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CG: 40 वर्षों से वेतन विसंगति की पीड़ा झेल रहे लिपिक फिर हुए लामबंद, CM साय और वित्तमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
Fri, 23 Aug 2024 09:21 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
Published by: श्याम जी.
Updated Fri, 23 Aug 2024 09:21 PM IST
सार
वेतन विसंगति से परेशान लिपिक एक बार फिर से लामबंद होकर अपनी मांग को लेकर मुखर हो गए हैं। बीजापुर जिला अध्यक्ष राजेंद्र कुमार पसपुल के नेतृत्व में उन्होंने मुख्यमंत्री और वित्तमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है।
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लिपिक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चालीस वर्षों से वेतन विसंगति नामक पीड़ा से पीड़ित लिपिक एक बार फिर से लामबंद होकर अपनी मांग को लेकर मुखर हो गए हैं। वेतन विसंगति एवं अधीनस्थ लेखा सेवा परीक्षा आयोजित करने बीजापुर जिला अध्यक्ष राजेंद्र कुमार पसपुल के नेतृत्व में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं वित्तमंत्री ओपी के नाम ज्ञापन संयुक्त कलेक्टर जागेश्वर कौशल को सौंपा गया है।
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लिपिक संघ के जिला अध्यक्ष राजेंद्र कुमार पसपुल ने बताया कि शासन की रीढ़ की हड्डी कहे जाने वाले लिपिक विगत 40 वर्षों से वेतन विसंगति नामक पीड़ा से पीड़ित हैं। शासन लिपिकों की एकमात्र समस्या वेतन विसंगति को 40 वर्षों से नजरअंदाज करते आ रही है। सन 1961 से 1973 तक लिपिक एवं शिक्षकों तथा पटवारी का वेतनमान एक समान था। 1981 से लगातार शिक्षकों के वेतनमान में बढ़ोतरी की गई, लेकिन लिपिकों का वेतनमान बढ़ाने में शासन द्वारा किसी प्रकार की दिलचस्पी नहीं दिखाई गई है।
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छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लिपिक संवर्गों के वेतनमान के निराकरण के लिए उच्च स्तरीय समिति गठन की गई है। समिति द्वारा अनुशंसित अनेक संवर्गों के वेतनमान का उन्नयन का निराकरण किया गया, लेकिन जिस संवर्ग लिपिक के लिए गठित किया गया था। समिति द्वारा अनुशंसा के पश्चात भी लिपिकों के वेतनमान का उन्नयन नहीं किया गया है, यह बड़ा हास्यास्पद वाक्या है कि उक्त समिति जिन संवर्गो के वेतनमान के उन्नयन के लिए अनुशंसा नहीं भी की गई थी। उन संवर्गो के वेतनमान का निराकरण शासन द्वारा किया जा चुका है। किंतु लिपिक का नहीं किया गया है, जिसके कारण लिपिक संवर्ग में कुंठा एवं निराशा का वातावरण निर्मित है।
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लिपिक कर्मचारियों के वेतनमान में निरंतर क्षरण को माननीय उच्च न्यायालय ने भी स्वीकार किया है, साथ ही पूर्ववर्ती सरकार के मुख्यमंत्री ने लिपिको के मंच से मांगे पूर्ण करने का आश्वासन भी दिया था। किंतु आज दिनांक तक लिपिकों के वेतनमान में सुधार करने की कार्रवाई लंबित है। इस दौरान मिथिलेश नीलम, बसंत समतुल, नीलम संतोष, देवैया मट्टी, संजय बाकड़े, विनोद मड़ी, राहुल राना, गुलशन, ओगर व विभिन्न विभागों के लिपिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे।