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दाल-चावल खानेवाले मगरमच्छ गंगाराम की मौत पर रोया पूरा गांव, निकाली अंतिम यात्रा, अब बनेगा मंदिर
Fri, 11 Jan 2019 11:05 AM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
Published by: अमर शर्मा
Updated Fri, 11 Jan 2019 11:05 AM IST
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मगरमच्छ गंगाराम
- फोटो : Social Media
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आपने मगरमच्छ के बहुत से खौफनाक वीडियो देखे होंगे या खबर पढ़ी होगी, जब मगरमच्छ ने इंसानों को जिंदा निगल लिया। लेकिन छत्तीसगढ़ के मगरमच्छ 'गंगाराम' की खबर जानकर आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे। गंगाराम की मौत पर लोग गमजदा है और पूरे गांव में मातम छा गया है। यह गांव है बवामोहतरा जो रायपुर के बेमेतरा जिले में है। गंगाराम की मौत पर पूरा गांव रो रहा है। और यह 'मगरमच्छ के आंसू' नहीं हैं। आखिर मगरमच्छ गंगाराम में ऐसी क्या बात थी कि ग्रामीणों का उससे इतना आत्मीय रिश्ता बन गया था।
मगरमच्छ गंगाराम
- फोटो : Social Media
आमतौर पर तालाब में मगरमच्छ आने की खबर के बाद ही लोग वहां पर जाना छोड़ देते हैं। लेकिन गंगाराम के साथ ऐसा नहीं था। उसने कभी किसी भी ग्रामीण को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। वहीं तालाब में नहाते समय जब लोग मगरमच्छ से टकरा जाते थे तो वह अपने ही दूर हट जाता था। तालाब में मौजूद मछलियां ही गंगाराम का आहार थी। मगरमच्छ गंगाराम को लोग घर से लाकर दाल चावल भी खिलाते थे और वह बड़े चाव से खाता था।
गंगाराम ने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। जबकि तालाब का इस्तेमाल गांव के लोग निस्तारी के रूप में सालों से करते आ रहे हैं। गांववाले कहते हैं कि एक बार जरूर एक महिला पर गंगाराम ने हमला किया था लेकिन बाद में छोड़ दिया था। गंगाराम कभी-कभी तलाब के पार आकर बैठ जाता था। बारिश के दिनों में वह गांव की गलियों और खेतों तक पहुंच जाता था। कई बार खुद गांव वालों ने उसे पकड़कर तालाब में डाला है।
गंगाराम ने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। जबकि तालाब का इस्तेमाल गांव के लोग निस्तारी के रूप में सालों से करते आ रहे हैं। गांववाले कहते हैं कि एक बार जरूर एक महिला पर गंगाराम ने हमला किया था लेकिन बाद में छोड़ दिया था। गंगाराम कभी-कभी तलाब के पार आकर बैठ जाता था। बारिश के दिनों में वह गांव की गलियों और खेतों तक पहुंच जाता था। कई बार खुद गांव वालों ने उसे पकड़कर तालाब में डाला है।
मगरमच्छ गंगाराम
- फोटो : Social Media
दरअसल गंगाराम एक ऐसा मगरमच्छ था जो जिसकी आयु 100 साल से ज्यादा थी। ग्रामीणों ने बताया कि गंगाराम की उम्र करीब 125 साल थी। हालांकि इस बात के कोई साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। इसका नाम गंगाराम कब और कैसे पड़ा इसकी भी कोई प्रमाणिक जानकारी नहीं है। बेमेतरा जिला मुख्यालय से 6 किलोमीटर दूर बावामोहतरा में गंगराम की कहानी मशहूर है। गांववाले बताते हैं कि बावामोहतरा एक धार्मिक-पौराणिक नगरी के रूप में जिले के भीतर अपनी पहचान रखता है।
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मगरमच्छ गंगाराम
- फोटो : Social Media
गंगाराम की मौत की खबर मिलते ही वन विभाग की टीम पुलिस के साथ पहुंची। वन विभाग मगरमच्छ का पोस्टमार्टम करने के लिए ले जाने लगी। लेकिन ग्रामीम गांव में ही पोस्टमार्टम कराए जाने की मांग करने लगे। कलेक्टर ने गंगाराम से गांववालों का लगाव देखकर अधिकारियों को गांव में ही पोस्टमार्टम करने की अनुमित दी।
तालाब के किनारे ही गंगाराम का पोस्टमार्टम हुआ। फिर ग्रामीणों ने ढोल-मंजीरे के साथ गंगाराम की शवयात्रा निकाली और नम आंखों से तालाब के पास ही मगरमच्छ गंगाराम को दफना दिया।
तालाब के किनारे ही गंगाराम का पोस्टमार्टम हुआ। फिर ग्रामीणों ने ढोल-मंजीरे के साथ गंगाराम की शवयात्रा निकाली और नम आंखों से तालाब के पास ही मगरमच्छ गंगाराम को दफना दिया।
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मगरमच्छ गंगाराम
- फोटो : Social Media
ग्रामीणों के मुताबिक इस गांव में महंत ईश्वरीशरण देव यूपी से आए थे जो एक सिद्ध पुरूष थे। बताते हैं कि वही अपने साथ पालतू मगरमच्छ लेकर आए थे। उन्होंने गांव के तालाब में उसे छोड़ा था। बताते हैं उनके साथ-साथ पहले कुछ और भी मगरमच्छ थे। लेकिन कालांतर में सिर्फ गंगाराम ही जीवित बचा। वे इस मगरमच्छ को गंगाराम कहकर पुकारते थे। उनके पुकारते ही मगरमच्छ तालाब के बाहर आ जाता था।
गांव वाले गंगाराम को देव की तरह ही पूजते रहे हैं। ग्रामीणों ने कभी भी गंगाराम को परेशान नहीं किया। एक आत्मीय रिश्ता इस बेजुबान मगरमच्छ से गांव वालों का जुड़ गया था। ग्रामीणों का कहना है कि गंगाराम से उनका रिश्ता कईं पीढ़ियों से चला आ रहा है। गंगाराम के शव को गांव में घुमाने से पहले लोगों ने उसकी पूजा भी की। अब उसकी याद में गांव में मंदिर निर्माण कराया जाएगा।
गांव वाले गंगाराम को देव की तरह ही पूजते रहे हैं। ग्रामीणों ने कभी भी गंगाराम को परेशान नहीं किया। एक आत्मीय रिश्ता इस बेजुबान मगरमच्छ से गांव वालों का जुड़ गया था। ग्रामीणों का कहना है कि गंगाराम से उनका रिश्ता कईं पीढ़ियों से चला आ रहा है। गंगाराम के शव को गांव में घुमाने से पहले लोगों ने उसकी पूजा भी की। अब उसकी याद में गांव में मंदिर निर्माण कराया जाएगा।