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सीजीएमएससी घोटाला: 670 करोड़ की हेराफेरी में तीन और आरोपी ईओडब्ल्यू की गिरफ्त में

Tue, 20 Jan 2026 04:55 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Tue, 20 Jan 2026 04:55 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) में सामने आए 670 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

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CGMSC scam: EOW arrests three more accused in Rs 670 crore fraud case
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) में सामने आए 670 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में हरियाणा के पंचकुला स्थित रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड का डायरेक्टर अभिषेक कौशल, उसका लाइजनर प्रिंस जैन और रायपुर की शारदा इंडस्ट्रीज का प्रोपराइटर राकेश जैन शामिल हैं।
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ईओडब्ल्यू ने तीनों को विशेष न्यायाधीश की अदालत में पेश किया, जहां से पूछताछ के लिए 27 जनवरी तक रिमांड पर भेज दिया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन तीनों ने आपसी मिलीभगत से सरकारी निविदा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं कीं।
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जांच में सामने आया है कि इन आरोपियों ने मोक्षित कॉर्पोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा को निविदा दिलाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए और लाइजनिंग के जरिए पूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया। आरोप है कि निविदा में प्रतिस्पर्धा खत्म करने के लिए कुछ कंपनियों ने आपसी तालमेल और कार्टेल बनाकर अन्य फर्मों को बाहर कर दिया, जिससे निविदा मनचाही कंपनी को मिल सके।
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ईओडब्ल्यू के मुताबिक, हमर लैब योजना के तहत जिला अस्पतालों, एफआरयू, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप स्वास्थ्य केंद्रों के लिए मेडिकल उपकरण और रिएजेंट्स की खरीदी की जानी थी। इसी योजना के अंतर्गत जारी निविदा को पुल टेंडरिंग के जरिए मोक्षित कॉर्पोरेशन ने हासिल किया। इसे संभव बनाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और प्रभावशाली तरीके से टेंडर प्रक्रिया को नियंत्रित किया गया।


बताया गया है कि अभिषेक कौशल की गिरफ्तारी के लिए ईओडब्ल्यू की टीम तीन दिन पहले पंचकुला गई थी। वहां से उसे गिरफ्तार कर स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जिसके बाद प्रोडक्शन वारंट पर रायपुर लाकर पूछताछ शुरू की गई।
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