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वीरता की मिसाल: सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट सागर बोराडे ने नक्सल विरोधी अभियान में गंवाया अपना बायां पैर

Tue, 06 May 2025 11:55 AM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Tue, 06 May 2025 11:55 AM IST
सार

ऑपरेशन के बीच जब उनकी टीम का एक जवान आईईडी विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हो गया, तब सागर बोराडे ने अपने कमांड की परवाह किए बिना खुद मोर्चा संभाला। घायल जवान को सुरक्षित निकालने की कोशिश करते समय एक और आईईडी ब्लास्ट हुआ।

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CRPF Assistant Commandant Sagar Borade lost his left leg in an anti-Naxal operation in chhattisgarh
सहायक कमांडेंट सागर बोराडे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश की सुरक्षा में तैनात हमारे वीर जवानों की कहानियां अक्सर खामोशी में दबी रह जाती हैं, लेकिन कुछ नाम ऐसे होते हैं जो अपनी बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा से इतिहास में अमिट छाप छोड़ जाते हैं। सीआरपीएफ  की 204 कोबरा बटालियन के सहायक कमांडेंट सागर बोराडे का नाम भी अब उसी श्रेणी में शुमार हो गया है।

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कर्रेगुट्टा पहाड़ी जो छत्तीसगढ़ के बीजापुर और तेलंगाना की सीमा पर स्थित है। यह एक बेहद संवेदनशील इलाका माना जाता है। यह क्षेत्र न केवल घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों से घिरा है, बल्कि यहां नक्सलियों का का वर्चस्व वाला इलाका माना जाता है। विशेष रूप से नक्सली कमांडर माड़वी हिडमा की गतिविधियां इसी इलाके में केंद्रित हैं, जिससे यह क्षेत्र और भी अधिक खतरनाक बन जाता है। इसी चुनौतीपूर्ण इलाके में चलाए जा रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान कोबरा के सहायक कमांडेंट सागर बोराडे ने  साहस और नेतृत्व का परिचय दिया है। 
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ऑपरेशन के बीच जब उनकी टीम का एक जवान आईईडी विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हो गया, तब सागर बोराडे ने अपने कमांड की परवाह किए बिना खुद मोर्चा संभाला। घायल जवान को सुरक्षित निकालने की कोशिश करते समय एक और आईईडी ब्लास्ट हुआ, जिसमें उनका बायां पैर बुरी तरह जख्मी हो गया।
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खून से लथपथ और अत्यधिक पीड़ा में होने के बावजूद बोराडे ने अपने होश नहीं खोए। ऑपरेशन में तैनात मेडिकल टीम की तत्परता और एयरलिफ्ट सुविधा की मदद से उन्हें रायपुर लाया गया, जहां से उन्हें तत्काल दिल्ली रेफर किया गया। दिल्ली में इलाज के दौरान डॉक्टरों को संक्रमण और लगातार हो रहे रक्तस्राव को रोकने के लिए उनका बायां पैर काटना पड़ा। सागर बोराडे अभी आईसीयू में भर्ती हैं, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत अब स्थिर है। वे अद्भुत जीवटता और मानसिक ताकत का परिचय दे रहे हैं, जो एक सच्चे सैनिक की पहचान होती है।


इस बीच, कर्रेगुट्टा पहाड़ में तलाशी अभियान लगातार जारी है। सुरक्षा बल हर कीमत पर नक्सलियों के ठिकानों को नष्ट करने और क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए अभियान चला रहे है।

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