CG Election 2023: बज गया बिगुल, भाजपा करेगी वापसी या बघेल का करिश्मा रहेगा बरकरार, 55 दिन का इंतजार
छत्तीसगढ़ में हर पांच साल में सत्ता बदलने की रीति अभी नहीं है। 2003 से 2018 तक बीजेपी लगातार सत्ता में रही। 2018 के विधानसभा चुनावों ने कांग्रेस ने स्थानीय मुद्दों पर फोकस किया और सत्ता में वापसी की। धान का समर्थन मूल्य कांग्रेस के लिए मास्टर स्ट्रोक था।
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चुनाव आयोग ने सोमवार को छत्तीसगढ़ सहित पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। छत्तीसगढ़ में दो चरणों में चुनाव होंगे। पहले चरण में सात नवंबर और दूसरे चरण में 17 नवंबर को मतदान होगा। चुनाव परिणामों की घोषणा तीन दिसंबर को होगी। ऐसे में आज से 55 दिन बाद छत्तीसगढ़ को नई सरकार मिल जाएगी। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या भाजपा सत्ता में वापसी करेगी या फिर सीएम भूपेश बघेल दोबारा करिश्मा दिखा पाएँगे।
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले परिणामों को लेकर अभी से कयासों का दौर शुरू हो गया है। बीजेपी ने कई सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर जोरशोर से प्रचार-प्रसार में जुटी है। पीएम मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत दूसरे बड़े नेता लगातार दौरा कर रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में सत्तासीन कांग्रेस लगातार जमीन स्तर से कार्यकर्ताओं को जोड़ने में लगी है। पार्टी आलाकमान यहां पर उम्मीदवारों के नामों के एलान से पहले लगातार माथा पच्ची कर रहा है। कांग्रेस ने साल 2018 के विधानसभा चुनाव में 15 साल तक सत्ता में काबिज रहने वाली बीजेपी को बेदखलकर जोरदार वापसी की थी। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सिर्फ 15 सीटों पर यानि लगभग 16 फीसदी सीटों जीत दर्ज किया था।
छत्तीसगढ़ में हर पांच साल में सत्ता बदलने की रीति अभी नहीं है। 2003 से 2018 तक बीजेपी लगातार सत्ता में रही। 2018 के विधानसभा चुनावों ने कांग्रेस ने स्थानीय मुद्दों पर फोकस किया और सत्ता में वापसी की। धान का समर्थन मूल्य कांग्रेस के लिए मास्टर स्ट्रोक था। किसान कर्ज माफी की घोषणा सरकार बनाने के लिए बूस्टर डोज साबित हुई। इस बार के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने फिर से स्थानीय मुद्दों पर फोकस शुरू कर दिया है। छत्तीसगढ़ की 90 विधानसभा सीटों का दौरा करने के लिए सीएम भूपेश बघेल भेंट मुलाकात कार्यक्रम कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद भूपेश बघेल लगातार स्थानीय मुद्दों पर फोकस कर रहे हैं। जैसे गोधन न्याय योजना, छत्तीसगढ़ महतारी की अस्मिता। ये वो मुद्दे हैं जो सरकार औऱ जनता को सीधे कनेक्ट कर रहे हैं। सीएम प्रशासनिक कसावट के साथ-साथ सरकारी योजनाओं से आमजन को लाभ दिलाने के लिए लगातार समीक्षा करते हैं। बड़ी बात ये है कि सीएम खुद इन योजनाओं की जमीनी हकीकत देखने के लिए जमीन में उतरते हैं।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था है। इसके लिए गोधन न्याय योजना की शुरूआत की गई है। कई वनोपज के समर्थन मूल्य में वृद्धि भी की गई है। मिलेट्स प्रोडेक्ट को बढ़ावा देने के लिए मिलेट्स कैफे भी खोल गए हैं। 58 फीसदी तक आरक्षण पर लगी रोक सुर्रीम कोर्ट से हटने के बाद राज्य में भर्ती भी शुरू हुई हैं। वहां बेरोजगारी भत्ता की घोषणा के बाद सीएम युवा वर्ग भी साधने की कोशिश में हैं।
इधर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार को चुनाव में हराकर सत्ता से वापसी के लिए बीजेपी हर छोटी से छोटी रणनीति पर काम कर रही है। बीजेपी ने राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का अधिक से अधिक चुनावी लाभ हासिल करने की योजना बड़े पैमाने पर बना ली है। दरअसल छत्तीसगढ़ राज्य पांच संभागों -रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, सरगुजा और बस्तर में बंटा हुआ है। रायपुर संभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के पांच जिले और राज्य की 20 विधानसभा सीटें आती हैं। वहीं, बिलासपुर संभाग में आठ जिले और विधान सभा की 24 सीटें, दुर्ग संभाग में सात जिले 20 सीटें, सरगुजा संभाग में छह जिले 14 सीटें और बस्तर संभाग में राज्य का सात जिले और विधानसभा की 12 सीटें आती हैं। भाजपा पीएम मोदी ने इन पांचों संभागों में जनसभा कराकर चुनावी लाभ लेना चाहती है। आपको बता दें कि भाजपा पहले ही यह तय कर चुकी है कि पार्टी राज्य में सामूहिक नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे को आगे रखकर चुनाव लड़ेगी और इसलिए पार्टी प्रधानमंत्री की लोकप्रियता को ज्यादा से ज्यादा भुनाना चाहती है।
छत्तीसगढ़ का गठन साल 2000 में हुआ था। राज्य के पहले सीएम अजीत जोगी थे। 2003 में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए थे। इन विधानसभा चुनावों में भी बीजेपी ने स्थानीय मुद्दों को उठाया था। जिसके बाद राज्य में बीजेपी की सरकार बनी। 2023 के चुनावों में भाजपा सत्ता में वापसी करती है या फिर सीएम बघेल का करिश्मा बरकरार रहता है इसके लिए आपको 55 दिन तक नतीजे आने का इंतजार करना पड़ेगा।