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Pariksha Pe Charcha: जगदलपुर में जगह-जगह कार्यक्रम का हुआ प्रसारण, पीएम के प्रोत्साहन से विद्यार्थी तनावमुक्त
Mon, 29 Jan 2024 04:37 PM IST
आकाश दुबे
अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर
Published by: आकाश दुबे
Updated Mon, 29 Jan 2024 04:37 PM IST
सार
पीएम मोदी ने विद्यार्थियों से कहा कि चुनौतियों का समाधान अभिभावकों के साथ-साथ शिक्षकों को भी सामूहिक रूप से करना चाहिए। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा छात्रों के विकास के लिए शुभ संकेत है।
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कार्यक्रम में मौजूद शिक्षक और विद्यार्थी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश के छात्रों से परीक्षा पर चर्चा की। पीएम मोदी ने 'परीक्षा पर चर्चा' के सातवें संस्करण के तहत छात्रों से बात की। नई दिल्ली के भारत मंडपम में कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसका सीधा प्रसारण पूरे देशभर में किया गया। कार्यक्रम का जगह-जगह सजीव प्रसारण करने के साथ ही अन्य रोचक कार्यक्रम भी कराए गए। इसी क्रम में जगदलपुर के धरमपुरा में स्थित ज्ञानगुड़ी के ऑडिटोरियम में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
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जिले के विभिन्न स्कूलों में भी प्रधानमंत्री के परीक्षा पर चर्चा के कार्यक्रम का प्रसारण किया गया। ज्ञानगुड़ी में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वेदवती कश्यप, उपाध्यक्ष जिला पंचायत एवं शिक्षा समिति के अध्यक्ष मनीराम कश्यप सहित अन्य स्कूलों के माध्यमिक और हायर सेकेंडरी के बच्चे और उनके अभिभावक उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम के प्रसारण के बाद रंगोली और कई अन्य रोचक कार्यक्रम करवाए गए। कार्यक्रम में उपस्थित बच्चों ने प्रधानमंत्री के कट आउट के साथ सेल्फी खिंचवाई। परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम से बच्चों को परीक्षा के तनाव से राहत महसूस की। प्रधानमंत्री ने परीक्षा पर चर्चा 2024 के दौरान छात्राएं-शिक्षकों और अभिभावकों से बातचीत की। प्रधानमंत्री ने स्कूली बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि बच्चों में लचीलापन पैदा करना और उन्हें दबावों से निपटने में मदद करना महत्वपूर्ण है। छात्रों की चुनौतियों का समाधान अभिभावकों के साथ-साथ शिक्षकों को भी सामूहिक रूप से करना चाहिए। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा छात्रों के विकास के लिए शुभ संकेत है। उन्होंने कहा कि शिक्षक नौकरी की भूमिका में नहीं हैं बल्कि वे छात्रों के जीवन को संवारने की जिम्मेदारी निभाते हैं।
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माता-पिता को अपने बच्चों के रिपोर्ट कार्ड को उनका विजिटिंग कार्ड नहीं बनाना चाहिए। छात्रों और शिक्षकों के बीच का बंधन पाठ्यक्रम और पाठ्यचर्या से परे होना चाहिए। अपने बच्चों के बीच प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता के बीज कभी न बोएं। बल्कि भाई-बहनों को एक.दूसरे के लिए प्रेरणा बनना चाहिए। अपने सभी कार्यों और अध्ययन में प्रतिबद्ध और निर्णायक बनने का प्रयास करें। जितना संभव हो उत्तर लिखने का अभ्यास करें। यदि आपके पास वह अभ्यास है तो परीक्षा हॉल का अधिकांश तनाव दूर हो जाएगा।
प्रौद्योगिकी को बोझ नहीं बनना चाहिए। इसका विवेकपूर्ण उपयोग करें। सही समय जैसा कुछ नहीं है इसलिए इसका इंतजार न करें। चुनौतियां आती रहेंगी और आपको उन चुनौतियों को चुनौती देनी होगी। यदि लाखों चुनौतियां हैं, तो अरबों समाधान भी हैं, असफलताओं से निराशा नहीं होनी चाहिए। हर गलती एक नई सीख है। उचित शासन के लिए भी नीचे से ऊपर तक उत्तम सूचना की व्यवस्था और ऊपर से नीचे तक उत्तम मार्गदर्शन की व्यवस्था होनी चाहिए। मैंने अपने जीवन में निराशा के सभी दरवाजे और खिड़कियां बंद कर दी हैं।