{"_id":"6a410ad58735c6bd44052f5e","slug":"bhopalpatnam-me-badhal-vyavstha-nalo-ki-andekhi-se-har-barish-dubta-nagar-panch-varsho-se-pareshan-nagrik-bijapur-news-c-1-1-noi1491-4443926-2026-06-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"भोपालपट्टनम में बदहाल व्यवस्था: नालों की अनदेखी से हर बारिश में डूबता नगर, पांच वर्षों से परेशान नागरिक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भोपालपट्टनम में बदहाल व्यवस्था: नालों की अनदेखी से हर बारिश में डूबता नगर, पांच वर्षों से परेशान नागरिक
Sun, 28 Jun 2026 06:23 PM IST
बीजापुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
Published by: बीजापुर ब्यूरो
Updated Sun, 28 Jun 2026 06:23 PM IST
सार
बीजापुर भोपालपटनम नगर पंचायत क्षेत्र में पहली बारिश के साथ ही विकास के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। नगर के कई वार्डों में जलभराव की गंभीर समस्या एक बार फिर सामने आई है।
विज्ञापन
बीजापुर न्यूज
विस्तार
बीजापुर भोपालपटनम नगर पंचायत क्षेत्र में पहली बारिश के साथ ही विकास के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। नगर के कई वार्डों में जलभराव की गंभीर समस्या एक बार फिर सामने आई है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर पंचायत द्वारा वर्षों से नालों और नालियों की समुचित सफाई नहीं कराई जा रही है, जिसके कारण बारिश का पानी सड़कों और घरों में घुस रहा है। हालात ऐसे हैं कि लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम उठाते दिखाई नहीं दे रहे हैं।
विज्ञापन
नगरवासियों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है। पिछले पांच वर्षों से लगातार हर बारिश में यही स्थिति बनती है। नगर पंचायत द्वारा हर साल सफाई और विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर उसका कोई प्रभाव दिखाई नहीं देता। लोगों का आरोप है कि टेंडर तो लगातार जारी किए जाते हैं, लेकिन नालों की सफाई, चौड़ीकरण और निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति किसी से छिपी नहीं है।
विज्ञापन
सबसे अधिक परेशानी राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-63 से लगे वार्डों में देखने को मिल रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क किनारे बनाए गए नालों का आकार बेहद छोटा है। जहां बारिश के पानी की निकासी के लिए कम से कम एक मीटर या उससे अधिक चौड़ाई और गहराई वाले नालों की आवश्यकता है, वहां लगभग 60×60 सेंटीमीटर के छोटे नाले बनाए गए हैं। परिणामस्वरूप पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाला तेज बहाव वाला पानी इन नालों में समा नहीं पाता और सीधे लोगों के घरों तथा गलियों में भर जाता है। नागरिकों का कहना है कि कई बार इस समस्या को लेकर नगर पंचायत, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन केवल आश्वासन ही मिले। बरसात शुरू होते ही वार्डों की सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती हैं। कई परिवारों को अपने घरों से पानी निकालने के लिए घंटों मशक्कत करनी पड़ती है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पंचायत के मुख्य नगरपालिका अधिकारी की क्षेत्र में उपस्थिति भी बेहद कम देखने को मिलती है। नागरिकों का कहना है कि समस्याओं की जानकारी होने के बावजूद अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण नहीं किया जाता। नगर की सफाई व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। नालों में कचरा, मिट्टी और झाड़ियां जमा हैं, जिससे पानी का बहाव पूरी तरह बाधित हो जाता है। नगरवासियों ने यह भी आरोप लगाया है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता की कमी है। टेंडर जारी होने और राशि खर्च होने की जानकारी तो मिलती है, लेकिन कार्यों की गुणवत्ता और उपयोगिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मजबूत और पर्याप्त आकार के नालों का निर्माण किया गया होता तो आज नगर को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
जनप्रतिनिधियों के प्रति भी लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। नागरिकों का कहना है कि चुनाव के समय पार्षद और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता घर-घर पहुंचकर विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही जनता की समस्याओं से दूरी बना लेते हैं। पांच वर्षों से लगातार जलभराव की समस्या बनी हुई है, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने इसका स्थायी समाधान निकालने की गंभीर पहल नहीं की। कई वार्डों में रहने वाले परिवारों का कहना है कि बारिश के दौरान घरों में घुसने वाला पानी घरेलू सामान, खाद्यान्न और अन्य जरूरी वस्तुओं को नुकसान पहुंचाता है। कई बार स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि लोगों को रातभर जागकर पानी निकालना पड़ता है। इसके बावजूद नगर पंचायत द्वारा केवल औपचारिक सफाई अभियान चलाकर जिम्मेदारी पूरी करने का प्रयास किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नगर की जल निकासी व्यवस्था उसकी भौगोलिक स्थिति और जल प्रवाह की मात्रा को ध्यान में रखकर तैयार की जानी चाहिए। यदि नालों की क्षमता कम होगी तो जलभराव की समस्या स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होगी। भोपालपट्टनम में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है, जहां बढ़ती आबादी और वर्षा जल के दबाव के अनुरूप नालों का विस्तार नहीं किया गया है।नगर के सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे नगर की जल निकासी व्यवस्था का तकनीकी सर्वे कराया जाए, नालों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए और जहां आवश्यकता हो वहां बड़े एवं मजबूत नालों का निर्माण कराया जाए। साथ ही विकास कार्यों की गुणवत्ता की जांच कर दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
फिलहाल भोपालपट्टनम के नागरिक एक बार फिर बारिश के मौसम में उन्हीं समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिनका समाधान वर्षों पहले हो जाना चाहिए था। सवाल यह है कि आखिर कब तक नगरवासी जलभराव, बदहाल सफाई व्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता का खामियाजा भुगतते रहेंगे? विकास के दावों और धरातल की सच्चाई के बीच बढ़ती खाई अब जनता के आक्रोश का कारण बनती जा रही है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में यह जन असंतोष बड़े आंदोलन का रूप भी ले सकता है।