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छत्तीसगढ़ चुनाव 2018: छत्तीसगढ़ के वोटरों ने पलट दी आॅस्कर नामित 'न्यूटन' फ़िल्म की पटकथा...

Mon, 12 Nov 2018 07:43 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Updated Mon, 12 Nov 2018 07:43 PM IST
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Chhattisgarh Elections 2018: Chhattisgarh Voters Overturned Screenplay for Oscars named 'Newton'
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गत वर्ष 22 सितंबर को रिलीज हुई फ़िल्म 'न्यूटन', जिसे आॅस्कर के लिए नामित किया गया था, कम से कम छत्तीसगढ़ के लोगों ने इसकी पटकथा को पूरी तरह नकार दिया है। सोमवार को नक्सल प्रभावित क्षेत्र बस्तर की 18 विधानसभा सीटों के लिए हुई बंपर वोटिंग के दौरान महिलाओं और पुरुषों का जो हुजूम उमड़ा, उसे देखकर नहीं लगता कि फ़िल्म में जैसा दिखाया गया है, वह एक दम सत्य पर आधारित था।सीआरपीएफ एवं दूसरे अर्धसैनिक बलों की चौकसी और वोटरों का उत्साह देखकर नहीं लगता कि वहां पर लोकतंत्र कलंकित हुआ है।सुरक्षा बलों ने लोगों को जबरन घर से बाहर निकालकर वोटिंग नहीं कराई है।मीडिया को दिखाने के लिए लोकतांत्रित प्रक्रिया को मजबूत करने का कोई स्वांग भी नहीं रचा गया है।

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सीआरपीएफ के पूर्व आईजी वीपीएस पंवार यहीं पर नहीं थमे।उन्होंने आगे कहा, 'न्यूटन' फ़िल्म में देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ही नहीं, बल्कि सीआरपीएफ जैसे बड़े अर्धसैनिक बल को भी नीचा दिखाया है।'न्यूटन' में जबरन पोलिंग कराने, केवल मीडिया को दिखाने के लिए पोलिंग सीन तैयार करना और लोगों के साथ सीआरपीएफ का बुरा सलूक आदि प्रदर्शित किया गया था।12 नवंबर को हुए मतदान में बस्तर क्षेत्र के लोगों ने पोलिंग बूथ पर बिना किसी भय के कई घंटे तक लाइनों में खड़े होकर अपना वोट डाला है।अगर सीआरपीएफ, जो वहां की सुरक्षा के लिए नोडल एजेंसी भी है, अपनी ड्यूटी सही से पूरी नहीं करती तो लोग मतदान केंद्रों तक इतनी सहजता से नहीं पहुंच पाते।
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'न्यूटन' के खिलाफ अदालत में गए हैं सीआरपीएफ के पूर्व एसआई ...

इस फिल्म में सीआरपीएफ द्वारा लोकतांत्रिक चुनावी प्रक्रिया को दागदार करते हुए दिखाया गया है। इसी से आहत होकर पूर्व एसआई तमाल सान्याल फिल्म के खिलाफ अदालत में पहुंच गए हैं। उनका कहना है कि विश्व के सबसे बड़े अर्द्धसैनिक बल सीआरपीएफ को सुनियोजित तरीके से बदनाम किया जा रहा है।इस बल के अफसरों और जवानों ने जम्मू कश्मीर के अलावा नक्सल प्रभावित राज्यों में शांति स्थापित करने के लिए अपना बलिदान दिया है।पूर्व अर्द्धसैनिक बलों के कर्मियों की वेल्फेयर एसोसिएशन की राष्ट्रीय समन्वय कमेटी ने भी न्यूटन फिल्म को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री को शिकायत दी थी।
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कमेटी ने 17 फरवरी को भेजे अपने पत्र में गृह मंत्रालय से आग्रह किया था कि इस मामले में सीआरपीएफ के डीजी को संज्ञान लेने की सलाह दी जाए।शिकायत की एक प्रति भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त और केंद्रीय फिल्म प्रमाण बोर्ड के चेयरमैन को भेजी गई थी।सान्याल का कहना है कि सीआरपीएफ व दूसरे अर्धसैनिक बल नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सिविक एक्शन कार्यक्रम चलाकर लोगों का जीवन स्तर उपर उठा रहे हैं।जम्मू-कश्मीर, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में जहां पहले मतदान प्रक्रिया निष्पक्ष और शांतिप्रिय नहीं रहती थी, अब वहां पर मतदाता बिना किसी भय के अपना वोट डालते हैं। नक्सली क्षेत्रों में स्थित गहरे जंगलों में जहां स्थानीय पुलिस या चुनाव अधिकारी भी नहीं पहुंच पाते थे, आज सीआरपीएफ व दूसरे बलों ने वहां पर शांतिपूर्वक मतदान सुनिश्चित किया है। उन्हें इस बात पर हैरानी है कि सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को किस तरह हरी झंडी दे दी। बोर्ड को फिल्म बनाने वाले के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी।


चार जनवरी को होगी मामले की आगामी सुनवाईसान्याल के मुताबिक, कड़कड़डूमा के एसीएमएम की अदालत में इस बाबत आपराधिक मानहानि का केस चल रहा है।आधी से ज्यादा स्टेंटमेंट रिकॉर्ड हो गई हैं।बाकी गवाही भी चार जनवरी को पूरी हो जाएगी।इसके बाद उन्हें पूरी उम्मीद है कि अदालत फ़िल्म निर्माता को समन भेज देगी।इसके अलावा यहीं पर ही सिविल सूट भी डाला गया है, जिसकी अगली सुनवाई बीस नवंबर को होनी है।

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