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छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव : भाजपा और कांग्रेस के बीच में रोचक हो रही है लड़ाई

Mon, 05 Nov 2018 07:41 PM IST
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 05 Nov 2018 07:41 PM IST
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 Chhattisgarh assembly elections: fight between BJP and Congress is getting interesting
प्रतीकात्मक तस्वीर

छत्तीसगढ़ में लड़ाई लगातार रोचक होती जा रही है। शुरू में भाजपा का जहां राज्य में दबदबा नजर आ रहा था, वहीं अब कांटे के मुकाबले की तस्वीर उभर रही है। राज्य के दौरे पर गई कांग्रेस की सांसद सुष्मिता देव जहां काफी उत्साहित हैं, वहीं भाजपा की महासचिव सरोज पांडे को एक बार फिर भाजपा की सरकार बनने का पूरा भरोसा है। छत्तीसगढ़ में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब कांग्रेस से अलग होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी अलग दल बनाकर बसपा से गठबंधन करके चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन भाजपा और कांग्रेस दोनों अजीत जोगी को कोई खास वजन नहीं दे रही हैं।

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बताते हैं इसके लिए अजीत जोगी का लगातार अनिश्चित रवैया और रणनीति रही है। अजीत जोगी की पत्नी रेणु जोगी कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहती थी। बहू और अमित जोगी की पत्नी बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहती थी। अजीत जोगी खुद चुनाव न लड़ने की इच्छा जता चुके थे, लेकिन चुनाव की तारीखों का एलान होने के बाद यह पूरा समीकरण गड़बड़ा गया। अब अजीत जोगी मरवाही विधानसभा से मैदान में हैं। उनकी पत्नी को कांग्रेस पार्टी टिकट नहीं मिला और वह भी अजीत जोगी की पार्टी से चुनाव मैदान में हैं। बहू ऋचा भी चुनाव मैदान में हैं।
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इस तरह से पूरी पार्टी में जोगी के परिवार का दबदबा है। इतना ही नहीं बसपा के उम्मीदवारों में भी अजीत जोगी के उम्मीदवारों की ठीक-ठाक तादाद है। हालांकि अजीत जोगी छत्तीसगढ़ की विलासपुर संभाग की रायगढ़ से लेकर मुगली तक की 24 सीटों पर अपना अच्छा खासा दबदबा रखते हैं। यहां इस बार बसपा के साथ अजीत जोगी के लड़ने के कारण त्रिकोणीय मुकाबले की उम्मीद है। 2013 में यहां से भाजपा को 12, कांग्रेस को 11(जोगी कांग्रेस में थे) और एक सीट बसपा को मिली थी। यहां इस बार त्रिकोणीय मुकाबले में कांग्रेस का गणित गड़बड़ा सकता है।
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बस्तर संभाग

बस्तर संभाग में कुल 12 सीटें हैं। 2013 के चुनाव में कांग्रेस आठ और भाजपा को चार सीट मिली थी। कांग्रेस की सांसद सुष्मिता देव का दावा है कि यहां 7-8 सीट इस बार भी कांग्रेस पार्टी जीत सकती है। हालांकि भाजपा और बसपा के नेताओं को कांग्रेस के इस दावे पर भरोसा नहीं है। बस्तर में भाजपा ने पांच साल के शासन के दौरान काम किया है, लेकिन यह जबरदस्त नक्सल प्रभावित क्षेत्र है। क्षेत्र का दौरा करके लौट रहे सूत्रों का कहना है कि अभी वहां किसी के पक्ष में कोई खास हलचल नहीं दिखाई दे रही है। हालांकि इस संभाग में 12 नवंबर को मतदान होना है।

दुर्ग संभाग में करुणा शुक्ला

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भांजी करुणा शुक्ला मुख्यमंत्री रमन सिंह के खिलाफ राजनांदगांव से उम्मीदवार हैं। चुनाव रोचक है, लेकिन रमन सिंह को हराना आसान नहीं है। इस संभाग में कुल 20 सीटें हैं। यहां वैसे भी भाजपा पिछले चुनाव में कांग्रेस पर भारी थी। उसे 11 और कांग्रेस को 09 सीटें मिली थी। सूत्र बताते हैं कि इस बार के चुनाव में इस क्षेत्र में कुछ सरकार विरोधी लहर देखने को मिल रही है। इसका लाभ कांग्रेस को मिल सकता है।


रायपुर संभाग तो भाजपा का गढ़ है

रायपुर संभाग में पिछले चुनाव में भाजपा को जोरदार सफलता मिली थी। क्षेत्र की 20 सीटों में से 15 पर भारतीय जनता पार्टी ने कब्जा जताया था। कांग्रेस को केवल चार सीटों से संतोष करना पड़ा था। एक उम्मीदवार निर्दल का जीता था। लेकिन इस संभाग में भाजपा के बागी उसका सिरदर्द बढ़ा रहे हैं। रायपुर संभाग 2018 के विधानसभा चुनाव के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार के तीन दिग्गज मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष चुनाव मैदान में है। महासमुंद सीट भी इसी संभाग में आती है। माना जा रहा है कि यहां भी त्रिकोणीय मुकाबला होगा। अजीत जोगी की पार्टी इस संभाग में खेल बिगाड़ सकती है।
 

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