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छत्तीसगढ़ : किसानों की आय बढ़ाने और फसलों की सुरक्षा के लिए लागू होगा पारंपरिक 'रोका-छेका'

Tue, 16 Jun 2020 09:05 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 16 Jun 2020 09:05 PM IST
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Chhattisgarh to effectively implement traditional Roka Chheka to save crops and boost farmers income
किसान - फोटो : पेक्सेल्स

छत्तीसगढ़ सरकार ने फसलों की सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने के लिए पारंपरिक 'रोका-छेका' पद्धति को प्रभावी तरीके से लागू करने का फैसला लिया है। यह जानकारी मंगलवार को जारी राज्य सरकार के एक आधिकारिक बयान में दी गई। बता दें कि छत्तीसगढ़ की में रोका-छेका की व्यवस्था पहले से प्रचलित है, अब राज्य सरकार ने इसे और अधिक व्यवस्थित और असरदार बनाने का फैसला किया है।  

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इस व्यवस्था के तहत मानसून के दौरान फसलों के नुकसान को रोकने के लिए खेतों में बुवाई की प्रक्रिया पूरी करने के बाद गांवों में पशुओं की खुली चराई को रोक दिया जाता है। कई गांवों में पशुओं को रखने के लिए बाड़े (गोशाला) की सुविधा नहीं है, ऐसे में पशु मालिकों को इस दौरान उनके चरने पर प्रतिबंध लग जाने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके समाधान के लिए सूराजी गांव योजना के तहत पांच हजार गोशालाएं बन रही हैं। 
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बयान के मुताबिक 2200 गोशालाओं का निर्माण हो चुका है और बाकी बची 2800 गोशालाओं का निर्माण हो रहा है।  बयान में कहा गया, 'राज्य सरकार ने सभी गावों में प्रभावी तरीके से रोका-छेका को लागू करने का फैसला किया है। इस कदम का उद्देश्य कृषि के परंपरागत तरीकों को पुनर्जीवन देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है।'
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सरकार के बयान में कहा गया है कि रोका-छेका को नई गोशालाओं के निर्माण के साथ शुरू किया जा रहा है जिससे गाय के गोबर से बनी खाद का उत्पादन भी हो सकेगा।  इन गोशालाओं के माध्यम से राज्य सरकार रोजगार के नए साधन भी मुहैया करा रही है। इस कार्य में महिला स्वयं समूहों की भी मदद ली जा रही है। इन समूहों की सदस्याएं गाय के गोबर से विभिन्न वस्तुएं बना रही हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय भी मिल रही है। 


राज्य सरकार ने सभी सरपंचों से अपील की है कि वह प्रतिबंध के दौरान सभी जानवरों को गोशालाओं में ही रखें, जिससे पशुओं का उचित पोषण और फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। हाल ही में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था कि बीज के अंकुरित होने के साथ फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे कृषि उपज बढ़ेगी और किसानों की आय भी बढ़ेगी।

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