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छत्तीसगढ़: IIM रायपुर के दीक्षांत समारोह में एस जयशंकर बोले- ग्लोबल सोच अपनाएं और भारत को आत्मनिर्भर बनायें
Sat, 04 Apr 2026 01:19 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sat, 04 Apr 2026 01:19 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ के नया रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर के 15वें दीक्षांत समारोह में देश के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने छात्रों को संबोधित किया।
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आईआईएम रायपुर में विदेश मंत्री एस जयशंकर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ के नया रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर के 15वें दीक्षांत समारोह में देश के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने छात्रों को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच युवाओं की भूमिका और उनकी तैयारी पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि आज का दौर तेज़ी से बदलावों का है, जहां सीमाओं के पार होने वाली घटनाएं सीधे हमारे जीवन और करियर को प्रभावित करती हैं। ऐसे में छात्रों के लिए जरूरी है कि वे केवल अपनी पढ़ाई या क्षेत्र तक सीमित न रहें, बल्कि दुनिया में हो रहे राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तनों को भी समझें।
भारत की प्रगति का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि देश ने बीते वर्षों में आर्थिक मोर्चे पर मजबूत पकड़ बनाई है और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान को और सशक्त किया है। उन्होंने यह भी कहा कि कठिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद भारत ने स्थिरता बनाए रखी, जो उसकी नीतियों और क्षमता को दर्शाता है।
अपने संबोधन में उन्होंने बुनियादी ढांचे और तकनीकी विकास पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश में सड़कों, रेल नेटवर्क और बंदरगाहों के विस्तार के साथ-साथ डिजिटल क्रांति ने व्यापार और दैनिक जीवन को अधिक सुगम बनाया है। इससे युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खुले हैं। इसके अलावा, उन्होंने आत्मनिर्भरता को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए खाद्य, स्वास्थ्य और ऊर्जा क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम करने की बात कही। उनका मानना था कि इन क्षेत्रों में मजबूती भारत को वैश्विक स्तर पर और सक्षम बनाएगी।
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विदेश नीति के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार और उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार में आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। छात्रों को उन्होंने प्रेरित किया कि वे वैश्विक सोच के साथ अपने कौशल का उपयोग करें और भारत का नाम दुनिया में ऊंचा करें।
अंत में उन्होंने छात्रों को सफलता का मंत्र देते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा हर क्षेत्र में मौजूद है, इसलिए निरंतर मेहनत, नेतृत्व क्षमता और मजबूत संबंध बनाना बेहद जरूरी है।
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भारत की प्रगति का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि देश ने बीते वर्षों में आर्थिक मोर्चे पर मजबूत पकड़ बनाई है और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान को और सशक्त किया है। उन्होंने यह भी कहा कि कठिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद भारत ने स्थिरता बनाए रखी, जो उसकी नीतियों और क्षमता को दर्शाता है।
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अपने संबोधन में उन्होंने बुनियादी ढांचे और तकनीकी विकास पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश में सड़कों, रेल नेटवर्क और बंदरगाहों के विस्तार के साथ-साथ डिजिटल क्रांति ने व्यापार और दैनिक जीवन को अधिक सुगम बनाया है। इससे युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खुले हैं। इसके अलावा, उन्होंने आत्मनिर्भरता को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए खाद्य, स्वास्थ्य और ऊर्जा क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम करने की बात कही। उनका मानना था कि इन क्षेत्रों में मजबूती भारत को वैश्विक स्तर पर और सक्षम बनाएगी।
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विदेश नीति के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार और उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार में आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। छात्रों को उन्होंने प्रेरित किया कि वे वैश्विक सोच के साथ अपने कौशल का उपयोग करें और भारत का नाम दुनिया में ऊंचा करें।
अंत में उन्होंने छात्रों को सफलता का मंत्र देते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा हर क्षेत्र में मौजूद है, इसलिए निरंतर मेहनत, नेतृत्व क्षमता और मजबूत संबंध बनाना बेहद जरूरी है।