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छत्तीसगढ़ में शराब के मुद्दे पर सियासत, कांग्रेस ने रमन सरकार को घेरा
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 16 Oct 2018 11:57 AM IST
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Congress
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छत्तीसगढ़ में 12 नवंबर और 20 नवंबर को दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव लगभग एक महीने दूर है। प्रदेश में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और इसी कड़ी में अब राज्य में शराब के मुद्दे पर सियासत शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ में शराब दुकानों का संचालन छत्तीसगढ़ सरकार का आबकारी विभाग ही करता है जिसको लेकर कांग्रेस ने अब सरकार और बीजेपी को घेरने की तैयारी कर ली है।
कांग्रेस का कहना है कि अगर सरकार शराब बेचेगी तो इसका सीधा असर विधानसभा के चुनाव पर हो सकता है इसलिए शराब की बिक्री छत्तीसगढ़ में निर्वाचन आयोग के संरक्षण में होनी चाहिए या फिर जब तक विधानसभा चुनाव नहीं हो जाते छत्तीसगढ़ में शराब की दुकानों पर ताला लगा देना चाहिए।
कांग्रेस ने रमन सरकार को घेरा
पिछले चुनाव में देखा गया है कि विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं तक कई राजनीतिक पार्टियों के लोग शराब पहुंचाते नजर आए और उसका सियासी फायदा भी लेते हैं। ऐसे में कांग्रेस को डर है कि अगर छत्तीसगढ़ सरकार शराब बेचेगी तो विधानसभा चुनाव प्रभावित हो सकते हैं। इसी को लेकर कांग्रेस ने रमन सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।
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जल्द ही वह शराबबंदी को लेकर निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटा सकती है। कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी का आरोप है कि छत्तीसगढ़ में शराब दुकानों का संचालन निर्वाचन आयोग की निगरानी में होना चाहिए। साथ ही जब तक विधानसभा चुनाव नहीं हो जाते शराब की दुकानों पर ताला लगा देना चाहिए और सरकार को छत्तीसगढ़ में पूर्ण शराबबंदी की ओर अग्रसर होना चाहिए। अगर कांग्रेस की सरकार आती है तो प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी लागू की जाएगी क्योंकि शराब के कारण लगातार अपराध का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ सरकार खुद शराब बेच रही है और इससे सरकार का दोहरा चरित्र सामने आ रहा है।
वहीं, भाजपा के प्रवक्ता केदार गुप्ता का कहना है कि कांग्रेस विधानसभा चुनाव से काफी डरी हुई है और अच्छी तरह से जानती है कि चौथी बार डॉक्टर रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में सरकार बन रही है। कांग्रेस सिर्फ आरोप लगाने की राजनीति करती है,विकास के मुद्दे पर बात नहीं करती है। इसके पहले भी कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से इस मामले पर शिकायत की थी। निर्वाचन आयोग जो भी आदेश देगा सरकार उसका पालन करेगी और अगर कानून और संविधान सम्मत हुआ तो छत्तीसगढ़ में भी पूर्ण शराबबंदी लागू की जाएगी।
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कांग्रेस का कहना है कि अगर सरकार शराब बेचेगी तो इसका सीधा असर विधानसभा के चुनाव पर हो सकता है इसलिए शराब की बिक्री छत्तीसगढ़ में निर्वाचन आयोग के संरक्षण में होनी चाहिए या फिर जब तक विधानसभा चुनाव नहीं हो जाते छत्तीसगढ़ में शराब की दुकानों पर ताला लगा देना चाहिए।
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कांग्रेस ने रमन सरकार को घेरा
पिछले चुनाव में देखा गया है कि विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं तक कई राजनीतिक पार्टियों के लोग शराब पहुंचाते नजर आए और उसका सियासी फायदा भी लेते हैं। ऐसे में कांग्रेस को डर है कि अगर छत्तीसगढ़ सरकार शराब बेचेगी तो विधानसभा चुनाव प्रभावित हो सकते हैं। इसी को लेकर कांग्रेस ने रमन सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।
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जल्द ही वह शराबबंदी को लेकर निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटा सकती है। कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी का आरोप है कि छत्तीसगढ़ में शराब दुकानों का संचालन निर्वाचन आयोग की निगरानी में होना चाहिए। साथ ही जब तक विधानसभा चुनाव नहीं हो जाते शराब की दुकानों पर ताला लगा देना चाहिए और सरकार को छत्तीसगढ़ में पूर्ण शराबबंदी की ओर अग्रसर होना चाहिए। अगर कांग्रेस की सरकार आती है तो प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी लागू की जाएगी क्योंकि शराब के कारण लगातार अपराध का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ सरकार खुद शराब बेच रही है और इससे सरकार का दोहरा चरित्र सामने आ रहा है।
वहीं, भाजपा के प्रवक्ता केदार गुप्ता का कहना है कि कांग्रेस विधानसभा चुनाव से काफी डरी हुई है और अच्छी तरह से जानती है कि चौथी बार डॉक्टर रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में सरकार बन रही है। कांग्रेस सिर्फ आरोप लगाने की राजनीति करती है,विकास के मुद्दे पर बात नहीं करती है। इसके पहले भी कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से इस मामले पर शिकायत की थी। निर्वाचन आयोग जो भी आदेश देगा सरकार उसका पालन करेगी और अगर कानून और संविधान सम्मत हुआ तो छत्तीसगढ़ में भी पूर्ण शराबबंदी लागू की जाएगी।