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Bilaspur: गुरूघासीदास विश्वविद्यालय के छात्रों ने बनाया हर्बल गुलाल, कम लागत में कमा रहे बड़ा मुनाफा

Wed, 05 Mar 2025 08:17 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर Published by: Digvijay Singh Updated Wed, 05 Mar 2025 08:17 PM IST
सार

बिलासपुर में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के ग्रामीण प्रौद्योगिकी एवं सामाजिक विकास विभाग के छात्र ने रंगो के पर्व को कलरफुल के साथ खुशबूदार भी बनाया है।स्वालंबी छत्तीसगढ़ योजना के तहत इको-फ्रेंडली हर्बल गुलाल तैयार कर मार्केट मे उतारा है।

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Students of Guru Ghasidas University made herbal gulal earning huge profits at low cost in Bilaspur
छात्रों ने बनाया हर्बल गुलाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिलासपुर में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के ग्रामीण प्रौद्योगिकी एवं सामाजिक विकास विभाग के छात्र ने रंगो के पर्व को कलरफुल के साथ खुशबूदार भी बनाया है।स्वालंबी छत्तीसगढ़ योजना के तहत इको-फ्रेंडली हर्बल गुलाल तैयार कर मार्केट मे उतारा है। जो हानिकारक केमिकल से स्किन को मुक्त रखता है और पर्यावरण के लिए जो सुरक्षित है,बल्कि इन स्टूडेंट को आत्मनिर्भर बनने मे भी काफी मदद मिल रही है कम लागत लगाकर अच्छी मुनाफा भी इन्हे मिल रही है जिसे ये अपनी पढ़ाई के खर्च के लिए इस्तेमाल करते हैं।

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रूरल टेक्नोलॉजी विभाग मे पढने वाली छात्रा रुचि चौबे ने बताया कि वह इको-फ्रेंडली हर्बल गुलाल बन का काम कर रही हैं गुलाल बनाने का उन्हे प्रशिक्षण दिया गया है।इस प्रक्रिया में प्राकृतिक तत्व लाल भाजी,चुकंदर,हरी भाजी,हल्दी और कई औषधीय पौधे का इस्तेमाल किया गया है।जिसे मिक्सर ग्राइंडर मे बारीक पीसकर धूप में अच्छे से सुखाया जाता है, इसके बाद उसमे अरारोट के आटे में मिलाकर इसे और भी बारिक बनाया जाता है पुरी प्रकिया कम्प्लीट करने के बाद हर्बल गुलाल तैयार हो जाता है।
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छात्रा ने बताया कि वे इस तरह से काम करके वो लोग आत्मनिर्भर बन रही हैं और स्वरोजगार के नए  अवसर सीख रही हैं। इको-फ्रेंडली गुलाल एकदम चिकना और मुलायम  रहता है जिसे तौलक अलग अलग रंगों को पैकिंग कर बाजार में बिक्री के लिए ले जाया जाता है। 
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वहीं प्रोफेसर डॉ.दिलीप कुमार ने बताया की इस हर्बल गुलाल की डिमांड इतनी है की हर साल अच्छी कमाई होती है और छात्र अपनी फीस तक इससे निकाल लेते हैं। उन्होने बताया कि स्वालंबी छत्तीसगढ़ योजना के तहत छात्रों को स्वरोजगार के नए अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।हर साल की तरह इस बार भी ढाई क्विंटल इको फ्रेंडली गुलाल बनाने का लक्ष्य रखा गया है यहां पर बने इस हर्बल रंगों की बाजार में अच्छी खासी मांग भी है। छात्रों को हो रही आर्थिक लाभ के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी इनका यहा काम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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