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छत्तीसगढ़: दूसरे दौर के चुनाव नतीजे अजीत जोगी को बना सकते हैं किंगमेकर
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 19 Nov 2018 04:16 PM IST
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छत्तीसगढ़ का घमासान
छत्तीसगढ़ चुनाव में इस बार राज्य के पहले सीएम अजीत जोगी भी अलग पार्टी बनाकर ताल ठोक रहे हैं। ये पहला मौका है जब पहली बार अजीत जोगी कांग्रेस के बिना चुनाव मैदान में उतरे हैं। करीब तीन दशक पहले मरवाही के इस युवा ने सिविल सर्विस की नौकरी छोड़कर राजनीति के मैदान में कदम रखा था। दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी उन्हें सियासत में लाए थे। लेकिन आज वह कांग्रेस के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं।
इस चुनाव में अजीत जोगी के लिए कई चीजें पहली बार हो रही हैं। दूसरे चरण के चुनाव में अजीत जोगी के लिए बड़ा मौका है। इस दौर में बिलासपुर और रायपुर मंडल की सीटों पर मतदान होना है। ये इलाका सतमानी बेल्ट कहलाता है और जोगी का यहां खासा प्रभाव है। मायावती से गठजोड़ कर वह पहले ही दलित वोटों पर दावेदारी ठोक चुके हैं।
रमन सिंह को नहीं हिला पाए जोगी
कांग्रेस ने करीब एक दशक तक जोगी को अपना चेहरा बनाया था लेकिन वह रमन सिंह की सत्ता को नहीं उखाड़ सके हालांकि मुकाबल हर बार काफी करीबी रहा। अजीत जोगी के बिना कांग्रेस यहां आगे बढ़ ही नहीं पाई। लेकिन इस बार कांग्रेस जोगी के बिना ही भाजपा से टक्कर ले रही है।
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दूसरे दौर के मतदान से ठीक पहले जोगी ने एक न्यूज चैनल से इंटरव्यू में चुनाव के बाद भाजपा के समर्थन की बात को नकारा नहीं। ये खबर आग तरह फैल गई और जोगी को सफाई देनी पड़ी। जोगी ने पवित्र ग्रंथ की शपथ लेते हुए कहा कि वह चुनाव के बाद भाजपा से किसी तरह की मदद नहीं लेंगे।
अजीत जोगी पर निगाहें
बहरहाल, दूसरे दौर के चुनाव में अजीत जोगी की भूमिका बेहद अहम हो गई है। इस दौर की सीटों पर नतीजे उन्हें किंगमेकर भी बना सकते हैं। बसपा से गठबंधन कर जोगी ने कांग्रेस और भाजपा दोनों की नींद उड़ा दी है। इस दौर में बिलासपुर, जांजगीर-चंपा और मुंगेली जिले की 15 सीटों पर मतदान होना है। 2013 चुनाव में भाजपा ने यहां 8 सीटें, कांग्रेस ने 6 और बसपा ने एक सीट अपने नाम की थी। नए हालात में जोगी-मायावती का गठबंधन बढ़त ले सकता है।
2013 में कांग्रेस-भाजपा के बीच बराबरी की टक्कर रही थी। हालांकि मामूली बढ़त के चलते सरकार भाजपा ने बनाई। भाजपा और कांग्रेस के बीच महज 97,574 वोटों या कहें कि 0.75 फीसदी वोटों का अंतर था। ऐसे में अगर इस बार अजीत जोगी किंगमेकर बन जाएं तो किसी को हैरत नहीं होगी।
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इस चुनाव में अजीत जोगी के लिए कई चीजें पहली बार हो रही हैं। दूसरे चरण के चुनाव में अजीत जोगी के लिए बड़ा मौका है। इस दौर में बिलासपुर और रायपुर मंडल की सीटों पर मतदान होना है। ये इलाका सतमानी बेल्ट कहलाता है और जोगी का यहां खासा प्रभाव है। मायावती से गठजोड़ कर वह पहले ही दलित वोटों पर दावेदारी ठोक चुके हैं।
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रमन सिंह को नहीं हिला पाए जोगी
कांग्रेस ने करीब एक दशक तक जोगी को अपना चेहरा बनाया था लेकिन वह रमन सिंह की सत्ता को नहीं उखाड़ सके हालांकि मुकाबल हर बार काफी करीबी रहा। अजीत जोगी के बिना कांग्रेस यहां आगे बढ़ ही नहीं पाई। लेकिन इस बार कांग्रेस जोगी के बिना ही भाजपा से टक्कर ले रही है।
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दूसरे दौर के मतदान से ठीक पहले जोगी ने एक न्यूज चैनल से इंटरव्यू में चुनाव के बाद भाजपा के समर्थन की बात को नकारा नहीं। ये खबर आग तरह फैल गई और जोगी को सफाई देनी पड़ी। जोगी ने पवित्र ग्रंथ की शपथ लेते हुए कहा कि वह चुनाव के बाद भाजपा से किसी तरह की मदद नहीं लेंगे।
अजीत जोगी पर निगाहें
बहरहाल, दूसरे दौर के चुनाव में अजीत जोगी की भूमिका बेहद अहम हो गई है। इस दौर की सीटों पर नतीजे उन्हें किंगमेकर भी बना सकते हैं। बसपा से गठबंधन कर जोगी ने कांग्रेस और भाजपा दोनों की नींद उड़ा दी है। इस दौर में बिलासपुर, जांजगीर-चंपा और मुंगेली जिले की 15 सीटों पर मतदान होना है। 2013 चुनाव में भाजपा ने यहां 8 सीटें, कांग्रेस ने 6 और बसपा ने एक सीट अपने नाम की थी। नए हालात में जोगी-मायावती का गठबंधन बढ़त ले सकता है।
2013 में कांग्रेस-भाजपा के बीच बराबरी की टक्कर रही थी। हालांकि मामूली बढ़त के चलते सरकार भाजपा ने बनाई। भाजपा और कांग्रेस के बीच महज 97,574 वोटों या कहें कि 0.75 फीसदी वोटों का अंतर था। ऐसे में अगर इस बार अजीत जोगी किंगमेकर बन जाएं तो किसी को हैरत नहीं होगी।