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Chhattisgarh: 'बस्तर पंडुम 2026' को लेकर उच्चस्तरीय बैठक, 5 जनवरी से 5 फरवरी तक होगा आयोजन
Mon, 01 Dec 2025 06:05 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Mon, 01 Dec 2025 06:05 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने के उद्देश्य से ‘बस्तर पंडुम 2026’ के आयोजन की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
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'बस्तर पंडुम 2026' को लेकर उच्चस्तरीय बैठक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने के उद्देश्य से ‘बस्तर पंडुम 2026’ के आयोजन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी सिलसिले में शनिवार को उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के रायपुर स्थित निवास में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन मंत्री केदार कश्यप और संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल भी शामिल हुए।
बैठक में बस्तर संभाग के विविध लोकनृत्य, गीत-संगीत, पारंपरिक धरोहर, वेशभूषा, व्यंजन, आंचलिक साहित्य और जनजातीय जीवन से जुड़े तत्वों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत करने की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा हुई। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर पंडुम न सिर्फ सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का प्रयास है, बल्कि बस्तर के कलाकारों को बड़ा मंच देने का महत्वपूर्ण अवसर भी है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को बेहतर समन्वय के साथ समयबद्ध तैयारी करने निर्देश दिए।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि यह आयोजन बस्तर के युवाओं के लिए अपनी सांस्कृतिक विविधता को बड़े स्तर पर प्रदर्शित करने का मौका है। वहीं, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि यह महोत्सव छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का मजबूत परिचायक होगा, इसलिए सभी तैयारियां निर्धारित समयसीमा में पूरी की जाएंगी।
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‘बस्तर पंडुम 2026’ का आयोजन 5 जनवरी से 5 फरवरी 2026 तक किया जाएगा। एक महीने तक चलने वाले इस आयोजन में 12 पारंपरिक विधाओं पर आधारित प्रतियोगिताएं होंगी, जिनमें जनजातीय नृत्य, गीत, वाद्ययंत्र, शिल्प, व्यंजन, वेशभूषा, चित्रकला, नाट्य और वन-औषधि जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहेंगे। प्रतियोगिताएं तीन चरणों में आयोजित होंगी—जनपद, जिला और संभाग स्तरीय।
पहला चरण 5 से 15 जनवरी तक जनपद स्तर पर होगा। दूसरा चरण 20 से 25 जनवरी तक जिला स्तर पर और अंतिम चरण 1 से 5 फरवरी तक संभाग स्तरीय प्रतियोगिताएं होंगी। हर चरण के विजेताओं को प्रमाण पत्र और पुरस्कार राशि दी जाएगी।
बैठक में निर्णय लिया गया कि बस्तर पंडुम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान बढ़ाने के लिए जनजातीय बाहुल्य राज्यों के जनप्रतिनिधियों, केंद्रीय मंत्रियों, विदेशी राजनयिकों, राजदूतों और बस्तर क्षेत्र के विशेषज्ञों एवं विशिष्ट व्यक्तियों को आमंत्रित किया जाएगा। इसके साथ ही बस्तर के समाज प्रमुखों, सिरहा, मांझी और चालकी प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित करने पर सहमति बनी।
इस आयोजन में बस्तर संभाग के सातों जिलों के 1885 ग्राम पंचायतों, 32 जनपद पंचायतों, 8 नगर पालिकाओं, 12 नगर पंचायतों और 1 नगर निगम क्षेत्र के प्रतिभागियों की भागीदारी होगी। बैठक में संस्कृति विभाग के सचिव रोहित यादव, संचालक विवेक आचार्य, बस्तर पंडुम के नोडल अधिकारी युगल किशोर और मंत्री अग्रवाल के ओएसडी जितेंद्र सिंह उपस्थित रहे।
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बैठक में बस्तर संभाग के विविध लोकनृत्य, गीत-संगीत, पारंपरिक धरोहर, वेशभूषा, व्यंजन, आंचलिक साहित्य और जनजातीय जीवन से जुड़े तत्वों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत करने की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा हुई। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर पंडुम न सिर्फ सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का प्रयास है, बल्कि बस्तर के कलाकारों को बड़ा मंच देने का महत्वपूर्ण अवसर भी है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को बेहतर समन्वय के साथ समयबद्ध तैयारी करने निर्देश दिए।
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वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि यह आयोजन बस्तर के युवाओं के लिए अपनी सांस्कृतिक विविधता को बड़े स्तर पर प्रदर्शित करने का मौका है। वहीं, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि यह महोत्सव छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का मजबूत परिचायक होगा, इसलिए सभी तैयारियां निर्धारित समयसीमा में पूरी की जाएंगी।
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‘बस्तर पंडुम 2026’ का आयोजन 5 जनवरी से 5 फरवरी 2026 तक किया जाएगा। एक महीने तक चलने वाले इस आयोजन में 12 पारंपरिक विधाओं पर आधारित प्रतियोगिताएं होंगी, जिनमें जनजातीय नृत्य, गीत, वाद्ययंत्र, शिल्प, व्यंजन, वेशभूषा, चित्रकला, नाट्य और वन-औषधि जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहेंगे। प्रतियोगिताएं तीन चरणों में आयोजित होंगी—जनपद, जिला और संभाग स्तरीय।
पहला चरण 5 से 15 जनवरी तक जनपद स्तर पर होगा। दूसरा चरण 20 से 25 जनवरी तक जिला स्तर पर और अंतिम चरण 1 से 5 फरवरी तक संभाग स्तरीय प्रतियोगिताएं होंगी। हर चरण के विजेताओं को प्रमाण पत्र और पुरस्कार राशि दी जाएगी।
बैठक में निर्णय लिया गया कि बस्तर पंडुम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान बढ़ाने के लिए जनजातीय बाहुल्य राज्यों के जनप्रतिनिधियों, केंद्रीय मंत्रियों, विदेशी राजनयिकों, राजदूतों और बस्तर क्षेत्र के विशेषज्ञों एवं विशिष्ट व्यक्तियों को आमंत्रित किया जाएगा। इसके साथ ही बस्तर के समाज प्रमुखों, सिरहा, मांझी और चालकी प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित करने पर सहमति बनी।
इस आयोजन में बस्तर संभाग के सातों जिलों के 1885 ग्राम पंचायतों, 32 जनपद पंचायतों, 8 नगर पालिकाओं, 12 नगर पंचायतों और 1 नगर निगम क्षेत्र के प्रतिभागियों की भागीदारी होगी। बैठक में संस्कृति विभाग के सचिव रोहित यादव, संचालक विवेक आचार्य, बस्तर पंडुम के नोडल अधिकारी युगल किशोर और मंत्री अग्रवाल के ओएसडी जितेंद्र सिंह उपस्थित रहे।