{"_id":"69ee00b302ddd8068f0c0d1f","slug":"cg-no-boarding-pass-issued-despite-confirmed-ticket-district-forum-delivers-strict-verdict-2026-04-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"CG: कन्फर्म टिकट के बाद भी नहीं मिला बोर्डिंग पास, कंपनी पर लगाया 25 हजार का जुर्माना, जिला फोरम का सख्त फैसला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
CG: कन्फर्म टिकट के बाद भी नहीं मिला बोर्डिंग पास, कंपनी पर लगाया 25 हजार का जुर्माना, जिला फोरम का सख्त फैसला
Sun, 26 Apr 2026 05:40 PM IST
Lalit Kumar Singh
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: Lalit Kumar Singh
Updated Sun, 26 Apr 2026 05:40 PM IST
सार
कन्फर्म टिकट के बावजूद यात्री को सफर से रोकने और उसकी सीट किसी अन्य को आवंटित करने के मामले में रायपुर जिला उपभोक्ता फोरम ने कड़ा रुख अपनाया है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कन्फर्म टिकट के बावजूद यात्री को सफर से रोकने और उसकी सीट किसी अन्य को आवंटित करने के मामले में रायपुर जिला उपभोक्ता फोरम ने कड़ा रुख अपनाया है। फोरम ने विमानन कंपनी पर 25,हजार का हर्जाना लगाया है। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष डाकेश्वर प्रसाद शर्मा, सदस्य निरूपमा प्रधान और अनिल कुमार अग्निहोत्री की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि हवाई जहाज में उपलब्ध सीटों और तकनीकी क्षमता के अनुरूप ही टिकटों को बेचना चाहिये।
फोरम ने कहा कि तय क्षमता से ज्यादा टिकट बेचना न केवल सेवा में निम्नता है, बल्कि यह एक गलत व्यहार है। फोरम ने आदेश दिया है कि जेट एयरवेज 45 दिनों के भीतर पीड़ित यात्री को मुआवजे की राशि का भुगतान करे। यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होता है तो कंपनी को 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
बता दें कि यह मामला छत्तीसगढ़ के सिविल लाइन, पंचशील नगर निवासी अमित मसीह से जुड़ा है। वे 11 जून 2016 को पारिवारिक कार्य से मुंबई गए थे। वापसी के लिए उन्होंने 12 जून की फ्लाइट में 8,910 रुपए का भुगतान कर कन्फर्म टिकट लिया था। जब अमित मसीह मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनल पहुंचे, तो एयरलाइन स्टाफ ने उन्हें बोर्डिंग पास देने से मना कर दिया। पूछताछ करने पर पता चला कि विमान ओवर बुक था और अमित की कन्फर्म सीट किसी अन्य यात्री को अलॉट कर दी गई थी।
विज्ञापन
विवाद बढ़ने पर कंपनी ने उन्हें अगले दिन की टिकट और होटल में रुकने के लिए तीन हजार रुपए का प्रस्ताव दिया, जिसे यात्री ने अपनी गरिमा और समय का नुकसान बताते हुए ठुकरा दिया। कन्फर्म टिकट होने के बाद भी यात्री को सुरक्षा जांच क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने दिया गया, जिससे एयरपोर्ट पर काफी देर तक हंगामा होता रहा।
'फ्लाइट कोई बस या लोकल ट्रेन नहीं'
सुनवाई के दौरान अमित मसीह ने कहा कि फ्लाइट कोई बस या लोकल ट्रेन नहीं है, जहां अतिरिक्त टिकट बेचने पर यात्री खड़े होकर या टेबल पर बैठकर सफर कर सके। यह एयरलाइंस की जिम्मेदारी है कि वह अपनी सीटों के अनुसार ही बुकिंग लें।
दूसरी ओर विमानन कंपनी ने जिला फोरम में अपना बचाव करते हुए नागर विमानन महानिदेशालय के पैरा 3.2 का हवाला दिया। कंपनी का तर्क था कि अक्सर कई यात्री टिकट बुक कराने के बाद भी यात्रा नहीं करते, जिससे विमान खाली जाने का डर रहता है। विमान को घाटे से बचाने के लिए ओवरबुकिंग का प्रावधान है। कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि यात्री विलंब से एयरपोर्ट पहुंचा था।
कंपनी की दलील खारिज
मामले में पीठ ने कहा कि यात्री के पास कन्फर्म टिकट था और उसे बिना सूचना दिए उसकी सीट दूसरे को बेचना किसी भी नियम के तहत जायज नहीं है। फोरम ने कंपनी के तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया।
विज्ञापन
फोरम ने कहा कि तय क्षमता से ज्यादा टिकट बेचना न केवल सेवा में निम्नता है, बल्कि यह एक गलत व्यहार है। फोरम ने आदेश दिया है कि जेट एयरवेज 45 दिनों के भीतर पीड़ित यात्री को मुआवजे की राशि का भुगतान करे। यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होता है तो कंपनी को 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
विज्ञापन
बता दें कि यह मामला छत्तीसगढ़ के सिविल लाइन, पंचशील नगर निवासी अमित मसीह से जुड़ा है। वे 11 जून 2016 को पारिवारिक कार्य से मुंबई गए थे। वापसी के लिए उन्होंने 12 जून की फ्लाइट में 8,910 रुपए का भुगतान कर कन्फर्म टिकट लिया था। जब अमित मसीह मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनल पहुंचे, तो एयरलाइन स्टाफ ने उन्हें बोर्डिंग पास देने से मना कर दिया। पूछताछ करने पर पता चला कि विमान ओवर बुक था और अमित की कन्फर्म सीट किसी अन्य यात्री को अलॉट कर दी गई थी।
विज्ञापन
विवाद बढ़ने पर कंपनी ने उन्हें अगले दिन की टिकट और होटल में रुकने के लिए तीन हजार रुपए का प्रस्ताव दिया, जिसे यात्री ने अपनी गरिमा और समय का नुकसान बताते हुए ठुकरा दिया। कन्फर्म टिकट होने के बाद भी यात्री को सुरक्षा जांच क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने दिया गया, जिससे एयरपोर्ट पर काफी देर तक हंगामा होता रहा।
'फ्लाइट कोई बस या लोकल ट्रेन नहीं'
सुनवाई के दौरान अमित मसीह ने कहा कि फ्लाइट कोई बस या लोकल ट्रेन नहीं है, जहां अतिरिक्त टिकट बेचने पर यात्री खड़े होकर या टेबल पर बैठकर सफर कर सके। यह एयरलाइंस की जिम्मेदारी है कि वह अपनी सीटों के अनुसार ही बुकिंग लें।
दूसरी ओर विमानन कंपनी ने जिला फोरम में अपना बचाव करते हुए नागर विमानन महानिदेशालय के पैरा 3.2 का हवाला दिया। कंपनी का तर्क था कि अक्सर कई यात्री टिकट बुक कराने के बाद भी यात्रा नहीं करते, जिससे विमान खाली जाने का डर रहता है। विमान को घाटे से बचाने के लिए ओवरबुकिंग का प्रावधान है। कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि यात्री विलंब से एयरपोर्ट पहुंचा था।
कंपनी की दलील खारिज
मामले में पीठ ने कहा कि यात्री के पास कन्फर्म टिकट था और उसे बिना सूचना दिए उसकी सीट दूसरे को बेचना किसी भी नियम के तहत जायज नहीं है। फोरम ने कंपनी के तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया।