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बालोद: यहां पहले दिन से ही छाई मायूसी, शिक्षा से वंचित हुए बच्चे, जानें पूरा मामला

Mon, 16 Jun 2025 04:28 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बालोद
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद Published by: Digvijay Singh Updated Mon, 16 Jun 2025 04:28 PM IST
सार

आज से स्कूलों के द्वारा फिर से खुल चुके हैं बच्चे एडमिशन लेने खुशी-खुशी पहुंच रहे हैं लेकिन बालोद जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय झलमला से एक ऐसी खबर सामने आ रही है जो की शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलती नजर आ रही है।

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Disappointment prevailed here from the first day itself children were deprived of education in Balod
शिक्षा से वंचित हुए बच्चे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आज से स्कूलों के द्वारा फिर से खुल चुके हैं बच्चे एडमिशन लेने खुशी-खुशी पहुंच रहे हैं लेकिन बालोद जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय झलमला से एक ऐसी खबर सामने आ रही है जो की शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलती नजर आ रही है। दरअसल यहां पर जर्जर कमरों और शिक्षकों के अभाव की वजह से अब बच्चों के एडमिशन को ना कह दिया है। आज सैकड़ो बच्चे एडमिशन की उम्मीद लिए विद्यालय तो पहुंचे हुए थे लेकिन विद्यालय प्रबंधन में एडमिशन लेने से मना कर दिया विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि हमारे पास आधा दर्जन कमरे जर्जर हालत में है और हम यदि दो शिफ्ट लगाते हैं तो शिक्षकों की कमी है और हमारे संकुल के बच्चों को एडमिशन लेना हमारी प्राथमिकता है। इसलिए हम आसपास के गांव के दूसरे संकुल के बच्चों का एडमिशन नहीं ले रहे हैं कई बच्चे और पालक तो मायूस हो कर निकले और अपने बच्चों को ना पढ़ाने की बात तक कह डाली।

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आपको बता दें कि जिस विद्यालय के घटिया भावनाओं की चर्चा हम कर रहे हैं वह विद्यालय बीते 4 वर्षों से पूरे  प्रदेश में नाम रोशन करते हुए मेरिट सूची में अपना स्थान बना रहा है प्राचार्य ने बताया कि मैं बीते 4 वर्षों से भवन के लिए पत्र लिख रही हूं और अभी जब विद्यालय बंद था तब भी मैं लगातार जिला प्रशासन को अवगत करा रही थी और आज से विद्यालय खुल चुका है तो अब यह मेरे बस में नहीं है और हमारे स्थानीय बच्चों को एडमिशन लेना हमारी प्राथमिकता है इसलिए हम बाहर के बच्चों को एडमिशन नहीं दे रहे हैं आपको बता दें कि यह विद्यालय आसपास के क्षेत्र का विख्यात विद्यालय है इसलिए सैकड़ो की संख्या में आज बच्चे यहां पर पहुंचे हुए थे।
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कुछ पालक बोले, हम गरीब अब कहां जायेंगे
बालोद जिले के ग्राम हीरापुर से अपनी बच्ची को एडमिशन कराने आए पलक देव सिंह साहू जो की पैरों से दिव्यांग है उसने बताया कि वह बेहद गरीब है और अपने बच्चों को एक अच्छे शासकीय विद्यालय में पढ़ना चाहता है लेकिन परिस्थितियों कुछ ऐसी हो गई कि उसके बच्चों का एडमिशन नहीं लिया जा रहा है जिसने उन्हें कहा कि मैं तो गरीब हूं आप कहां जाऊंगा ज्यादा हुआ तो अपने बच्चों को नहीं पढ़ पाऊंगा इसी तरह उसके बच्चों ने भी कहा कि हम अपने पापा के ऊपर बोझ नहीं बनना चाहते हम रोजी मजदूरी कर लेंगे और स्कूल नहीं जाएंगे आखिर प्रशासन और शासन ऐसे स्कूलों पर ध्यान क्यों नहीं दे रही है। 
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शाला प्रबंधन समिति की हुई बैठक
विद्यालय की परिस्थितियों को देखते हुए सरल प्रबंधन समिति की बैठक भी हुई वहां के वरिष्ठ सदस्य पलक ठाकुर ने जानकारी लेते हुए बताया कि विद्यालय में भवन की काफी समस्या है जिसके कारण बच्चों का एडमिशन नहीं लिए जाने के बाद निकाल कर सामने आई है और हम अब इस पूरे मामले को जिला प्रशासन और कलेक्टर के सामने रखेंगे ताकि कोई ठोस निष्कर्ष निकाला जा सके बच्चे किसी तरह से भी शिक्षा से वंचित न हो इस बात का पूरा ध्यान रखा जाएगा इस पूरे घटनाक्रम के दौरान गांव के सरपंच से लेकर जनपद सदस्य भी मौजूद रहे। 

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