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Bilaspur: प्रदेश में हाथी और बाघ जैसे वन्य जीवों की हो रही मौतों पर हाईकोर्ट में सुनवाई, जानें पूरा मामला

Tue, 15 Apr 2025 07:12 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 15 Apr 2025 07:12 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट में प्रदेश के हाथी और बाघ जैसे वन्य जीवों की मौत पर सुनवाई चल रही है। वहीं लगातार कोर्ट इस मामले में निगरानी कर रहा है। मंगलवार को भी इस मामले में जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की बेंच में सुनवाई हुई।

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Hearing in High Court on deaths of wild animals like elephants and tigers in state in Bilaspur
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट में प्रदेश के हाथी और बाघ जैसे वन्य जीवों की मौत पर सुनवाई चल रही है। वहीं लगातार कोर्ट इस मामले में निगरानी कर रहा है। मंगलवार को भी इस मामले में जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की बेंच में सुनवाई हुई। वहीं वन विभाग की ओर पीसीसीएफ ने शासन के अधिवक्ता के माध्यम से हलफनामा पेश किया गया। उप महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने कोर्ट को सुनवाई के दौरान बताया कि 17 मार्च को एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई जिसमें बाघों की सुरक्षा के संबंध में विभिन्न कदम उठाए जाने पर चर्चा की गई। वहीं बेंच ने इस मामले को निगरानी में रखते हुए 14 जुलाई को सुनवाई रखी है।

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पिछली सुनवाई में न्यायालय द्वारा पारित 21 नवंबर 2024 के आदेश के अनुपालन में अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव, वन विभाग, छत्तीसगढ़ द्वारा एक हलफनामा दायर किया गया था। जिसमें बाघों की मृत्यु को रोकने के लिए राज्य द्वारा उठाए गए कदम को बताया था। इन कदमों में उत्तर प्रदेश राज्य के "बाघ मित्र" मॉडल से प्रेरित होकर छत्तीसगढ़ के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक एवं अन्य अधिकारियों के नेतृत्व में एक टीम ने बाघ मित्र योजना की सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन करने के लिए उत्तर प्रदेश के विभिन्न बाघ अभयारण्यों एवं समीपवर्ती गांवों का दौरा का जिक्र था। वहीं उत्तर प्रदेश में इस योजना के सफल क्रियान्वयन के आधार पर छत्तीसगढ़ में भी इसे लागू करने का निर्णय लिया जाने को बात कही गई थी, जिसका उद्देश्य मानव-बाघ संघर्ष को न्यूनतम करना तथा राज्य में बाघों की प्रभावी सुरक्षा एवं संरक्षण सुनिश्चित करना है। 
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दरअसल, 8 नवंबर 2024 को कोरिया जिले के गुरू घासीदास नेशनल पार्क स्थित नदी किनारे एक बाघ का शव बरामद हुआ था। यह शव सोनहत-भरतपुर सीमा के देवशील कटवार गांव के पास पाया गया। शुरुआती जांच में बाघ के नाखून, दांत और आंख जैसे अंग गायब पाए गए।जिससे यह संदेह जताया गया कि, बाघ को जहर देकर मारा गया होगा। हालांकि, शपथपत्र में बताया गया था कि बाघ की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में जहर की पुष्टि नहीं हुई है और बीमारी से मौत की संभावना जताई गई है। बिसरा रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। वहीं गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान कोरिया में बाघ की मौत पर हाईकोर्ट ने 11 नवंबर को सुनवाई करते हुए नाराजगी जताई थी। वन विभाग के उच्चाधिकारियों से जवाब-तलब किया था। चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने कहा था कि वन्य जीव नष्ट हो रहे हैं, पर्यावरण भी नष्ट हो रहे हैं, अब बचा क्या..? वन्य जीव नहीं बच पाएंगे, जंगल नहीं बचेंगे तो कैसे चलेगा? कोर्ट ने मामले में वन एवं पर्यावरण संरक्षण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को 10 दिन के अंदर व्यक्तिगत शपथपत्र पर जवाब देने कहा था कि वन्यजीवों के संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?

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