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CG: बीएड डिग्रीधारी लेक्चरर्स की पदोन्नति पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई, ज्वाइनिंग पर रोक; अवमानना पर नाराजगी
Wed, 11 Jun 2025 10:01 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
Published by: श्याम जी.
Updated Wed, 11 Jun 2025 10:01 PM IST
सार
बिलासपुर हाईकोर्ट ने बीएड डिग्रीधारी लेक्चरर्स की प्राचार्य पदोन्नति याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने ज्वाइनिंग को अमान्य कर प्रक्रिया पर रोक लगाई। गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
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बिलासपुर हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बीएड डिग्रीधारी लेक्चरर्स को ही प्राचार्य पद पर प्रमोशन देने की मांग को लेकर दायर याचिकाओं पर बुधवार को डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता शिक्षकों के अधिवक्ताओं ने जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा। मामले में गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी। समर वेकेशन से पहले इस मामले में सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने 9 जून तक प्रमोशन प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।
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सुनवाई के दौरान राज्य शासन और स्कूल शिक्षा विभाग पर नाराजगी जाहिर करते हुए कोर्ट ने कहा था कि आदेश के बाद भी शिक्षकों को प्राचार्य पद पर ज्वाइन कराया गया। नाराज कोर्ट ने यह भी कहा था कि यह न्यायालयीन अवमानना का मामला बनता है। आगामी आदेश तक सभी ज्वाइनिंग को भी हाईकोर्ट ने अमान्य कर दिया था।
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उल्लेखनीय है कि प्राचार्य प्रमोशन को लेकर हाईकोर्ट में कई याचिकाएं लगी है। एक मामला 2019 का है, जबकि दूसरा प्रकरण 2025 और बीएड-डीएलएड से जुड़ा है। 28 मार्च 2025 को जब कोर्ट में पिछली सुनवाई हुई थी तो राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को आश्वस्त किया गया था कि अगली सुनवाई तक प्राचार्य प्रमोशन का आदेश जारी नहीं किया जाएगा। कोर्ट को आश्वस्त करने के बाद भी राज्य शासन ने 30 अप्रैल को प्रमोशन लिस्ट जारी कर दी। अगले दिन एक मई को हाईकोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।
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सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच के समक्ष याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने ज्वाइनिंग का मुद्दा भी उठाया था। कोर्ट ने लेक्चरर से प्रिंसिपल पद पर पदोन्नति पर सात मई तक रोक लगा दी थी। इसके बाद भी कई जिलों में ज्वाइनिंग करा दी गई। बताया गया कि प्राचार्यों के प्रमोशन आदेश में स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया गया था कि यह पदोन्नति हाई कोर्ट के आदेश के अधीन रहेगी। इसके बाद भी कई जगहों पर प्राचार्य पद पर ज्वाईनिंग देकर पावती ले ली गई। इसमें डीईओ और व्याख्याताओं के मिलीभगत की बात भी उठाई गई। ऐसे शिक्षकों की निलंबन की मांग भी की गई।