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GPM: फिर सामने आई आदिवासी विकास विभाग की लापरवाही, नहीं मिल रहा समय से खाना; आश्रम अधीक्षक व कर्मचारी निलंबित
Wed, 04 Sep 2024 03:34 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला पेंड्रा मरवाही
अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला पेंड्रा मरवाही
Published by: Digvijay Singh
Updated Wed, 04 Sep 2024 03:34 PM IST
सार
गौरेला पेण्ड्रा मरवाही जिले में आदिवासी विकास विभाग की लापरवाही और अव्यवस्था की बानगी थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। विभाग द्वारा संचालित 50 सीटर आदिवासी आश्रम शाला नेवरी के बच्चे रात 9:00 बजे तक भूखे रह गए।
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आदिवासी आश्रम शाला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गौरेला पेण्ड्रा मरवाही जिले में आदिवासी विकास विभाग की लापरवाही और अव्यवस्था की बानगी थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। विभाग द्वारा संचालित 50 सीटर आदिवासी आश्रम शाला नेवरी के बच्चे रात 9:00 बजे तक भूखे रह गए, भूखे बच्चों को देखकर गांव के पंच सरपंच ने मामले की जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों को दी, जिसके बाद दूसरे छात्रावास से गैस सिलेंडर पहुंचा तब कहीं जाकर बच्चों को दाल चावल और आचार का भोजन मिल सका।
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वहीं छात्रावास के रसोईया और चौकीदार ड्यूटी टाइम में भी छात्रावास में शराब के नशे में धुत होने का आरोप अधीक्षक सहित ग्रमीणों और छात्रों ने लगाया... जबकि 50 सीटर छात्रावास से 37 छात्र रात में छात्रावास से गायब मिले, अव्यवस्था लापरवाही और भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुका आदिवासी विकास विभाग में जो अव्यवस्था सामने आई जो पूरे विभाग के मुंह पर कालिख की तरह है गौरेला विकासखंड अंतर्गत वन क्षेत्र में संचालित नेवरी बालक आश्रम छात्रावास के छात्र रात 9:00 बजे तक भूखे रह गए, भूखे रहने की वजह जिम्मेदारों की लापरवाही है।
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छात्रावास में कुकिंग गैस सिलेंडर एक दिन पहले ही शाम को खत्म हो गया जिसकी सुध किसी ने नहीं ली, इस वजह से रात को भोजन ही नहीं बन सका, भूख से बिलबिलाते मासूम छात्र-छात्रावास परिसर में मुंह लटकाए घूम रहे थे जिन्हें देखकर ग्रामीणों का ध्यान आकर्षित हुआ और उन्होंने छात्रों से पूछा तब छात्रों ने अपनी व्यथा बताई कि आज उन्हें भोजन ही नहीं मिला है, जिस पर गांव के पंच सरपंच मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी अधिकारियों को दी, इसके बाद प्रशासन हरकत में आया, पर जिम्मेदार आदिवासी विकास विभाग की लापरवाही देखिए 50 सीटर छात्रावास के छात्र भूखे पड़े रहे पर किसी भी अधिकारी ने रात में छात्रावास पहुंचने या जांच करने या व्यवस्था दुरुस्त करने की जहमत नहीं उठाई, बल्कि एक दूसरे छात्रावास के अधीक्षकों को निर्देशित कर दिया कि वहां गैस सिलेंडर पहुंचा दे इसके बाद दूसरे छात्रावास से अधीक्षक रात में गैस सिलेंडर लेकर पहुँचे तब दाल चावल बना और तब कहीं जाकर छात्रावास के छात्र भोजन कर सके।
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शासन द्वारा निर्धारित मेन्यू के अनुसार रात छात्रों को चावल के साथ बेसन की कढ़ी और आलू की सूखी सब्जी मिलनी चाहिए थी, पर बच्चों को जो दाल चावल नसीब हुआ वही उनके लिए सौभाग्य की बात थी 15 जून के बाद से नए शैक्षिक सत्र प्रारंभ होने के बाद ढाई महीने में किसी भी अधिकारी ने इसकी ना तो शिकायत की ना ही इस मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई , जो यह साबित करता है कि विभाग इस गोरख धंधे में पूरी तरह संलिप्त है अब नव निहालों का भविष्य बनाने के लिए शुरू किए गए इस आश्रम शाला की दूसरी अव्यवस्था भी समझ ली जाए वैसे तो छात्रावास में अधीक्षक सहित कुल 6 कर्मचारी हैं पर मौके पर अधीक्षक के साथ एक ही कर्मचारी मिला वह भी शराब पिए हुए था जो हमे देख कर अंधेरे में भाग गया और उसके शराब पीने की पुष्टि छात्रवासी छात्रों के साथ ग्रामीणों और अधीक्षक ने भी करी, छात्रों ने यहां तक बताया कि दोनों कर्मचारियों शराब पीकर भोजन बनाते हैं, अब यदि छात्रावास में कर्मचारी शराब पिए हुए रहेंगे तो जाहिर है भविष्य में छात्र शराब की भी आकृष्ट हो जाए तो कोई अचम्भा नहीं है। आदिवासियों के भविष्य को सुधारने के लिए बनाया गया आदिवासी विकास विभाग पूरी तरह अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के गर्त में डूब चुका है, ऐसे में कर्मचारी शराब पीकर छात्रावास में रहे या 50 सीटर छात्रावास में 13 बच्चे उपस्थित रहे यह बच्चे रात भर भूखे रहे विभाग मूकदर्शक बनकर सिर्फ तमाशा ही देख रहा है।
आश्रम अधीक्षक और चतुर्थ वर्ग कर्मचारी को किया गया निलंबित
काम व कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने पर आश्रम अधीक्षक और चतुर्थ वर्ग कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया है। कलेक्टर द्वारा जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि आदिवासी बालक आश्रम नेवरी, विकास खण्ड गौरेला में पदस्थ प्रभारी आश्रम अधीक्षक रतिलाल भानू (मूल पद प्रधान पाठक, प्राथमिक शाला नेवरी) के द्वारा दिनांक 03.09.2024 को आश्रम से बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहने एवं संस्था में अव्यवस्था होने के कारण आश्रम में निवासरत छात्रों को रात्रि का भोजन समय में प्राप्त नहीं होना पाया, जो आपके कर्तव्यों के प्रति उदासीनता को प्रकट करता है।
आपका यह कृत्य घोर अनुशासन हीनता एवं कदाचरण की श्रेणी में आता है तथा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 के विरूद्ध है। अतः रतिलाल मानू, (मूल पद प्रधान पाठक, प्राथमिक शाला नेवरी) को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 9 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। रतिलाल भानू का निलंबन अवधि में मुख्यालय कार्यालय विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी गौरेला, जिला-गौरेला पेण्ड्रा मरवाही नियत किया जाता है। निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी।
इसी तरह सहायक आयुक्त आदिवासी विकास द्वारा जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि आदिवासी बालक आश्रम नेवरी, विकास खण्ड गौरेला में पदस्थ राजेश सिंह कंवर चतुर्थ वर्ग कर्मचारी (आकस्मिक निधि), के द्वारा दिनांक 03.09.2024 को आश्रम में अव्यवस्था होने के कारण आश्रम में निवासरत छात्रों को रात्रि का भोजन समय में प्राप्त नहीं हो पाया, जो आश्रम कर्मचारी के कर्तव्यों के प्रति उदासीनता को प्रकट करता है।
आपका यह कृत्य घोर अनुशासनहीनता एवं कदाचरण की श्रेणी में आता है तथा छ०ग० सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 के विरुद्ध है। अतः राजेश सिंह कवर बतुर्थ वर्ग कर्मचारी (आकस्मिक निधि) को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 9 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। राजेश सिंह कंवर का निलंबन अवधि में मुख्यालय कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास जिला-गौरेला पेंड्रा मरवाही नियत किया जाता है। निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी।