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माओवादी या निर्दोष?: मुठभेड़ में नक्सलियों संग मारा गया महेश कोडियाम, सरकारी स्कूल में करता था रसोइया का काम
Sun, 22 Jun 2025 02:35 PM IST
श्याम जी.
पीटीआई, बीजापुर
पीटीआई, बीजापुर
Published by: श्याम जी.
Updated Sun, 22 Jun 2025 02:35 PM IST
सार
बीजापुर में नक्सल विरोधी अभियान में मारे गए सात नक्सलियों में एक स्कूल रसोइया महेश कोडियाम था। कोडियाम को माओवादियों की राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र समिति का सदस्य बताया गया, जिस पर एक लाख रुपये का इनाम था।
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नक्सली मुठभेड़
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में चार से सात जून के बीच इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सात नक्सलियों को मार गिराया गया। पुलिस ने मारे गए एक नक्सली की पहचान फरसेगढ़ थाना क्षेत्र के इरपागुट्टा गांव निवासी महेश कोडियाम के रूप में की, जो एक सरकारी स्कूल में रसोइया सहायक के रूप में कार्यरत था।
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पुलिस के अनुसार, मारे गए नक्सलियों में माओवादियों की केंद्रीय समिति के सदस्य नरसिंह चालम उर्फ सुधाकर (40 लाख रुपये का इनाम) और तेलंगाना राज्य समिति के विशेष क्षेत्रीय समिति के सदस्य भास्कर उर्फ मैलारापु अडेलु (45 लाख रुपये का इनाम) शामिल थे। कोडियाम को माओवादियों की राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र समिति का सदस्य बताया गया, जिस पर एक लाख रुपये का इनाम था।
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बीजापुर पुलिस ने बयान जारी कर कहा कि कोडियाम इरपागुट्टा के प्राथमिक विद्यालय में रसोइया सहायक था और स्कूल प्रबंधन समिति द्वारा नियुक्त किया गया था। उसे मार्च 2025 तक पारिश्रमिक मिल रहा था। पुलिस ने कहा, 'कोडियाम के वरिष्ठ माओवादी नेताओं सुधाकर और भास्कर के साथ संबंधों की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। मामले की गहन, निष्पक्ष और पेशेवर जांच जारी है।'
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पुलिस ने प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) संगठन से जुड़े लोगों से संबंध तोड़ने की अपील की, चेतावनी दी कि यह संगठन सार्वजनिक सुरक्षा, क्षेत्रीय शांति और शामिल व्यक्तियों के लिए खतरा है। वहीं, शनिवार को इरपागुट्टा के कुछ ग्रामीणों ने दावा किया कि कोडियाम का माओवादी संगठन से कोई संबंध नहीं था। उन्होंने बताया कि वह स्कूल में मध्याह्न भोजन तैयार करता था और उसे इसके लिए बैंक खाते में पारिश्रमिक मिलता था।
ग्रामीणों के अनुसार, कोडियाम के परिवार में पत्नी और सात बच्चे हैं। इस मामले ने क्षेत्र में चर्चा को जन्म दिया है, क्योंकि पुलिस और ग्रामीणों के दावों में विरोधाभास सामने आया है। जांच के नतीजे इस मामले की सच्चाई को और स्पष्ट करेंगे।