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'गजरथ यात्रा': हाथी-मानव सहजीवन की पहल, पर्यावरण को सहारा; जशपुर के 14 ग्राम पंचायतों में चला जागरूकता अभियान
Fri, 04 Jul 2025 06:07 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, जशपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जशपुर
Published by: श्याम जी.
Updated Fri, 04 Jul 2025 06:07 PM IST
सार
जशपुर में वन विभाग की 'गजरथ यात्रा' ग्रामीणों को हाथी-मानव संघर्ष से बचाव और सहजीवन के लिए जागरूक कर रही है। किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत सागौन रोपण और वित्तीय सहायता से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।
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विद्यार्थियों से संवाद
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जशपुर जिले में वन विभाग ने हाथी-मानव संघर्ष की गंभीर समस्या के समाधान के लिए एक अनोखी पहल 'गजरथ यात्रा' की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 21 जून 2025 को इस यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। यह यात्रा हाथियों के साथ सहअस्तित्व की दिशा में ग्रामीणों को प्रेरित करने का एक प्रभावशाली प्रयास है।
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अब तक यह यात्रा तपकरा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तपकरा, सिंगीबहार, जबला सहित 14 ग्राम पंचायतों में पहुंच चुकी है। इसी क्रम में तीन जुलाई को मेंढरबहार शासकीय हाईस्कूल में वनमंडलाधिकारी शशि कुमार जशपुर ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए हाथी मानव द्वंद्व, हाथियों के व्यवहार, खतरे से बचाव और सहजीवन के उपायों पर जागरूक किया। बच्चों को बताया गया कि कैसे सतर्कता, सही जानकारी और सामूहिक प्रयासों से हाथियों से जुड़ी घटनाओं को टाला जा सकता है।
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गजरथ यात्रा केवल जनजागरूकता तक सीमित नहीं रही। वन विभाग की 'किसान वृक्ष मित्र योजना' के अंतर्गत वनमंडलाधिकारी ने ग्राम मेंढरबहार के किसान डेविड तिर्की की निजी भूमि पर सागौन के पौधे भी लगाए। इस योजना के तहत किसानों को निशुल्क बहुपयोगी पौधे दिए जा रहे हैं और आगामी तीन वर्षों तक पौधों के संरक्षण के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान की जा रही है। डेविड तिर्की द्वारा एक एकड़ भूमि में लगभग 500 सागौन पौधों का रोपण किया गया है।
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यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम है, बल्कि जंगली हाथियों और मानव समाज के बीच संतुलन और शांति स्थापित करने का भी माध्यम बन रही है। छत्तीसगढ़ शासन और वन विभाग की यह संयुक्त पहल अब राष्ट्रीय स्तर पर 'हाथी-मानव संघर्ष' के समाधान के लिए मॉडल के रूप में उभर रही है। 'गजरथ' अब केवल यात्रा नहीं, बल्कि जंगल और गांव के बीच संवाद और समझ का सेतु बनता जा रहा है।