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चुनावी राज्यों में भाजपा को सबसे बड़ी हार छत्तीसगढ़ में मिली है
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 11 Dec 2018 07:38 PM IST
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रमन सिंह ने स्वीकार किया जनादेश
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छत्तीसगढ़ में इस बार जो नतीजे आए हैं उसका अंदाजा शायद ही भाजपा को रहा होगा। कांग्रेस ने सभी अनुमानों को धता बताते हुए चाऊर वाले बाबा की सरकार को उखाड़ फेंका और 15 साल बाद धमाकेदार अंदाजा में सत्ता में वापसी की। कांग्रेस ने इस बार प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए भाजपा को सबसे बड़ी हार झेलने पर मजबूर किया है। भाजपा यहां बमुश्किल 15 सीटों पर पहुंचती दिख रही है।
2013 में भाजपा को 42.3 फीसदी वोट के साथ 49 सीटें मिली थीं। कांग्रेस ने 41.6 फीसदी वोट के साथ 39 सीटें जीती थीं। जैसा कि अब तक के नतीजे बताते हैं, इस बार भाजपा 15-17 सीटों पर सिमटती दिख रही है। वहीं कांग्रेस 66 सीटें जीतकर सरकार बना रही है।
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2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 49 फीसदी वोटों के साथ 10 सीटों पर कब्जा जमाया था। कांग्रेस को 39 फीसदी वोटों के साथ 1 सीट से संतोष करना पड़ा था।
बहरहाल, चुनाव नतीजों के साथ ही रमन सिंह का 15 साल का कार्यकाल समाप्त हो गया और लंबे अरसे बाद प्रदेश में कांग्रेस की वापसी हो रही है। रमन सिंह को इस दौरान चाउर वाले बाबा, मोबाइल वाले बाबा, डॉक्टर साहेब जैसे उपनाम भी मिले। उनके कार्यकाल में 50 लाख महिलाओं और छात्रों को मुफ्त स्मार्टफोन दिए गए थे।
मध्य प्रदेश को विभाजित कर 2000 में छत्तीसगढ़ का निर्माण किया गया था जहां पहले के तीन साल कांग्रेस का शासन रहा। उसके बाद लगातार 15 साल तक रमन सिंह सरकार के प्रमुख रहे। भाजपा की सत्ता उखाड़ने में कांग्रेस हर बार नाकाम रही लेकिन इस बार उसने प्रचंड तरीके से वापसी की।
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9 फीसदी वोट घटा
चुनावी राज्यों में भाजपा को सबसे बड़ी हार छत्तीसगढ़ में ही मिली है। यहां भाजपा को करीब 30 सीटों का नुकसान होता दिख रहा है। छत्तीसगढ़ के 15 साल के सियासी इतिहास और चार विधानसभा चुनावों में भाजपा ने इतना खराब प्रदर्शन कभी नहीं किया है। इस बार भाजपा का वोट शेयर करीब 9% घटा है।
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2013 में भाजपा को 42.3 फीसदी वोट के साथ 49 सीटें मिली थीं। कांग्रेस ने 41.6 फीसदी वोट के साथ 39 सीटें जीती थीं। जैसा कि अब तक के नतीजे बताते हैं, इस बार भाजपा 15-17 सीटों पर सिमटती दिख रही है। वहीं कांग्रेस 66 सीटें जीतकर सरकार बना रही है।
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2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 49 फीसदी वोटों के साथ 10 सीटों पर कब्जा जमाया था। कांग्रेस को 39 फीसदी वोटों के साथ 1 सीट से संतोष करना पड़ा था।
रमन सिंह ने हार स्वीकारी
डॉ. रमन सिंह ने इस हार को खुलकर स्वीकार किया है। उन्होंने कहा- जनादेश का स्वागत करता हूं। मैं कांग्रेस को इस सफलता पर बधाई देता हूं। ये मेरा सौभाग्य है कि 15 साल तक छत्तीसगढ़ की जनता की सेवा करने का मौका मिला।Raman Singh, outgoing CM of #Chhattisgarh: We respect the mandate that the public has given. I congratulate Congress on this success. I consider it my luck to serve the public of Chhattisgarh for the last 15 years. #AssemblyElectionResults2018 pic.twitter.com/LPFjO9wgoD
— ANI (@ANI) December 11, 2018
बहरहाल, चुनाव नतीजों के साथ ही रमन सिंह का 15 साल का कार्यकाल समाप्त हो गया और लंबे अरसे बाद प्रदेश में कांग्रेस की वापसी हो रही है। रमन सिंह को इस दौरान चाउर वाले बाबा, मोबाइल वाले बाबा, डॉक्टर साहेब जैसे उपनाम भी मिले। उनके कार्यकाल में 50 लाख महिलाओं और छात्रों को मुफ्त स्मार्टफोन दिए गए थे।
मध्य प्रदेश को विभाजित कर 2000 में छत्तीसगढ़ का निर्माण किया गया था जहां पहले के तीन साल कांग्रेस का शासन रहा। उसके बाद लगातार 15 साल तक रमन सिंह सरकार के प्रमुख रहे। भाजपा की सत्ता उखाड़ने में कांग्रेस हर बार नाकाम रही लेकिन इस बार उसने प्रचंड तरीके से वापसी की।