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Exclusive: कैदियों के साथ 4 दिनों तक जेल में रखा, लोग मार रहे तानें,नहीं हो रही शादी,डीएड अभ्यर्थियों की पीड़ा

Sat, 31 Oct 2026 03:47 PM IST
Lalit Kumar Singh अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: Lalit Kumar Singh Updated Sat, 31 Oct 2026 03:47 PM IST
सार

'शातिर' कैदियों के साथ चार दिनों तक रायपुर सेंट्रल जेल में रखा गया। समाज के लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। कानाफूसी और तानों से जीना दूभर हो गया है। सामाजिक तानें-बानें सुनने पड़ रहे हैं। पड़ोसी चुटकी ले रहे हैं। टीका टिप्पणी कर रहे हैं। जेल में रहने की वजह से हमारी शादी नहीं हो पा रही है। 

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Kept in RAIPUR jail for 4 days with prisoners, said CG DEd Candidates
ग्रॉफिक्स: अमर उजाला डिजिटल - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

'शातिर' कैदियों के साथ चार दिनों तक रायपुर सेंट्रल जेल में रखा। समाज के लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। कानाफूसी और तानों से जीना दूभर हो गया है। सामाजिक तानें-बानें सुनने पड़ रहे हैं। पड़ोसी चुटकी ले रहे हैं। टीका टिप्पणी कर रहे हैं। जेल में रहने की वजह से हमारी शादी नहीं हो पा रही है। लगन लगकर कट जा रहे हैं। शादी-ब्याह की उम्र हो गई पर शादी नहीं हो रही है। ये पीड़ा है छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर के तूता धरना स्थल में आमरण अनशन पर बैठे हुए डीएड अभ्यर्थियों का। 

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अमर उजाला से खास चर्चा में इन अभ्यर्थियों ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान आत्मदाह की कोशिश के दरमियान उन्हें उठाकर रायपुर सेंट्रल जेल में डाल दिया गया। पुलिस प्रशासन की इस कार्रवाई की वजह से हमें सामाजिक तानें सुनने पड़ रहे हैं। इस वजह से उनकी शादी नहीं हो पा रही है। वहीं उनके परिजनों का मान-सम्मान भी खत्म होते जा रहा है। सामाजिक परिवेश में रहना दुश्वार हो गया है। इतना सब होने के बावजूद सरकार हाथ पर हाथ धरकर बैठे हुई है। यदि उनकी मांगें मान ली जाये, तो उनके भी हाथ पीले हो जायेंगे। घर में शहनाइयां गूंज उठेंगी। चारों तरफ खुशियां ही खुशियां होंगी।   
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रोती बिलखती हुई प्रियंका ने बताया कि शादी की उम्र हो गई है पर ब्याह नहीं हो पा रहा है। आरोप लगाते हुए कहा कि आदिवासी सीएम होते हुए भी आदिवासी लड़कियों की शादी नहीं हो पा रही है। मूरली चंद्रवशी मोना आदित्य ने कहा कि शादी-विवाह में अड़चनें आ रही हैं। कई रिश्ते दरवाजे से आकर लौट जा रहे हैं। रिश्ते बनते-बनते टूट जा रहे हैं। विरोध प्रदर्शन कर रही करीब 60 लड़कियों के हाथों में शादी की मेहंदी नहीं लग पा रही है। चार दिन जेल रखे जाने की वजह से लोग शादी करने से कतर रहे हैं। उनके हाथ पीले नहीं हो पा रहे हैं। शादी का अरमान संजोये इन लड़कियों के अरमानों पर पानी फिर जा रहा है। इतना ही नहीं विवाह को लेकर इन युवतियों के माता-पिता के सपने भी इस आंदोलन की भेट चढ़ गये हैं। आमरण अनशन की वजह से करीब 200 लड़कों के शादी के सपनों पर पानी फिर गया है। करीब 60 लड़कियां और 200 लड़के कुंवारे बैठे हुए हैं। 
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बता दें कि सहायक शिक्षक के 2316 पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ डीएड अभ्यर्थी 316 दिन से नवा रायपुर के तूता धरना स्थल में आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। मामले में सुप्रीम कोर्ट और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद अभी तक नियुक्ति नहीं हुई है। जबकि इन पदों के लिये काउंसिलिंग भी हो चुकी है। इसके बाद भी अभी तक इन पदों पर सहायक शिक्षकों को पदस्थ नहीं किया गया है। 







दस महीने और 316 दिन पूरे, फिर भी हाथ खाली
24 दिसंबर 2025 से शुरू हुए इस आंदोलन के दस महीने पूरे हो चुके हैं। इसके बावजूद इन अभ्यर्थियों के हाथ खाली हैं। खास और बड़ी बात ये है कि मामले में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की दखल के बावजूद अभी तक राज्य सरकार ने उनकी सुध नहीं ली है। सरकार के कानों पर जू तक नहीं रेग रहे हैं। 







राष्ट्रपति, राज्यपाल, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को लिखा खून से खत
इन अभ्यर्थियों ने अपने खून से राष्ट्रपति, राज्यपाल, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री सहित अन्य मंत्रियों को खत लिखकर न्याय की गुहार लगा चुके हैं पर अभी तक किसी ने भी उनकी फरियाद नहीं सुनी है। एक तरफ जहां छात्रों के विरोध प्रदर्शन से केंद्र सरकार हिल गई थी। वहीं राज्य की बीजेपी सरकार ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। ऐसे में न्याय की आस में बैठे इन अभ्यर्थियों की आंखें पथरा गई हैं। अभ्यर्थियों की शारीरिक और मानसिक स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। लगातार स्वास्थ्य बिगड़ते जा रहे हैं पर राज्य सरकार मामले में मौन है। 







पीड़ित अभ्यर्थी मूरली चंद्रवशी और फूल सीता का कहना है कि का कहना है कि सरकार के मंत्री नेता केवल मौखिक आदेश दे रहे हैं पर उनकी नियुक्ति को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। सरकार के खिलाफ करियर की लड़ाई में डीएड अभ्यर्थियों के सारे अरमानों की बलि चढ़ गई है। उनके शादी-विवाह नहीं हो रहे हैं। दरवाजे से रिश्ते आकर लौट जा रहे हैं। शादी नहीं हो रही है।  यह आंदोलन अब केवल रोजगार की मांग नहीं, बल्कि न्याय, अधिकार और संवैधानिक सम्मान की लड़ाई बन चुकी है। आमरण अनशन के दौरान 300 से अधिक अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ चुकी है। सूचना देने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंचती है। 







रक्षाबंधन पर भी जारी रहा आमरण अनशन
2316 रिक्त सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर डीएड अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन आमरण अनशन 248वें दिन रक्षाबंधन पर भी जारी रहा। रक्षाबंधन पर आंदोलनरत महिला डीएड अभ्यर्थियों ने कैबिनेट मंत्रियों को राखी बांधकर अपने भविष्य को संवारने की अपील की। जहां पूरे प्रदेश में लोग रक्षाबंधन मना रहे थे। वहीं इस दिन भी डीएड अभ्यर्थी भाई-बहन न्याय की आस में आमरण अनशन करते रहे। इस दौरान महिला अभ्यर्थियों ने कहा कि हमने राखी बांधी है, अब सरकार हमारे भविष्य की रक्षा करें। 2300 पदों पर नियुक्ति देकर उनके संघर्ष को न्यायपूर्ण अंत दिया जाए।







डीएड अभ्यर्थियों की मांगें

  1. 2300 रिक्त पदों पर पात्र डीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति दी जाये
  2. मामले में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों का पालन हो
  3. डीएड अभ्यर्थियों की वैध नियुक्ति दी जाये







अब तक इन तरीकों से किया प्रदर्शन 

  • मौन धरना - “चुप्पी नहीं, न्याय की पुकार
  • कैंडल मार्च - “अंधेरे में भी न्याय की उम्मीद”
  • “एक कप चाय न्याय के नाम” अभियान
  • सांकेतिक भीख मांगकर प्रदर्शन 
  • दंडवत प्रणाम यात्रा
  • घुटनों के बल लेटकर चले
  • रामनवमी पर कलश यात्रा
  • 14 मंत्रियों के नाम से 108 दीप जलाये
  • हनुमान चालीसा पाठ
  • नौ कन्या पूजा
  • जल सत्याग्रह
  • अंगारों पर चले
  • शिक्षा मंत्री को दिया ज्ञापन
  • हथकड़ी लगाकर सांकेतिक फांसी पर चढ़ना






फैक्ट फाइल

  • विरोध के दौरान अभ्यर्थियों की बिगड़ी तबीयत
  • आमरण अनशन के दौरान 300 से अधिक अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ी
  • कई अभ्यर्थियों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा
  • भीषण गर्मी और लू के कारण लगातार अभ्यर्थियों की तबीयत खराब हुई
  • कई लोग बेहोशी और कमजोरी का शिकार हुए
  • आत्मघाती कदम भी उठाये
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