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छत्तीसगढ़: दूसरे चरण में 75 फीसदी मतदान

Tue, 19 Nov 2013 09:20 PM IST
जयप्रकाश पाराशर/अमर उजाला, भोपाल
जयप्रकाश पाराशर/अमर उजाला, भोपाल Updated Tue, 19 Nov 2013 09:20 PM IST
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chhattisgarh polls: 15 per cent voter turnout in initial hours

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनावों के दूसरे चरण में 19 जिलों की 72 सीटों पर मतदान पूरा हो गया है, जिसमें 843 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई।

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इस चरण में छत्तीसगढ़ के दिग्गजों में विधानसभा अध्यक्ष, विधानसभा उपाध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, नौ मंत्रियों और खरसिया से नंदकुमार पटेल के बेटे उमेश पटेल, जिनके समर्थन में राहुल गांधी ने सभा की थी, जैसे लोगों का भाग्य मतदाता ने लिख दिया है।
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चुनाव आयोग के मुताबिक दूसरे चरण में 75 फीसदी मतदान हुआ है। यह छत्तीसगढ़ में अभी तक का सबसे ज्यादा मतदान प्रतिशत है।

मतदान के बढ़े हुए प्रतिशत से कोई अनुमान लगाना मुश्किल है, क्योंकि भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही अपने समर्थक मतदाताओं को बूथ तक लाने के बड़े प्रयास किए थे। फिर भी छत्तीसगढ़ में चुनाव आयोग के कामकाज से संबंधित शिकायतें काफी हुई हैं। कई मतदाताओं के नाम कटने और तथ्यात्मक भूलों की कई शिकायतें सामने आई हैं।
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प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार सारंगढ़ 59, खरसिया 60, रायगढ़ 60, पाटन 76, पत्थलगांव 75, बिलासपुर 65, लैलूंगा 62, धरमजयगढ़ 63, रायगढ़ में 65, लोरमी 68, कुनकुरी 72, जयशपुर 72, मुंगेली 72, धमतरी 82, रायपुर 72, अंबिकापुर 66, रायपुर 70 फीसदी, रायपुर दक्षिण 58, गुंडरदेही 70 फीसदी, मोहनपुर 90 फीसदी, संजारी बालोद पंडरिया 70, कसडोल 70, पुरकेला 97, आमाडरहा 85.7, कवर्धा 70, मुंगेली 72 फीसदी मतदान की खबरें आई हैं।

किसके पक्ष में करवट
मतदाता ने बड़ी खामोशी से अपनी राय जाहिर की है। वोट के प्रतिशत से कोई निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है। विश्लेषकों की राय में यह किसी भी करवट बैठ सकता है। डॉ. रमनसिंह की सरकार के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी का जिक्र करने वालों की भी बड़ी तादाद है। वह छत्तीसगढ़ में दस सालों से काबिज रहे हैं। उनकी राय है कि ज्यादा मतदान रमनसिंह सरकार के खिलाफ भी जा सकता है।


मोदी फैक्टर का असर सीमित
छत्तीसगढ़ के बारे में कहा जा रहा है कि गांवों और दुर्गम इलाकों में शहरों के मुकाबले ज्यादा वोटिंग दिखाई दे रही है। शहरी इलाकों में ही मोदी का ज्यादा असर है। विश्लेषकों की राय में दंतेवाड़ा या अन्य ग्रामीण आदिवासी इलाकों में मोदी की सभा का कोई असर नहीं होगा।

मोदी की अपील शहरी और मध्यमवर्गीय इलाकों में ज्यादा है। एक राय यह भी सामने आ रही है कि अब मतदाता पहले की तरह सभाएं सुनकर वोट डालने के निर्णय को प्रभावित नहीं होने देता। वह अपनी राय को पांच साल के नतीजों के आधार पर बनाता है।

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