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कॉलोनियों में ईडब्ल्यूएस-एलआईजी की जमीन पर प्रशासन की नजर: 5 मामलों में कॉलोनाइजरों को नोटिस; 22 सितंबर को तलब
Mon, 14 Sep 2026 01:41 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, रायगढ़
Published by: अमन कोशले
Updated Mon, 14 Sep 2026 01:41 PM IST
सार
रायगढ़ की कॉलोनियों में EWS और LIG के लिए आरक्षित जमीन का अब होगा सत्यापन। प्रशासन ने पांच मामलों में रिकॉर्ड तलब कर कॉलोनाइजरों को 22 सितंबर को बुलाया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रायगढ़ शहर और इसके आसपास विकसित की जा रही कॉलोनियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तथा निम्न आय वर्ग के लिए नियमानुसार जमीन और भूखंड सुरक्षित रखे जाने के मामले में प्रशासन ने जांच शुरू की है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर उपविभागीय अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय ने खैरपुर, पंडरीपानी पूर्व, बड़े अतरमुड़ा और जोरापाली की कॉलोनियों से जुड़े पांच मामलों में नोटिस जारी किए हैं। प्रशासन ने संबंधित सभी कॉलोनाइजरों को 22 सितंबर को पूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड के साथ एसडीएम कार्यालय में उपस्थित होने का कड़ा निर्देश दिया है।
नियमों के पालन का होगा सत्यापन
जांच प्रक्रिया का मुख्य बिंदु यह सुनिश्चित करना है कि कॉलोनी विकसित करते समय आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए निर्धारित 15 प्रतिशत जमीन और निम्न आय वर्ग के लिए कम से कम 10 प्रतिशत भूखंडों का नियमपूर्वक प्रावधान पूरा किया गया है या नहीं। प्रशासन अब केवल कॉलोनियों के स्वीकृत नक्शे और लाइसेंस देखकर ही अपनी पड़ताल सीमित नहीं रखेगा, बल्कि आरक्षित जमीन और निर्मित भूखंडों की वास्तविक धरातलीय स्थिति का भी उपलब्ध दस्तावेज के आधार पर भौतिक सत्यापन करेगा।
पांच कॉलोनियों के मांगे गए रिकॉर्ड
एसडीएम महेश शर्मा ने बताया कि कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त निर्देशों के अनुपालन में यह जांच शुरू की गई है। इस कार्रवाई के तहत खैरपुर स्थित 7.259 हेक्टेयर, पंडरीपानी पूर्व स्थित 2.848 हेक्टेयर, बड़े अतरमुड़ा स्थित 19,240 और 84,038 वर्गमीटर तथा जोरापाली स्थित 2.238 हेक्टेयर जमीन पर विकसित कॉलोनियों से संबंधित सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज मांगे गए हैं। प्रशासन ने संबंधित कॉलोनाइजरों को तय तिथि 22 सितंबर को कार्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर अपने सभी रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का निर्देश जारी किया है।
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नियमों के पालन का होगा सत्यापन
जांच प्रक्रिया का मुख्य बिंदु यह सुनिश्चित करना है कि कॉलोनी विकसित करते समय आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए निर्धारित 15 प्रतिशत जमीन और निम्न आय वर्ग के लिए कम से कम 10 प्रतिशत भूखंडों का नियमपूर्वक प्रावधान पूरा किया गया है या नहीं। प्रशासन अब केवल कॉलोनियों के स्वीकृत नक्शे और लाइसेंस देखकर ही अपनी पड़ताल सीमित नहीं रखेगा, बल्कि आरक्षित जमीन और निर्मित भूखंडों की वास्तविक धरातलीय स्थिति का भी उपलब्ध दस्तावेज के आधार पर भौतिक सत्यापन करेगा।
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पांच कॉलोनियों के मांगे गए रिकॉर्ड
एसडीएम महेश शर्मा ने बताया कि कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त निर्देशों के अनुपालन में यह जांच शुरू की गई है। इस कार्रवाई के तहत खैरपुर स्थित 7.259 हेक्टेयर, पंडरीपानी पूर्व स्थित 2.848 हेक्टेयर, बड़े अतरमुड़ा स्थित 19,240 और 84,038 वर्गमीटर तथा जोरापाली स्थित 2.238 हेक्टेयर जमीन पर विकसित कॉलोनियों से संबंधित सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज मांगे गए हैं। प्रशासन ने संबंधित कॉलोनाइजरों को तय तिथि 22 सितंबर को कार्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर अपने सभी रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का निर्देश जारी किया है।
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