 साल की उम्र मे नंद किशोर आठ किमी तक जन जागरूकता करेंगे। उन्होंने कहा कि राज भाषा बनने के बाद भी छत्तीसगढ़ी में सरकारी काम-काज शुरू नहीं हुआ। ये छत्तीसगढ़ियों के भविष्य के लिए खतरा है। उन्होंने भाजपा और कांग्रेस दोनों सरकार पर राज भाषा के साथ राजनीति करने का आरोप लगाया है। कहा कि, राजभाषा को अपनी पहचान बनाने के लिए हर छत्तीसगढ़िया को आगे आना।
विज्ञापन
जांजगीर के समाजसेवी और निजी स्कूल संचालको ने भी पद यात्रा मे हिस्सा लिया। मनोज पांडेय ने बताया कि राज्य स्थापना के बाद सरकार ने स्कूल में एक विषय छत्तीसगढ़ी का शुरू किया, लेकिन उसे अनिवार्य नहीं बनाया। जिसके कारण बच्चों में इस विषय को लेकर उत्साह नहीं दिखा, और हंसी ठिठोली करने लगे। अब उसे भी हटा दिया गया है। उन्होंने राज्य सरकार से छत्तीसगढ़ी भाषा को आगे बढ़ाने के लिए प्राइमरी और मिडिल स्कूल मे छत्तीसगढ़ी का एक अनिवार्य विषय करने की मांग की है।
विज्ञापन