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अबूझमाड़: 10 घंटे स्ट्रेचर लेकर पैदल चले आईटीबीपी जवान, परिजनों को सौंपा शव
Sat, 05 Sep 2026 07:05 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sat, 05 Sep 2026 07:05 PM IST
सार
अबूझमाड़ के अत्यंत दुर्गम जंगलों के बीच भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की 29वीं वाहिनी के जवानों ने मानवीय संवेदना की मिसाल पेश की।
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10 घंटे स्ट्रेचर लेकर पैदल चले आईटीबीपी जवान
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अबूझमाड़ के अत्यंत दुर्गम जंगलों के बीच भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की 29वीं वाहिनी के जवानों ने मानवीय संवेदना की मिसाल पेश की। जवानों ने दिवालूर गांव की 51 वर्षीय बीमार महिला बुदरी मंडावी को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्ट्रेचर पर रखकर करीब 10 घंटे तक कठिन रास्तों पर पैदल सफर तय किया। अस्पताल पहुंचने से पहले ही महिला की मृत्यु हो जाने के बाद भी जवानों ने उनके पति की इच्छा का सम्मान करते हुए पार्थिव शरीर को गांव तक पहुंचाया।
बुदरी मंडावी के पति सहित तीन ग्रामीण दिवालूर स्थित कंपनी ऑपरेटिंग बेस (सीओबी) पहुंचे और महिला की गंभीर स्थिति की जानकारी आईटीबीपी जवानों को दी। महिला लगभग 17 दिन से बीमार चल रही थीं। सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर शिव प्रताप के नेतृत्व में 16 सदस्यीय मेडिकल-रेस्क्यू टीम तुरंत गांव के लिए रवाना हुई। टीम महिला को स्ट्रेचर पर लेकर दिवालूर सीओबी पहुंची, जहां उनका प्राथमिक उपचार और चिकित्सीय जांच की गई। इसके बाद जवानों ने महिला को आगे के उपचार के लिए बोटेर सीओबी के रास्ते ओरछा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की प्रक्रिया शुरू की।
दुर्गम रास्ते तथा कठिन चुनौतियां
बचाव दल को इस दौरान बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इलाके में लगातार तेज बारिश, कीचड़ और फिसलन के बावजूद जवान स्ट्रेचर लेकर आगे बढ़ते रहे। जवानों ने दो लॉग ब्रिज और दो से तीन फीट पानी वाले नालों को पार करते हुए रास्ता तय किया। अबूझमाड़ जैसे दूरस्थ क्षेत्र में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में आईटीबीपी जवानों ने कठिन हालात में ग्रामीणों तक पहुंचकर चिकित्सा सहायता पहुंचाने का प्रयास कर अपनी मानवीय भूमिका को उजागर किया।
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पैतृक गांव में सौंपा पार्थिव शरीर
दोपहर लगभग 2:30 बजे बोटेर सीओबी पहुंचने से पहले ही मेडिकल स्टाफ ने महिला की दोबारा जांच की, जिसमें उनके जीवन-रक्षक संकेत नहीं मिले। महिला की मृत्यु हो चुकी थी। जवान उन्हें लेकर करीब 2:40 बजे बोटेर सीओबी पहुंचे और घटना की जानकारी आला अधिकारियों को दी। महिला के पति ने अपनी पत्नी का अंतिम संस्कार पैतृक गांव दिवालूर में करने की इच्छा जताई। जवानों ने उनकी इच्छा का सम्मान किया और 27 सदस्यीय दल के साथ पार्थिव शरीर को स्ट्रेचर पर लेकर वापस गांव की ओर प्रस्थान किया। लगातार बारिश और दुर्गम रास्तों को पार करते हुए यह दल शाम करीब 6:05 बजे दिवालूर पहुंचा और पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया।
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बुदरी मंडावी के पति सहित तीन ग्रामीण दिवालूर स्थित कंपनी ऑपरेटिंग बेस (सीओबी) पहुंचे और महिला की गंभीर स्थिति की जानकारी आईटीबीपी जवानों को दी। महिला लगभग 17 दिन से बीमार चल रही थीं। सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर शिव प्रताप के नेतृत्व में 16 सदस्यीय मेडिकल-रेस्क्यू टीम तुरंत गांव के लिए रवाना हुई। टीम महिला को स्ट्रेचर पर लेकर दिवालूर सीओबी पहुंची, जहां उनका प्राथमिक उपचार और चिकित्सीय जांच की गई। इसके बाद जवानों ने महिला को आगे के उपचार के लिए बोटेर सीओबी के रास्ते ओरछा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की प्रक्रिया शुरू की।
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दुर्गम रास्ते तथा कठिन चुनौतियां
बचाव दल को इस दौरान बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इलाके में लगातार तेज बारिश, कीचड़ और फिसलन के बावजूद जवान स्ट्रेचर लेकर आगे बढ़ते रहे। जवानों ने दो लॉग ब्रिज और दो से तीन फीट पानी वाले नालों को पार करते हुए रास्ता तय किया। अबूझमाड़ जैसे दूरस्थ क्षेत्र में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में आईटीबीपी जवानों ने कठिन हालात में ग्रामीणों तक पहुंचकर चिकित्सा सहायता पहुंचाने का प्रयास कर अपनी मानवीय भूमिका को उजागर किया।
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पैतृक गांव में सौंपा पार्थिव शरीर
दोपहर लगभग 2:30 बजे बोटेर सीओबी पहुंचने से पहले ही मेडिकल स्टाफ ने महिला की दोबारा जांच की, जिसमें उनके जीवन-रक्षक संकेत नहीं मिले। महिला की मृत्यु हो चुकी थी। जवान उन्हें लेकर करीब 2:40 बजे बोटेर सीओबी पहुंचे और घटना की जानकारी आला अधिकारियों को दी। महिला के पति ने अपनी पत्नी का अंतिम संस्कार पैतृक गांव दिवालूर में करने की इच्छा जताई। जवानों ने उनकी इच्छा का सम्मान किया और 27 सदस्यीय दल के साथ पार्थिव शरीर को स्ट्रेचर पर लेकर वापस गांव की ओर प्रस्थान किया। लगातार बारिश और दुर्गम रास्तों को पार करते हुए यह दल शाम करीब 6:05 बजे दिवालूर पहुंचा और पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया।