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Bijapur: सकलनारायण गुफा के अन्दर विराजे भगवान श्रीकृष्ण, मन्नत मांगने पहाड़ के रास्ते पहुंचते हैं श्रद्धालु

Sat, 29 Mar 2025 01:42 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर Published by: Digvijay Singh Updated Sat, 29 Mar 2025 01:42 PM IST
सार

बीजापुर जिले के भोपालपटनम ब्लॉक मुख्यालय से करीब छह किमी दूर सकलनारायण कि पहाड़ी पर भगवान श्रीकृष्ण कि भक्ति बसी हुई है, उस गुफा में कई वर्षों से भगवान श्रीकृष्ण कि मूर्ति रखी हुई है।

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Lord Krishna is seated inside Sakalnarayan cave devotees reach there through mountain to make wishes in Bijapu
भक्तों की लंबी कतार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीजापुर जिले के भोपालपटनम ब्लॉक मुख्यालय से करीब छह किमी दूर सकलनारायण कि पहाड़ी पर भगवान श्रीकृष्ण कि भक्ति बसी हुई है, उस गुफा में कई वर्षो से भगवान श्रीकृष्ण कि मूर्ति रखी हुई हैं। हर साल गुड़ी पड़वा - हिन्दू नववर्ष के दिन बड़ी तादात में श्रद्धांलू यह पहुंचकर दर्शन कर मन्नत मांगते हैं। यहां रखे कुछ अंश बताते हैं कि रामायण और महाभारत काल के कुछ रहस्य छुपे हुए हैं। गुफा के अंदर बहुत सारी सुरंगें हैं। इन सुरंगों में भगवान विराजे हुए हैं। पहाड़ी के अन्दर दस मीटर की सुरंग है जहां गोपिकाओं की मूर्तियां विराजी हुई हैं। श्रद्धालु यहां भी घुटनों के बल जाकर दर्शन कर लौटते हैं। इस गुफा तक पहुंचने कोई पक्का रास्ता नही हैं।

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पगडंडियों के रास्ते से होकर भगवान के दर्शन करने भक्त पहुंचते हैं। इसके आलावा कोई अन्य रास्ता नहीं हैं। यह सकल नारायण गुफा भोपालपटनम क्षेत्र की सर्व प्रसिद्ध गुफा मानी जाती है।वीरान गुफा के अंदर एकांत में भगवान श्री कृष्ण जी विराजमान हैं इस गुफा का अंतिम द्वार एकदम अनोखा हैं। गुफा के आस-पास सैकड़ों मधुमक्खियों की छत्ते लगी हुई हैं। पहाड़ी के आसपास गांव के पुजारी व ग्रामीण इस दर्शन की पूरी व्यवस्था करते है। जहाँ भगवान बसें हैं, उसकी ऊंचाई लगभग 1 हजार मीटर है।चारों ओर हरे- भरे, पेड़ -पौधों, फूलों से घिरा हुआ पगडंडी रास्ता होने के कारण पैदल तीन-चार किलोमीटर दूरी तय करनी पड़ती है।
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भगवान श्रीकृष्ण और राधा कि रचाई जाति हैं शादी
हिन्दू नववर्ष के अंतिम और शुरुआत के समय भगवान श्रीकृष्ण और राधा कि शादी रचाई जाति हैं. यह कार्यक्रम पुरे रीती रिवाज़ से किया जाता हैं।  कार्यक्रम पुरे पांच दिन का होता हैं। शादी समरोह के अंतिम दिन हिन्दू नववर्ष कि शुरुवात होती हैं। दर्शन के लिए आए भक्तो के लिए समिति के तरफ से खाने का इन्तेजाम किया जाता हैं।
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टार्च के सहारे गुफा के अन्दर प्रवेश
गुफा के अन्दर घनघोर अंधेरा छाया हुआ रहता हैं। दर्शन करने आए हुए भक्त अपने साथ टार्च या मोबाईल टार्च के सहारे अन्दर प्रवेश करते हैं।सामने के प्रवेश द्वार पर चौखट लगा हुआ हैं। बहार निकलने का रास्ता काफ़ी छोटा और सकरा हैं। घुटनो के बल यह से निकलना होता हैं। भाववान के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त यहाँ पहुंचते हैं।

हिन्दू नववर्ष पर सजाया जाता है मेला
गुड़ी पड़वा -हिन्दू नववर्ष के दौरान सकलनारायन पहाड़ी के नीचे मेला सजाया जाता हैं। बताया जाता हैं कि सन 1900 में गुफा की खोज हुई थी। हर साल यहां चैत्र कृष्ण पक्ष अमावस्या के तीन दिन पहले से मेला लगता है जो चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी नवरात्र शुरू होने वाले दिन इस मेले का समापन होता है। इस मेले को हिंदू वर्ष का अंतिम और आगमन मेला कहा जाता हैं हर साल यहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते है और नए साल के आगमन पर भगवान श्री कृष्ण से सुख, शांति, समृद्धि और सौभाग्य की कामना करते हैं।


पांच दिन का होगा कार्यक्रम
सकलनारायण पोषड़पल्ली में 26 से 30 तारीख तक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा हैं 26 मार्च बुधवार को मण्डाच्छादन, 27 को गोवर्धन पर्वत पूजा अर्चना एंव ध्वजारोहण, 28 को श्री कृष्ण भगवान पूजा अर्चना मंदिर परिसर में 29 को दोपहर 02 बजे माता राधा एवं कृष्ण विवाह समारोह एवं क्षेत्रीय लोकल नृत्य, 30 को 07 बजे भगवान की रथ यात्रा एवं समापन एवं गुड़ी पड़वा (चैत्र नवरात्र) प्रारंभ।

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