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चरमराई शिक्षा व्यवस्था: मुख्यालय में नहीं रहते संस्था प्रमुख और शिक्षक, डीईओ की संलिप्तता पर सवाल
Thu, 24 Apr 2025 05:29 PM IST
श्याम जी.
अणर उजाला नेटवर्क, बालोद
अणर उजाला नेटवर्क, बालोद
Published by: श्याम जी.
Updated Thu, 24 Apr 2025 05:29 PM IST
सार
बालोद जिले के डौंडी विकासखंड में संस्था प्रमुख और शिक्षक मुख्यालय में नहीं रहते, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जिला शिक्षा अधिकारी पर जांच में पक्षपात और संरक्षण देने के आरोप लगे हैं।
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शासकीय कन्या पूर्व माध्यमिक शाला पथराटोला
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बालोद जिले के डौंडी विकासखंड में शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कई सरकारी स्कूलों के संस्था प्रमुख और शिक्षक रायपुर, दुर्ग, भिलाई और धमतरी से रोजाना आना-जाना करते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी (अल्पसंख्यक मोर्चा) स्वाधीन जैन ने जिला कलेक्टर को शिकायत पत्र सौंपकर इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग की है।
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शिकायत में कहा गया है कि पथराटोला की शासकीय कन्या पूर्व माध्यमिक शाला के प्रधान पाठक के खिलाफ पहले भी शिकायत हुई थी। इसकी जांच के लिए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने एक ऐसे प्राचार्य को जांचकर्ता नियुक्त किया, जो स्वयं रायपुर, दुर्ग और भिलाई से आना-जाना करते हैं। 22 अप्रैल को हुई जांच में न तो जनपद सदस्य, सरपंच और न ही पंचों का अभिमत लिया गया, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
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आरोप है कि डीईओ ऐसे संस्था प्रमुखों और शिक्षकों को संरक्षण दे रहे हैं, जो मुख्यालय में रहने के बावजूद गृह भाड़ा भत्ता लेते हैं और अपने करीबी शिक्षकों के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करवाते हैं। पथराटोला हाईस्कूल की प्राचार्य सहित कई शिक्षक-शिक्षिकाएं रोजाना बाहर से आते-जाते हैं। शिकायत के बावजूद उक्त प्रधान पाठक को बार-बार कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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गौरतलब है कि जांचकर्ता और शिकायतकर्ता शिक्षक कथित तौर पर एक ही वाहन (सीजी 07 एमबी 1051, सूमो) से रोजाना आना-जाना करते हैं, जिससे जांच की पारदर्शिता संदिग्ध हो गई है। जैन ने आरोप लगाया कि डीईओ की मिलीभगत से शिक्षा विभाग के कुछ कर्मचारी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, जबकि छत्तीसगढ़ शासन शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रयासरत है।
उन्होंने मांग की है कि मुख्यालय में अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो। इस मामले में डीईओ की भूमिका की भी जांच की आवश्यकता है, ताकि शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।