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Korba: अंतिम संस्कार से पहले लगा आरक्षक जिंदा है, परिजनों ने अस्पताल पहुंचाया, डॉक्टरों ने फिर किया मृत घोषित
Sun, 28 Sep 2025 11:51 AM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
Published by: अमन कोशले
Updated Sun, 28 Sep 2025 11:51 AM IST
सार
अंतिम संस्कार की तैयारी के बीच परिजनों ने देखा कि शव में हलचल हो रही है और सांस जैसी हल्की आवाज महसूस हुई। परिजनों ने तुरंत आरक्षक को निजी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने फिर से मृत घोषित कर दिया।
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मृतक कृष्ण कुमार खरिया
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में शनिवार को एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सभी को हैरान कर दिया। एसपी कार्यालय में पदस्थ आरक्षक कृष्ण कुमार खरिया (34 वर्ष) की इलाज के दौरान मौत हुई थी। परिजनों को शव सौंप दिया गया और अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी। लेकिन रविवार सुबह अचानक लगा कि आरक्षक जिंदा है। हड़कंप मच गया और शव को दोबारा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने फिर से मृत घोषित कर दिया।
उरगा थाना क्षेत्र के भैसमा के बगबुड़ा निवासी कृष्ण कुमार खरिया को शनिवार दोपहर अचानक सीने में दर्द हुआ। वह खुद बाइक चलाकर साथी के साथ जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे। इलाज शुरू हुआ ही था कि उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई और डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलते ही विभाग और परिजनों में हड़कंप मच गया। शव को परिजनों को सौंपा गया और रातभर घर पर रखा गया। रविवार सुबह मुक्तिधाम ले जाने की तैयारी की जा रही थी।
अचानक जिंदा होने की उम्मीद
अंतिम संस्कार की तैयारी के बीच परिजनों ने देखा कि शव में हलचल हो रही है और सांस जैसी हल्की आवाज महसूस हुई। शरीर में गर्माहट और मूवमेंट देख घर में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों ने तुरंत आरक्षक को निजी अस्पताल पहुंचाया। परिजन इतने आश्वस्त थे कि वे पानी तक पिलाने लगे। लेकिन वहां डॉक्टरों ने जांच कर साफ कह दिया कि आरक्षक की पहले ही मौत हो चुकी है।
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पुलिस की पुष्टि
कोरबा सीएसपी भूषण एक्का ने बताया कि आरक्षक की मौत इलाज के दौरान शनिवार को हो चुकी थी। परिजन जब रविवार को निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, तब भी डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम कराया है।
परिवार पर टूटा दुख का पहाड़
कृष्ण कुमार तीन भाइयों में सबसे छोटा था। 2013 बैच में आरक्षक के रूप में भर्ती हुए थे। पिता की मौत के बाद वे बूढ़ी मां, दो भाई, पत्नी और दो बेटियों का सहारा थे। बड़ी बेटी 9 साल की और छोटी 6 साल की है। पूरे गांव और पुलिस विभाग में शोक की लहर है।
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उरगा थाना क्षेत्र के भैसमा के बगबुड़ा निवासी कृष्ण कुमार खरिया को शनिवार दोपहर अचानक सीने में दर्द हुआ। वह खुद बाइक चलाकर साथी के साथ जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे। इलाज शुरू हुआ ही था कि उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई और डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलते ही विभाग और परिजनों में हड़कंप मच गया। शव को परिजनों को सौंपा गया और रातभर घर पर रखा गया। रविवार सुबह मुक्तिधाम ले जाने की तैयारी की जा रही थी।
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अचानक जिंदा होने की उम्मीद
अंतिम संस्कार की तैयारी के बीच परिजनों ने देखा कि शव में हलचल हो रही है और सांस जैसी हल्की आवाज महसूस हुई। शरीर में गर्माहट और मूवमेंट देख घर में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों ने तुरंत आरक्षक को निजी अस्पताल पहुंचाया। परिजन इतने आश्वस्त थे कि वे पानी तक पिलाने लगे। लेकिन वहां डॉक्टरों ने जांच कर साफ कह दिया कि आरक्षक की पहले ही मौत हो चुकी है।
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पुलिस की पुष्टि
कोरबा सीएसपी भूषण एक्का ने बताया कि आरक्षक की मौत इलाज के दौरान शनिवार को हो चुकी थी। परिजन जब रविवार को निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, तब भी डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम कराया है।
परिवार पर टूटा दुख का पहाड़
कृष्ण कुमार तीन भाइयों में सबसे छोटा था। 2013 बैच में आरक्षक के रूप में भर्ती हुए थे। पिता की मौत के बाद वे बूढ़ी मां, दो भाई, पत्नी और दो बेटियों का सहारा थे। बड़ी बेटी 9 साल की और छोटी 6 साल की है। पूरे गांव और पुलिस विभाग में शोक की लहर है।