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रायपुर: आरडीए की हर संपत्ति को मिलेगा यूनिक प्रॉपर्टी नंबर; जल्द होगा सर्वे, लोगों को मिलेंगी ये सुविधायें
Wed, 30 Sep 2026 01:33 PM IST
Lalit Kumar Singh
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: Lalit Kumar Singh
Updated Wed, 30 Sep 2026 01:33 PM IST
सार
रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) की संपत्तियों, भूखंडों, आवासीय एवं व्यावसायिक योजनाओं और सार्वजनिक अधोसंरचनाओं के आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी प्रबंधन की दिशा में बड़ी तकनीकी पहल करने जा रहा है। इसके तहत अब प्राधिकरण के पूरे अधिकार क्षेत्र में जीआईएस आधारित एसेट मैपिंग, हाई-टेक ड्रोन सर्वे, पुराने अभिलेखों का डिजिटलीकरण और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित होगा।
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ग्रॉफिक्स: अमर उजाला डिजिटल
- फोटो : Amar ujala digital
विस्तार
रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) की संपत्तियों, भूखंडों, आवासीय एवं व्यावसायिक योजनाओं और सार्वजनिक अधोसंरचनाओं के आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी प्रबंधन की दिशा में बड़ी तकनीकी पहल करने जा रहा है। इसके तहत अब प्राधिकरण के पूरे अधिकार क्षेत्र में जीआईएस आधारित एसेट मैपिंग, हाई-टेक ड्रोन सर्वे, पुराने अभिलेखों का डिजिटलीकरण और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित होगा। परियोजना को लागू करने के लिए प्राधिकरण की ओर से टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
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इस महत्वाकांक्षी परियोजना के माध्यम से दशकों पुराने कागजी रिकॉर्ड, संपत्ति रजिस्टर, लेजर बुक, लेआउट नक्शे तथा पट्टा और लीज से संबंधित दस्तावेजों को उच्च गुणवत्ता के साथ डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किया जाएगा। इन अभिलेखों को मौके की वास्तविक स्थिति से जोड़ने के लिए अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक से हाई-रिजॉल्यूशन सर्वे और मैपिंग की जाएगी।
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हर संपत्ति की बनेगी कुंडली
परियोजना के तहत आरडीए की प्रत्येक संपत्ति और भूखंड को यूनिक प्रॉपर्टी आइडेंटिफिकेशन नंबर (यूपीआईएन) प्रदान किया जाएगा। यूपीआईएन संबंधित संपत्ति के डिजिटल रिकॉर्ड और जीआईएस मैप से जुड़ा रहेगा। इससे संपत्तियों से संबंधित जानकारी को एकीकृत और सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यवस्थित करने के साथ भविष्य में नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने का मजबूत आधार तैयार होगा।
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सर्वे में केवल हवाई मैपिंग तक सीमित न रहते हुए संपत्तियों का मौके पर भौतिक सत्यापन भी किया जाएगा। प्रशिक्षित सर्वे टीमों द्वारा डोर-टू-डोर सर्वे किया जाएगा और मोबाइल एप के माध्यम से जियो-टैग्ड फोटोग्राफ तथा आवश्यक संपत्ति संबंधी जानकारी डिजिटल रूप में संकलित की जाएगी। सर्वे के दौरान प्राप्त जानकारी का पुराने अभिलेखों और ड्रोन मैपिंग से मिलान किया जाएगा।
संपत्ति प्रबंधन से नागरिक सेवाओं तक होगा फायदा
जीआईएस आधारित डिजिटल डेटाबेस तैयार होने से RDA के पास संपत्तियों की स्थिति, सीमा, माप और उपयोग से संबंधित जानकारी अधिक व्यवस्थित रूप में उपलब्ध होगी। इससे रिकॉर्ड के सत्यापन, संपत्ति प्रबंधन और मॉनिटरिंग में सहूलियत मिलेगी। मौके की वास्तविक स्थिति और उपलब्ध अभिलेखों के तुलनात्मक अध्ययन से अनधिकृत कब्जों तथा भूमि संबंधी विसंगतियों की पहचान करने में भी सहायता मिलेगी।
एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म भविष्य में नामांतरण, लीज नवीनीकरण, भवन अनुज्ञा और एनओसी जैसी नागरिक सेवाओं को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और ऑनलाइन बनाने में सहायक होगा। संपत्ति की सीमाओं, माप और रिकॉर्ड की जानकारी एक स्थान पर उपलब्ध होने से संपत्ति संबंधी विवादों के निराकरण में भी सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही सड़क, नाली, ड्रेनेज, स्ट्रीट लाइट और जलापूर्ति जैसी सार्वजनिक अधोसंरचनाओं की जीआईएस आधारित डिजिटल जानकारी उपलब्ध होने से उनके रखरखाव, मॉनिटरिंग और भविष्य की विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी तरीके से तैयार किया जा सकेगा।
छह चरणों में पूरी होगी परियोजना
इस परियोजना को छह प्रमुख चरणों में आगे बढ़ाया जाएगा। पहले चरण में पुराने अभिलेखों, रजिस्टरों, लेजर बुक और नक्शों की स्कैनिंग एवं डिजिटलीकरण किया जाएगा। दूसरे चरण में उच्च-सटीकता वाले ड्रोन से क्षेत्र की हाई-रिजॉल्यूशन मैपिंग की जाएगी।
तीसरे चरण में प्रशिक्षित सर्वे टीमों द्वारा डोर-टू-डोर भौतिक सत्यापन तथा चौथे चरण में मोबाइल एप से जियो-टैग्ड फोटोग्राफ और आवश्यक संपत्ति संबंधी डेटा संकलित किया जाएगा। पांचवें चरण में पुराने अभिलेखों, ड्रोन सर्वे और भौतिक सत्यापन से प्राप्त डेटा को GIS प्लेटफॉर्म पर एकीकृत किया जाएगा। अंतिम चरण में तैयार डिजिटल डेटाबेस की सुरक्षित होस्टिंग कर वेब आधारित एसेट मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर के माध्यम से संपत्तियों की मॉनिटरिंग और प्रबंधन किया जाएगा।
सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम : ओपी चौधरी
आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी. चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन नागरिक सेवाओं में डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा संपत्तियों और अभिलेखों के डिजिटलीकरण, ड्रोन सर्वे और जीआएएस मैपिंग की यह पहल सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी। इससे प्राधिकरण के कार्यों में पारदर्शिता बढ़ने के साथ नागरिकों को भविष्य में बेहतर और सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराने का आधार तैयार होगा।
आधुनिक और तकनीक आधारित होगा संपत्ति प्रबंधन : नंदकुमार साहू
रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष नंद कुमार साहू ने कहा कि संपत्तियों और योजनाओं के प्रबंधन को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल है। GIS मैपिंग और डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से संपत्तियों से जुड़ी जानकारी अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित होगी।
प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. जेपी शर्मा ने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य नागरिकों को भविष्य में अधिक सुविधाजनक, पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराना तथा प्राधिकरण की संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है। नई तकनीक के उपयोग से संपत्ति संबंधी प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।
तैयार होगा डिजिटल एसेट डेटाबेस : अवनीश
रायपुर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अवनीश कुमार शरण ने कहा कि परियोजना के माध्यम से आरडीए के पुराने अभिलेखों को डिजिटल डेटाबेस से जोड़ते हुए मौके की वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक तरीके से दस्तावेजीकरण किया जाएगा। ड्रोन सर्वे, जियो-टैगिंग, भौतिक सत्यापन और GIS आधारित डेटा एकीकरण से प्राधिकरण के पास अपनी संपत्तियों एवं अधोसंरचनाओं का व्यापक डिजिटल एसेट डेटाबेस तैयार होगा। इससे संपत्ति प्रबंधन, रिकॉर्ड सत्यापन, मॉनिटरिंग और नागरिक सेवाओं को अधिक प्रभावी एवं व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।