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Raipur: डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल में 58 वर्षीय महिला की जटिल हृदय सर्जरी सफल, डॉक्टरों ने रचा कीर्तिमान

Tue, 05 Aug 2025 04:24 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Tue, 05 Aug 2025 04:24 PM IST
सार

रायपुर के डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग में चिकित्सकों की टीम ने एक अत्यंत जटिल हृदय सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर नया कीर्तिमान रच दिया।

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Complex heart surgery of a 58-year-old woman was successful in mekahara Hospital, doctors created a record
58 वर्षीय महिला की जटिल हृदय सर्जरी सफल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रायपुर के डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग में चिकित्सकों की टीम ने एक अत्यंत जटिल हृदय सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर नया कीर्तिमान रच दिया। इस सर्जरी में 58 वर्षीय महिला के दिल के तीन क्षतिग्रस्त वॉल्व की मरम्मत और प्रतिस्थापन के साथ-साथ कोरोनरी बाईपास सर्जरी भी की गई।
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दुर्ग जिले के जेवरा सिरसा गांव की निवासी यह महिला बीते तीन वर्षों से सांस फूलने और सीने में दर्द से पीड़ित थीं। जांच में पाया गया कि उनकी कोरोनरी आर्टरी में 95 प्रतिशत ब्लॉकेज था और हृदय के तीन प्रमुख वाल्व — माइट्रल, एओर्टिक और ट्राइकस्पिड — गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके थे।
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सर्जरी की जटिल प्रक्रिया
डॉक्टरों ने सबसे पहले बिना हृदय की धड़कन रोके ऑफ पंप बीटिंग हार्ट कोरोनरी बाईपास सर्जरी की। इसके बाद हार्ट-लंग मशीन की सहायता से हृदय को अस्थायी रूप से रोका गया और हृदय के चैम्बर्स को खोलकर माइट्रल वॉल्व को कृत्रिम मेटालिक वाल्व से प्रतिस्थापित किया गया। इसके साथ ही एओर्टिक वॉल्व की मरम्मत विशेष तकनीक से की गई तथा ट्राइकस्पिड वॉल्व को रिंग लगाकर सुधारा गया।
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उच्च जोखिम वाली सर्जरी
इस सर्जरी की सबसे खास बात यह थी कि यह एक उच्च जोखिम वाली प्रक्रिया थी, क्योंकि मरीज की ईजेक्शन फ्रैक्शन (EF) पहले से ही कम थी। साथ ही एक ही ऑपरेशन में कई जटिल प्रक्रियाएं शामिल थीं। इसमें टिकाऊ आर्टेरियल ग्राफ्ट का उपयोग किया गया, जो लंबे समय तक लाभदायक होता है। उल्लेखनीय है कि एओर्टिक वॉल्व रिपेयर जैसे जटिल ऑपरेशन देश के केवल कुछ ही चिकित्सा संस्थानों में संभव है।


टीम को बधाई
सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति पूरी तरह स्थिर है और वे जल्द ही अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर लौटेंगी। इस उल्लेखनीय सफलता पर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी एवं अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने डॉ. कृष्णकांत साहू और उनकी टीम को बधाई दी है।
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