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HC: पूर्व IAS टुटेजा की याचिका खारिज, वहीं बिना सबूत पत्नी पर चरित्रहीनता के आरोपों को कोर्ट ने माना क्रूरता

Sat, 28 Jun 2025 08:11 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर Published by: Digvijay Singh Updated Sat, 28 Jun 2025 08:11 PM IST
सार

पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा की याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। याचिका में टुटेजा ने पूरी जांच और पुलिसिया कार्रवाई के साथ ही ईडी और एसीबी द्वारा की जारी कार्रवाई की मॉनिटरिंग कोर्ट द्वारा किए जाने की मांग की थी ।

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Former IAS Tuteja petition rejected while the court considered allegations of characterlessness against wife w
बिलासपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा की याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। याचिका में टुटेजा ने पूरी जांच और पुलिसिया कार्रवाई के साथ ही ईडी और एसीबी द्वारा की जारी कार्रवाई की मॉनिटरिंग कोर्ट द्वारा किए जाने की मांग की थी । इस अपील को हाईकोर्ट ने स्वीकार नहीं किया ।प्रदेश के चर्चित शराब घोटाला और मनी लांड्रिंग केस में पूर्व आईएएस जेल में हैं। पूर्व में एसीबी की कार्रवाई के खिलाफ टुटेजा द्वारा दायर की गई जमानत याचिका भी खारिज की जा चुकी है। इसके बाद ईडी के प्रकरण में उन्होंने जमानत याचिका दायर की थी।

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सुनवाई के दौरान टुटेजा के वकील ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। राजनीतिक षडयंत्र के तहत उन्हें झूठे केस में फंसाया गया है। इसके साथ ही इस प्रकरण को चलते हुए काफी समय हो गया है और याचिका करता काफी दिनों से जेल में बंद है। ईडी की तरफ से उपमहाधिवक्ता डॉ. सौरभ पांडेय ने जमानत देने का विरोध करते कहा कि शराब घोटाला के अलावा डीएमएफ, कोयला घोटाला सहित और भी कई प्रकरण में वे आरोपी हैं। उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। ईडी की तरफ से कहा गया कि अब तक की जांच से पता चलता है कि याचिकाकर्ता अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी और अनवर ढेबर के साथ सिंडिकेट का मुख्य हिस्सा रहे हैं। ये स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता शराब घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक था। उसने सरकारी अफसर होने के नाते पद का दुरुपयोग किया।

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बिना सबूत पत्नी पर चरित्रहीनता का आरोप मानसिक क्रूरता

पत्नी पर चरित्रहीनता और व्यभिचार के आरोप लगाने को हाईकोर्ट ने पति की मानसिक क्रूरता माना है। इसके साथ ही कोर्ट ने तलाक के लिए दायर पति की अपील खारिज कर फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है। जस्टिस रजनी दुबे, जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच में प्रकरण की सुनवाई हुई। कोर्ट ने आदेश में कहा कि  पति ने अपने बहनोई के समक्ष पत्नी की पवित्रता पर आरोप लगाया। बिना प्रमाण  यदि उसके चरित्र की शुद्धता पर कोई आरोप लगाया जाता है, तो यह पति द्बारा पत्नी के विरुद्ध क्रूरता के समान है। इसके साथ ही कोर्ट ने तलाक देना उचित न मानते हुए पति की अपील खारिज कर दी।

यह है मामला
अपीलकर्ता पति का 24 जून 2012 को हिन्दू रीति रिवाजों के अनुसार विवाह हुआ था। विवाह के बाद दो बच्चे पैदा हुए, जिनमें एक बेटी और एक बेटा हैं। वर्तमान में बच्चे पत्नी के साथ रह रहे हैं। विवाह के 4-5 वर्षों बाद पति-पत्नी में झगड़े होने लगे और उनका आपसी व्यवहार बहुत ही खराब रहा। इस पर पत्नी 2018 में बच्चों के लेकर अपने मायके चली गई। इसके बाद पति ने परिवार न्यायालय में तलाक के लिए आवेदन दिया। आवेदन में कहा कि, पत्नी का दूसरे बच्चे के जन्म के पश्चात व्यवहार उपेक्षापूर्ण एवं अपमानजनक हो गया। वह पति एवं उसके परिवार को बिना बताए घर से बाहर जाने लगी तथा बाहर अधिक समय बिताने लगी। पति उसे हर बार समझाता रहा कि उसे अपने पति एवं बच्चों की छोटी सी दुनिया में खुश रहना चाहिए तथा यदि कोई कमी हो तो उसे बता देना चाहिए, जिसे वह पूरा करने का प्रयास करेगा, किन्तु इसका उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। पिछले डेढ़ वर्ष से अपीलार्थी व्यवसाय के लिए अन्य शहरों में जा रहा है, उसकी अनुपस्थिति में वह पति के दामाद (बहनोई) को रात्रि में अपने ससुराल बुलाती थी तथा उसके साथ समय बिताती थी। विरोध करने पर वह कहती थी कि वह उसे इसलिए बुलाती है, क्योंकि पति को समय नहीं मिल पाता, उसका उसके साथ कोई अन्य संबंध नहीं है।

कोर्ट ने पति के आरोपों को निराधार पाया
31अगस्त 2018 को दोपहर में पत्नी अपने पुरुष मित्र की मदद से दोनों बच्चों को लेकर घर से चली गई। पति ने उसे ढूंढने का प्रयास किया तो पता चला कि वह अपने मायके में रहने लगी है। घर से जाने के बाद वह तलाक के लिए दबाव बनाने लगी, पति ने इसकी थाने में रिपोर्ट लिखाई थी। ऐसी स्थिति में पति के पास उसे तलाक देने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। पत्नी नये पुरुषों के साथ रह रही है और गलत संगत में पड़ रही है, इसलिए इस बात की प्रबल संभावना है कि इसका बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। हालांकि इन सब आरोपों पर पति कोई प्रमाण या तथ्य प्रस्तुत नहीं कर पाया।

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