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Bilaspur: थाने बुलाकर मारपीट करने के मामले में हाईकोर्ट सख्त, प्रदेश भर के थानों में CCTV लगाने के निर्देश
Tue, 05 Mar 2024 10:48 PM IST
आकाश दुबे
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
Published by: आकाश दुबे
Updated Tue, 05 Mar 2024 10:48 PM IST
सार
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने कहा कि है रिकॉर्ड के अवलोकन से यह काफी है स्पष्ट है कि पूछताछ में किसी भी सीसीटीवी फुटेज पर विचार नहीं किया गया।
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बिलासपुर हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
थाने बुलाकर प्रताड़ित और मारपीट करने के मामले पर हाईकोर्ट ने जमकर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया है कि प्रदेश भर के सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और प्रदेश भर के सभी एसपी नियमित रूप से इसकी मॉनिटरिंग करें। सीसीटीवी को नियमित रूप से ऑपरेट करने और उसके फुटेज को सुरक्षित रखने की व्यवस्था करने के भी निर्देश हाईकोर्ट ने दिए हैं।
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दरअसल रायगढ़ निवासी याचिकाकर्ता शशिभूषण की पत्नी ने रायगढ़ कोतरा रोड़ पुलिस पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। इसमें कहा गया है कि झूठे केस से नाम हटाने के लिए एक लाख रुपये की मांग पुलिस द्वारा की जा रही थी। पैसे नही देने पर कपड़े उतरवाकर लॉकअप में पिटाई की गई। निचले अदालत से याचिका खारिज होने के बाद एडवोकेट अंकित सिंह के माध्यम से यह याचिका हाईकोर्ट में लगाई गई थी। हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत आवेदन भी स्वीकार कर लिया है। याचिकाकर्ता तरूणा महेन्द्र ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है कि वह गृहिणी हैं और 10 नवंबर 2023 को उनके पति शशिभूषण को जान-बूझकर फर्जी प्रकरण में पकड़ लिया गया।
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कोतरा रोड थाने में कपड़े उतरवाकर थाना प्रभारी कोतरा रोड रायगढ़ द्वारा लॉकअप में बंद किया गया था। इससे पहले थाने में पदस्थ आरक्षक करुणेश राय विगत 15-20 दिन पूर्व से ही बार-बार फोन कर उनके पति को बार-बार थाने बुलाते थे और एकान्त में मुलाकात कर पैसा ले-देकर मामला खत्म करने के लिए मजबूर करते थे। इसके साथ ही इसी आरक्षक ने 22 अक्तूबर 2023 को घर आकर याचिकाकर्ता के देवर कृष्णा महेन्द्र एवं सास सुशिला महेन्द्र को धमकी दी थी। याचिका में कहा गया कि उनके पति ने कोई अपराध ही नहीं किया इसके बाद भी एक लाख रुपये की मांग की गई।
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याचिका के अनुसार, करुणेश राय के साथ थाना प्रभारी की भी मिली भगत थी क्योंकि यह सब कुछ उनकी उपस्थिति में हुआ था। पुलिस के दबाव में थाने के बाहर 25 हजार रुपये दिए गए और 25 हजार रुपये बाद में दिए जाने की बात कही गई। इसके बाद भी पुलिस वाले नहीं माने। याचिका में कहा गया कि पुलिस न तो एफआईआर दर्ज कर उनके पति को जेल भेज रही न छोड़ रही है, सिर्फ पैसे के लिए बेवजह प्रताड़ित कर कर रही है। इस बारे में जैसे ही एसपी से शिकायत की गई तो कोतरा रोड थाना प्रभारी ने धारा 420 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने कहा कि है रिकॉर्ड के अवलोकन से यह काफी है स्पष्ट है कि पूछताछ में किसी भी सीसीटीवी फुटेज पर विचार नहीं किया गया। कोर्ट ने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से पूछा है कि सीसीटीवी चालू था या नहीं। बताया गया है कि सीसीटीवी चालू हालत में नहीं था। इस पर कोर्ट नाराज हुआ और इसकी नियमित रूप से निगरानी के निर्देश दिए गए।