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जगदलपुर: आपात स्थिति में कैसे बचाएं जान, मेकाज डॉक्टरों ने दिया सीपीआर का प्रशिक्षण
Thu, 16 Oct 2025 03:37 PM IST
Lalit Kumar Singh
अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर
Published by: Lalit Kumar Singh
Updated Thu, 16 Oct 2025 03:37 PM IST
सार
जगदलपुर मेडिकल कॉलेज डिमरापाल (मेकाज) में 13 से 17 अक्टूबर तक सीपीआर अवेयरनेस वीक मनाया गया। इस दौरान डीन, अधीक्षक और डॉक्टरों ने मरीजों और ग्रामीणों को सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) के महत्व और उसके तरीकों की जानकारी दी।
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मेकाज डॉक्टरों ने दिया सीपीआर का प्रशिक्षण
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जगदलपुर मेडिकल कॉलेज डिमरापाल (मेकाज) में 13 से 17 अक्टूबर तक सीपीआर अवेयरनेस वीक मनाया गया। इस दौरान डीन, अधीक्षक और डॉक्टरों ने मरीजों और ग्रामीणों को सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) के महत्व और उसके तरीकों की जानकारी दी।
डीन डॉ. प्रदीप बेक ने बताया कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित इस अभियान का उद्देश्य है कि आम जनता को हृदय संबंधी आपात स्थिति में तुरंत सीपीआर देने के लिए जागरूक और प्रशिक्षित किया जा सके।
कार्यक्रम के दौरान डॉक्टरों ने लाइव डेमो देकर सीपीआर तकनीक समझाई और बताया कि समय पर सीपीआर देने से किसी व्यक्ति की जान बचने की संभावना दोगुनी या तिगुनी हो जाती है। भारत में 70% कार्डियक अरेस्ट के मामले अस्पताल के बाहर होते हैं। समय पर सीपीआर देने से मरीज के बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। हैंड्स-ओनली सीपीआर जैसी सरल तकनीक को आसानी से सीखा और लागू किया जा सकता है।
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अभियान का मकसद है कि हर घर, स्कूल, दफ्तर और सार्वजनिक स्थान पर कम से कम एक व्यक्ति सीपीआर देना जानता हो। डॉक्टरों ने समझाया कि यदि किसी को अचानक गिरते हुए देखें, तो तुरंत एम्बुलेंस (108/112) को कॉल करें और जब तक मदद न पहुंचे, तब तक लगातार सीपीआर करते रहें।
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डीन डॉ. प्रदीप बेक ने बताया कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित इस अभियान का उद्देश्य है कि आम जनता को हृदय संबंधी आपात स्थिति में तुरंत सीपीआर देने के लिए जागरूक और प्रशिक्षित किया जा सके।
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कार्यक्रम के दौरान डॉक्टरों ने लाइव डेमो देकर सीपीआर तकनीक समझाई और बताया कि समय पर सीपीआर देने से किसी व्यक्ति की जान बचने की संभावना दोगुनी या तिगुनी हो जाती है। भारत में 70% कार्डियक अरेस्ट के मामले अस्पताल के बाहर होते हैं। समय पर सीपीआर देने से मरीज के बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। हैंड्स-ओनली सीपीआर जैसी सरल तकनीक को आसानी से सीखा और लागू किया जा सकता है।
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अभियान का मकसद है कि हर घर, स्कूल, दफ्तर और सार्वजनिक स्थान पर कम से कम एक व्यक्ति सीपीआर देना जानता हो। डॉक्टरों ने समझाया कि यदि किसी को अचानक गिरते हुए देखें, तो तुरंत एम्बुलेंस (108/112) को कॉल करें और जब तक मदद न पहुंचे, तब तक लगातार सीपीआर करते रहें।