फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Drones will be used to geo-map fields, monitor opium and cannabis cultivation in Chhattisgarh

छत्तीसगढ़: ड्रोन से होगी खेतों की जियो मैपिंग, अफीम और गांजे की खेती पर पहरा

Mon, 05 Oct 2026 01:55 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Mon, 05 Oct 2026 01:55 PM IST
सार

खेतों की जियो मैपिंग के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे फसल का रकबा और वास्तविक स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। वहीं संवेदनशील इलाकों में ड्रोन सर्वे के जरिए अफीम और गांजे की अवैध खेती पर भी प्रशासन की पैनी नजर रहेगी। 

विज्ञापन
Drones will be used to geo-map fields, monitor opium and cannabis cultivation in Chhattisgarh
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ में खरीफ फसलों की वास्तविक स्थिति दर्ज करने के लिए राजस्व विभाग अक्तूबर में गिरदावरी का काम पूरा करेगा। इस बार गिरदावरी प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का व्यापक इस्तेमाल करते हुए खेतों की ड्रोन से जियो मैपिंग कराई जा रही है। मैदानी अमला खेत-खेत जाकर बुवाई का सटीक रिकॉर्ड तैयार कर रहा है। इसके साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में अफीम और गांजे की अवैध खेती पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि फसल का सही रकबा दर्ज हो ताकि किसानों को योजनाबद्ध तरीके से सभी सुविधाएं मिल सकें।
विज्ञापन


ड्रोन से होगी खेतों की जियो मैपिंग
प्रशासन खेतों की वास्तविक स्थिति जांचने के लिए तकनीक का बड़े पैमाने पर प्रयोग कर रहा है। कई क्षेत्रों में ड्रोन के जरिये खेतों की सटीक भौगोलिक लोकेशन, फसल का क्षेत्रफल और उसकी स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इसके बाद ड्रोन से मिली जानकारियों का मिलान मैदानी कर्मचारियों की रिपोर्ट से करके वास्तविक स्थिति की पड़ताल की जा रही है। गिरदावरी रिपोर्ट तैयार होने के बाद संबंधित राजस्व अधिकारी इसकी लगातार समीक्षा कर रहे हैं। यदि दर्ज फसल और धरातल की स्थिति में कोई अंतर पाया जाता है, तो जिम्मेदार अमले से तुरंत जवाब मांगा जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना है।
विज्ञापन


गांजा और अफीम की खेती पर विशेष पहरा
संवेदनशील इलाकों में मादक पदार्थों की अवैध खेती रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी गांजा और अफीम की खेती की आशंका वाले क्षेत्रों को विशेष निगरानी में रखा गया है। राजस्व, पुलिस और अन्य संबंधित विभाग आपसी समन्वय से ऐसे इलाकों के बारे में लगातार जानकारी जुटा रहे हैं। तकनीक की मदद से यानी ड्रोन सर्वे और जियो मैपिंग के जरिये संदिग्ध क्षेत्रों की तुरंत पहचान की जा रही है। पहचान होने के बाद मैदानी स्तर पर भौतिक सत्यापन कराया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों पर सख्ती से लगाम लगाई जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन


खरीफ फसलों का रकबा और योजनागत लाभ
छत्तीसगढ़ में इस वर्ष कुल 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बोनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। जानकारी के अनुसार 22 सितंबर तक राज्य में 48.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों की बुवाई पूरी की जा चुकी है। इसमें मुख्य रूप से धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली और रामतिल जैसी फसलें शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि गिरदावरी में फसल की किस्म और रकबा सही दर्ज होने से भविष्य में किसानों को सरकारी कृषि योजनाओं, फसल बीमा, मुआवजा और अन्य कृषि संबंधी लाभ आसानी से मिलेंगे। अक्तूबर में यह प्रक्रिया होने के बाद फसलवार सटीक आंकड़े जारी किए जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed