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छत्तीसगढ़: कभी कोरबा के पसान तो कभी पेंड्रा वन परिक्षेत्र में पहुंच रहा 53 हाथियों का झुंड, फसलें तबाह
Sun, 11 Oct 2026 08:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 11 Oct 2026 08:49 PM IST
सार
पसान और पेंड्रा वन क्षेत्रों के बीच 52 हाथियों के विशाल दल की आवाजाही से गांवों में दहशत फैल गई है। हाथियों के डर से ग्रामीण रातभर जागकर पहरा दे रहे हैं, तो कई परिवार महिलाओं और बच्चों के साथ मकानों की छतों पर रात गुजारने को मजबूर हैं।
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खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा रहा हाथियों का दल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के पसान और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रा वन परिक्षेत्र के बीच 52 हाथियों के दल की लगातार आवाजाही से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। हाथियों का विशाल दल कभी पसान के जंगलों में पहुंच रहा है, तो कभी पेंड्रा वन परिक्षेत्र की सीमा में प्रवेश कर रहा है। इससे आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को जान-माल के नुकसान का डर सता रहा है।
हाथियों के खौफ से बदली ग्रामीणों की दिनचर्या
हाथियों की लगातार मौजूदगी के कारण प्रभावित गांवों में ग्रामीणों की दिनचर्या बदल गई है। दिन में लोग किसी तरह अपने घरों में रहते हैं, लेकिन रात होते ही परिवार की सुरक्षा की चिंता सताने लगती है। हालात ऐसे हैं कि कई ग्रामीण महिलाओं और बच्चों के साथ ऊंचे पक्के मकानों की छतों पर रात गुजारने को मजबूर हैं। लगातार कई रातों से ठीक से नींद नहीं मिलने के कारण लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है।
खेतों में घुसकर फसलों को पहुंचा रहे नुकसान
ग्रामीणों के मुताबिक, 52 हाथियों का दल खेतों में पहुंचकर खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। इससे किसानों की मेहनत और आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। घर, खेत और बाड़ी की सुरक्षा के लिए ग्रामीण रातभर जागकर निगरानी कर रहे हैं।
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हाथियों को दूर रखने के लिए कुछ ग्रामीण मशाल और पटाखों का सहारा ले रहे हैं। हालांकि, इतने बड़े हाथियों के दल के सामने इस तरह के प्रयास जोखिम भरे हो सकते हैं। हाथियों के करीब जाने या उन्हें खुद भगाने की कोशिश से जान का खतरा भी बढ़ सकता है।
पसान के जंगल में लौटा हाथियों का दल
फिलहाल 52 हाथियों का दल पेंड्रा वन परिक्षेत्र से वापस लौटकर कोरबा जिले के पसान क्षेत्र के जंगल में मौजूद बताया जा रहा है। यह स्थान पेंड्रा वन परिक्षेत्र से करीब दो किलोमीटर दूर है। ऐसे में दोनों वन क्षेत्रों के बीच हाथियों की आवाजाही लगातार बनी हुई है और आसपास के गांवों में खतरा बरकरार है।
वन विभाग के सामने निगरानी और सुरक्षा की चुनौती
हाथियों के लगातार मूवमेंट से वन विभाग के सामने प्रभावित गांवों की निगरानी करने और ग्रामीणों को समय रहते सतर्क करने की चुनौती है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि वन विभाग निगरानी बढ़ाकर हाथियों की मौजूदगी की समय पर सूचना देगा, ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
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हाथियों के खौफ से बदली ग्रामीणों की दिनचर्या
हाथियों की लगातार मौजूदगी के कारण प्रभावित गांवों में ग्रामीणों की दिनचर्या बदल गई है। दिन में लोग किसी तरह अपने घरों में रहते हैं, लेकिन रात होते ही परिवार की सुरक्षा की चिंता सताने लगती है। हालात ऐसे हैं कि कई ग्रामीण महिलाओं और बच्चों के साथ ऊंचे पक्के मकानों की छतों पर रात गुजारने को मजबूर हैं। लगातार कई रातों से ठीक से नींद नहीं मिलने के कारण लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है।
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खेतों में घुसकर फसलों को पहुंचा रहे नुकसान
ग्रामीणों के मुताबिक, 52 हाथियों का दल खेतों में पहुंचकर खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। इससे किसानों की मेहनत और आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। घर, खेत और बाड़ी की सुरक्षा के लिए ग्रामीण रातभर जागकर निगरानी कर रहे हैं।
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हाथियों को दूर रखने के लिए कुछ ग्रामीण मशाल और पटाखों का सहारा ले रहे हैं। हालांकि, इतने बड़े हाथियों के दल के सामने इस तरह के प्रयास जोखिम भरे हो सकते हैं। हाथियों के करीब जाने या उन्हें खुद भगाने की कोशिश से जान का खतरा भी बढ़ सकता है।
पसान के जंगल में लौटा हाथियों का दल
फिलहाल 52 हाथियों का दल पेंड्रा वन परिक्षेत्र से वापस लौटकर कोरबा जिले के पसान क्षेत्र के जंगल में मौजूद बताया जा रहा है। यह स्थान पेंड्रा वन परिक्षेत्र से करीब दो किलोमीटर दूर है। ऐसे में दोनों वन क्षेत्रों के बीच हाथियों की आवाजाही लगातार बनी हुई है और आसपास के गांवों में खतरा बरकरार है।
वन विभाग के सामने निगरानी और सुरक्षा की चुनौती
हाथियों के लगातार मूवमेंट से वन विभाग के सामने प्रभावित गांवों की निगरानी करने और ग्रामीणों को समय रहते सतर्क करने की चुनौती है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि वन विभाग निगरानी बढ़ाकर हाथियों की मौजूदगी की समय पर सूचना देगा, ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।