'किसानों को गुमराह कर रही भूपेश सरकार': नेता प्रतिपक्ष चंदेल बोले- केंद्र ने धान खरीदी के लिए दिए 51563 करोड़
नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने धान खरीदी को लेकर कहा कि, भूपेश बघेल सरकार किसानों को लगातार गुमराह कर ही है। धान खरीदी को लेकर केंद्र सरकार पर झूठे आरोप लगा रही है। जबकि इनके तात्कालिक कृषि मंत्री अमरजीत भगत ने विधानसभा में स्वीकार किया है कि मोदी सकार ने धान खरीदी के लिए 51563 करोड़ रुपये दिए हैं।
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छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने धान खरीदी को लेकर कहा कि, भूपेश बघेल सरकार किसानों को लगातार गुमराह कर ही है। धान खरीदी को लेकर केंद्र सरकार पर झूठे आरोप लगा रही है। जबकि इनके तात्कालिक कृषि मंत्री अमरजीत भगत ने विधानसभा में स्वीकार किया है कि मोदी सकार ने धान खरीदी के लिए 51563 करोड़ रुपये दिए हैं। वहीं राज्य सरकार ने सिर्फ 11048 करोड़ लगाए। इससे पता चलता है कि 40 हजार करोड़ ज्यादा केंद्र की मोदी सरकार ने दिए हैं। कहा कि, भूपेश जी, विधानसभा के आंकड़ों को झूठा बता रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष रविवार को बिलासपुर में बोल रहे थे।
मीडिया से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष चंदेल ने कहा कि, केंद्र सरकार राज्य से 80 फीसदी धान ही नहीं लेती, बल्कि धान के भुगतान का तीन चौथाई हिस्सा भी देती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके मंत्री किसानों से झूठ बोलकर उन्हें गुमराह कर रहे हैं। कहा कि, भूपेश बघेल सरकार छत्तीसगढ़ के किसानों से सौतेला व्यवहार कर रही है। जिन किसानों ने कर्जा लिया, उनका माफ नहीं हुआ। दो साल का बोनस देने की बात जन घोषणा पत्र में कही थी, लेकिन नहीं मिला। प्रदेश के 18 लाख से अधिक किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से वंचित हैं, लेकिन राज्य सरकार को इस बात की परवाह नहीं।
नारायण चंदेल ने कहा कि, पौने पांच सालों में केंद्र सरकार ने सभी मदों में आज तक दो लाख करोड़ रुपये भूपेश सरकार को दिए हैं। उन रुपयों का क्या किया गया, कोई हिसाब नहीं है। कितने विकास कार्य कराए और कितना रुपया 10 जनपथ में अपने आकाओं को दिया। उन्होंने कहा कि, किसानों ने जो पहले कर्जे लिए थे, उन पर भी राज्य सरकार ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई। किसान अब डिफॉल्टर होने के कगार पर हैं। कहा कि वादे के मुताबिक किसानों को बारदाने का पैसा भी अभी तक नहीं मिला है। नए गिरदावरी होने के बाद बहुतायत किसानों के जमीन गुम होने की शिकायत भी है।