दुखद: जशपुर रियासत के पूर्व विधायक युद्धवीर सिंह जूदेव का निधन, लीवर की समस्या से जूझ रहे थे 'छोटू बाबा'
बीते कई दिनों से युद्धवीर सिंह लीवर की बीमारी से परेशान थे। बंगलूरू में उनका लीवर ट्रांसप्लांट होना था, लेकिन इससे पहले उनकी तबीयत बिगड़ गई और आज सुबह उनका निधन हो गया। युद्धवीर सिंह बीमार होने के बाद भी अंतिम समय तक लोगों के लिए संघर्ष करते रहे। भ्रष्टाचार सहित कई मुद्दों को लेकर मीडिया के जरिए आवाज उठाते रहे।
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छत्तीसगढ़ भाजपा नेता और दिवंगत दिलीप सिंह जूदेव के छोटे बेटे युद्धवीर सिंह का सोमवार तड़के निधन हो गया। 39 साल की उम्र में ही वह दुनिया छोड़ गए। युद्धवीर सिंह का जन्म 1 मार्च 1982 को हुआ था। वह पिछले कई दिनों से लीवर की बीमारी से परेशान थे और बंगलूरू के अस्पताल में इलाज चल रहा था। लीवर ट्रांसप्लांट कराने के लिए पहले उन्हें दिल्ली में भर्ती कराया गया, लेकिन दिल्ली के डॉक्टरों ने उन्हें बंगलूरू रेफर कर दिया था। यहां उनका लीवर ट्रांसप्लांट होना था, लेकिन इससे पहले ही उनकी सेहत बिगड़ने लगी। डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर पर रखा, लेकिन कई दिनों के प्रयास के बाद भी नहीं बचाया जा सका। छत्तीसगढ़ की राजनीति खासकर जशपुर रियासत के लोगों के उनके निधन से बड़ा झटका लगा है। साथ ही भाजपा को भी बड़ी क्षति पहुंची है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए युवाओं में थे लोकप्रिय
जशपुर रियासत में 'छोटू बाबा' के नाम से जानने वाले युद्धवीर सिंह जूदेव बेबाकी और ईमानदारी से अपनी बात रखे जाने के लिए जाने जाते थे। उनके चाहने वाले युवाओं की एक बड़ी संख्या है। युद्धवीर सिंह विपक्ष में रहते हुए भी हमेशा चर्चा में बने रहे। गांव-गरीब और पिछड़ों के हक की लड़ाई के लिए वह हर बात दमदारी से उठाते थे। फिर चाहे भ्रष्टाचार का मुद्दा ही क्यों न हो। इसके चलते वह क्षेत्र में खासकर युवाओं में बहुत लोकप्रिय थे।
अंतिम समय में भी लोगों के लिए संघर्ष करते रहे युद्धवीर सिंह
युद्धवीर सिंह बीमार होने के बाद भी लोगों के लिए काम करते रहे। पिछले कई महीनों से वह बीमार चल रहे थे, लेकिन क्षेत्र की जनता के लिए वह दमदारी से आवाज उठाते रहे। भ्रष्टाचार सहित कई मुद्दों को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए उन्होंने अपनी बात रखी। युद्धवीर सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष पद से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। इसके बाद वे चंद्रपुर से दो बार विधायक चुने गए। पहली बार 2008 में और फिर 2013 में विधायक निर्वाचित हुए।
प्रबल प्रताप और संयोगिता सिंह के पास राजनीतिक विरासत
भाजपा नेता स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव की राजनीतिक विरासत अब उनके दूसरे बेटे प्रबल प्रताप सिंह और छोटे बेटे दिवंगत युद्धवीर सिंह की पत्नी संयोगिता सिंह आगे ले जाएंगे। दिलीप सिंह जूदेव के तीन पुत्र थे। इनमें से सबसे बड़े पुत्र शत्रुंजय सिंह का निधन 2012 में हार्ट अटैक होने से हो गया। इसके बाद प्रबल प्रताप और युद्धवीर भाजपा की राजनीति में सक्रिय रहे। युद्धवीर सिंह की पत्नी संयोगिता सिंह मौजूदा दौर में भाजपा में सक्रिय हैं और पिछले विधानसभा चुनाव में चंद्रपुर विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ा। हालांकि, वे चुनाव हार गईं, लेकिन कार्य समिति की सदस्य के रूप में कार्य करती रहीं। प्रबल प्रताप भी जशपुर की पंचायत राजनीति में सक्रिय रहे और उपाध्यक्ष रहे। वे भी अभी भाजपा में संगठन मंत्री हैं। वे जशपुर में ही रहते हैं।