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सिकल सेल रोग के लिए 5 लाख लोगों की खून की जांच कर विश्व रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्य
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
Updated Mon, 26 Feb 2018 09:30 PM IST
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21 मार्च को होगी खून की जांच
छत्तीसगढ़ सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने एक विशालकाय कार्य अपने हाथों में ले लिया है। जिसके तहत 21 मार्च को सुबह 10 बजे से लेकर शाम चार बजे तक सिकल सेल एनीमिया की जांच की जाएगी। विभाग की योजना के तहत गर्भवती महिलाओं और बच्चों समेत पूरे राज्य में पांच लाख लोगों की जांच की जाएगी।
इसके साथ ही, राज्य सरकार एक कार्यक्रम के तहत सबसे ज्यादा मरीजों की जांच का एक विश्व रिकॉर्ड कायम करना चाहती है। अगर 21 मार्च को यह लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाता है तो विभाग इस उपलब्धि को विश्व रिकॉर्ड की गोल्डन बुक में दर्ज कराएगा।
स्वास्थ्य विभाग के निदेशक रानो साहू ने कहा कि राज्य में सिकल सेल एनीमिया बीमारी काफी प्रमुख है क्योंकि लगभग 10 फीसदी आम लोग इससे प्रभावित हुए हैं। वह बताते हैं कि इस कार्यक्रम से इस बीमारी के बारे में जागरूकता पैदा करने में मदद मिलेगी और इससे निपटने में भी सहायता होगी।
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इसके साथ ही, राज्य सरकार एक कार्यक्रम के तहत सबसे ज्यादा मरीजों की जांच का एक विश्व रिकॉर्ड कायम करना चाहती है। अगर 21 मार्च को यह लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाता है तो विभाग इस उपलब्धि को विश्व रिकॉर्ड की गोल्डन बुक में दर्ज कराएगा।
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स्वास्थ्य विभाग के निदेशक रानो साहू ने कहा कि राज्य में सिकल सेल एनीमिया बीमारी काफी प्रमुख है क्योंकि लगभग 10 फीसदी आम लोग इससे प्रभावित हुए हैं। वह बताते हैं कि इस कार्यक्रम से इस बीमारी के बारे में जागरूकता पैदा करने में मदद मिलेगी और इससे निपटने में भी सहायता होगी।
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यहां-यहां होगी जांच
गर्भवती महिलाओं की जांच स्वास्थ्य केंद्रों पर होगी साथ ही उनके पतियों का घुलनशीलता परीक्षण भी वही होगा। खून के नमूने की जांच में बीमारी के पाए जाने पर उसे जिला अस्पताल भेज दिया जाएगा।
खून की जांच के परिणाम गंभीर पाए जाने पर नमूनों को आगे की जांच के लिए रायपुर के जवाहरलाल मेडिकल कॉलेज भेजा जाएगा।
छत्तीसगढ़ में साल 2017 में हुए एक सर्वेक्षण में 7.15 लाख बच्चों में से 25,000 इस बीमारी से पीड़ित पाए गए थे। इनमें से 6,696 बच्चों को इलाज के लिए जवाहरलाल मेडिकल कॉलेज भेजा गया।
सिकल सेल बीमारी एक वंशानुगत रोग है। जो खून की लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन पर हमला करता है, जिससे यह शरीर के हर हिस्से में ऑक्सीजन ले जाने में असमर्थ हो जाता है, और इस वजह से पीलिया, न्यूमोनिया और एनीमिया जैसी बीमारियां हो जाती हैं।
खून की जांच के परिणाम गंभीर पाए जाने पर नमूनों को आगे की जांच के लिए रायपुर के जवाहरलाल मेडिकल कॉलेज भेजा जाएगा।
छत्तीसगढ़ में साल 2017 में हुए एक सर्वेक्षण में 7.15 लाख बच्चों में से 25,000 इस बीमारी से पीड़ित पाए गए थे। इनमें से 6,696 बच्चों को इलाज के लिए जवाहरलाल मेडिकल कॉलेज भेजा गया।
सिकल सेल बीमारी एक वंशानुगत रोग है। जो खून की लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन पर हमला करता है, जिससे यह शरीर के हर हिस्से में ऑक्सीजन ले जाने में असमर्थ हो जाता है, और इस वजह से पीलिया, न्यूमोनिया और एनीमिया जैसी बीमारियां हो जाती हैं।