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आखिर क्यों तिलमिलाए हुए हैं अजीत जोगी
रायपुर/इंटरनेट डेस्क
Updated Fri, 07 Jun 2013 04:47 PM IST
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दरभा घाटी में शहीद हुए कांग्रेसजनों को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित श्रद्धांजलि सभा में चले सियासी तीर ने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में हलचल तेज कर दी है।
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छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने दिग्विजय सिंह पर नुकीले तीर चलाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के लोग अपने-अपने देवी- देवताओं की कसम खा लें, कि छत्तीसगढ़ को केवल छत्तीसगढ़ के लोग ही संवारेंगे।
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नक्सली हमलाः अजीत जोगी पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
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पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह पर अप्रत्यक्ष रूप से रह-रहकर तीर छोड़े। दिग्गी भी खामोश नहीं रहे। उन्होंने भी तीखा पलटवार किया। इनके बीच हुई जुबानी जंग को लेकर बाकी नेता भी हतप्रभ नजर आए।
'छत्तीसगढ़ में बाहरी लोग स्वीकार नहीं'
जोगी ने कांग्रेस में अपने विरोधी माने जाने वाले कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह पर नुकीले तीर चलाते हुए कहा कि आज से छत्तीसगढ़ के लोग अपने-अपने देवी- देवताओं की कसम खा लें, कि छत्तीसगढ़ को केवल छत्तीसगढ़ के लोग ही संवारेंगे।
जोगी ने इशारों में ही सवाल उठा दिया कि क्या प्रतापगढ़ और फतेहगढ़ जैसे दूसरे गढ़ों से आने वाले लोग जगाएंगे। छत्तीसगढ़ को केवल छत्तीसगढ़ के नेता ही जगाएंगे। किसी बाहरी के दखल के जरूरत नहीं है।
श्रद्धांजलि सभा में जब दिग्विजय सिंह बोलने के लिए खड़े हुए तो सबकी निगाह उनकी ओर थी। दिग्गी ने पलटवार करते हुए कहा कि स्व. उदय मुदलियार के पूर्वज भी बाहर से आए थे। वे दक्षिण भारत में तमिलनाडु से छत्तीसगढ़ आए। लेकिन यहां के लोगों की सेवा कर कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि वे बाहरी हैं।
दिग्विजय ने कहा कि उदय के राजनीतिक जीवन में एक भी आरोप नहीं लगा। दिग्गी ने यही बात नंदकुमार पटेल के लिए भी कही। दिग्गी ने कहा कि स्व. पटेल साफ-सुथरी छवि के नेता थे, वे भी हमेशा आरोपों से दूर ही रहे।
उल्लेखनीय है कि नक्सल हमले में कई नेताओं की शहादत के बाद केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री डॉ. चरणदास महंत को कार्यकारी अध्यक्ष तथा पूर्व मंत्री भूपेश बघेल को कार्यक्रम समन्वयक नियुक्त किए जाने के बाद से राज्य कांग्रेस में सशक्त जोगी गुट को करारा झटका लगा है।
वर्ष 2008 में विधानसभा चुनाव में शिकस्त के बाद पार्टी आलाकमान ने जोगी गुट को किनारे करते हुए रविन्द्र चौबे को विपक्ष का नेता और नन्द कुमार पटेल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था।
पटेल की हत्या के बाद जोगी गुट को उम्मीद थी कि उन्हें तरजीह मिलेगी, पर जोगी के घोर विरोधी डॉ. महंत एवं बघेल को महत्व देकर इस गुट को झटका दिया है।
जोगी का कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह और प्रदेश प्रभारी बी. के. हरिप्रसाद से भी 36 का आंकड़ा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव के ठीक पहले मिले इस झटके को जोगी आसानी से स्वीकार नहीं कर पा रहे है।