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Bilaspur: हाईकोर्ट ने कौड़ीकसा गांव में आर्सेनिक युक्त पानी की समस्या का लिया संज्ञान, अदालत ने दिए यह निर्देश

Tue, 27 May 2025 09:57 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर Published by: आकाश दुबे Updated Tue, 27 May 2025 09:57 PM IST
सार

सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि गांव के अनीशपुरी गोस्वामी और पूर्व जनपद उपाध्यक्ष नरोत्तम देहारी का कहना है कि पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण ग्रामीणों के पास केवल दो ही विकल्प हैं, वह या तो प्यासे मर जाएं या कुछ दिनों बाद धीरे-धीरे। उन्होंने मौत का यह दूसरा रास्ता चुन लिया है।

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High Court took cognizance of problem of arsenic contaminated water in Kaudikasa village
बिलासपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाईकोर्ट की स्पेशन बेंच ने दुर्ग जिले के कौड़ीकसा गांव में आर्सेनिक युक्त पानी का इस्तेमाल करने से लोगों को कई तरह के चर्म रोग होने के मामले का संज्ञान लिया है। कोर्ट ने सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को इस मुद्दे पर व्यक्तिगत शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इसी तरह शहर में जलभराव पर भी व्यवस्था की जानकारी देते हुए 29 मई को प्रकरण की फिर से सुनवाई होगी।

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प्रदेश के कई स्थानों में जल भराव और जल संकट से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई हाईकोर्ट में चल रही है। इसी याचिका पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस राकेश मोहन पाण्डेय की डीबी ने दुर्ग संभाग मुख्यालय से लगभग 90 किलोमीटर दूर अंबागढ़ चौकी के पास कौड़ीकसा नामक गांव में आर्सेनिक युक्त जहरीले पानी से बीमारी फैलने पर संज्ञान लिया। इस गांव की जनसंख्या लगभग 2500 है, जिसमें किसी के घर में चर्म रोगी है तो किसी के घर में अन्य रोगों से लोग पीड़ित हैं। बच्चे, वयस्क, बुजुर्ग या महिलाएं, सभी के पूरे शरीर पर काले धब्बे और अन्य तरह का चर्म रोग है। आर्सेनिक युक्त पानी के कारण कौड़ीकसा के सैकड़ों लोगों की जान खतरे में है। इस समस्या के समाधान के लिए जब रिमूवल प्लांट से शुद्ध पानी की आपूर्ति की व्यवस्था अपर्याप्त हुई तो शासन ने अंबागढ़ से शिवनाथ नदी में पानी ले जाना शुरू किया। यह भी हाईकोर्ट के संज्ञान में लाया गया कि नदी से पानी लिफ्ट करने के लिए योजना बनाई गई है। कौड़ीकसा सहित 23 गांवों में नदी का पानी पहुंचाया जा रहा है।
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सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि गांव के अनीशपुरी गोस्वामी और पूर्व जनपद उपाध्यक्ष नरोत्तम देहारी का कहना है कि पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण ग्रामीणों के पास केवल दो ही विकल्प हैं, वह या तो प्यासे मर जाएं या कुछ दिनों बाद धीरे-धीरे। उन्होंने मौत का यह दूसरा रास्ता चुन लिया है, लोगों ने फिर से आर्सेनिक युक्त पानी का उपयोग करना शुरू कर दिया है। इसके मद्देनजर कोर्ट ने प्रतिवादी, सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी छत्तीसगढ़ को शपथपत्र में समस्या के समाधान के लिए किए जा रहे उपाय बताने को कहा है।

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