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छत्तीसगढ़ में एक गांव को राफेल के कारण क्यों हो रही है परेशानी
Mon, 15 Apr 2019 04:36 PM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
Published by: अमर शर्मा
Updated Mon, 15 Apr 2019 04:36 PM IST
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राफेल लड़ाकू विमान (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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राफेल विवाद के केंद्र में फ्रांसीसी लड़ाकू विमान है और 'राफेल' उनके गांव का नाम है। छत्तीसगढ़ के इस कस्बे में रहनेवाले लोग कहते हैं कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण संयोग है जिसकी वजह से उनपर चुटकुले बन रहे हैं और लोगों का नकारात्मक ध्यान उनकी ओर आकर्षित हुआ है। यहां के निवासियों की दिलोजान से इच्छा है कि उनके गांव का नाम बदला जाना चाहिए।
इस छोटा से गांव 'राफेल' में लगभग 200 परिवार रहते हैं और यह छत्तीसगढ़ के महासमुंद निर्वाचन क्षेत्र में आता है, जो 18 अप्रैल को मतदान करेगा।
गांव के सबसे उम्रदराज 83 वर्षीय धर्म सिंह कहते हैं, "दूसरे गांवों के लोग हमारा मजाक उड़ाते हैं, कहते हैं कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है, तो हमारी जांच की जाएगी। हम अपने गांव का नाम बदलने के अनुरोध के साथ मुख्यमंत्री कार्यालय भी गए, लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो सकी।"
उन्होंने कहा, "सिर्फ राफेल विवाद के कारण लोगों का ध्यान गांव की ओर नकारात्मक रूप से जाता है, लेकिन हमारे गांव की किसी को परवाह नहीं है।" उन्होंने कहा, "राज्य के बाहर बहुत से लोगों को गांव के बारे में नहीं जानते हैं।"
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सिंह के मुताबिक गांव में पानी और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। खेती बारिश पर निर्भर है क्योंकि सिंचाई की कोई सुविधा नहीं है।
उन्होंने कहा, "राजनेताओं ने देश भर में कई गांवों को गोद लिया है, लेकिन कोई भी हमारे गांव का दौरा नहीं करता है। दो हफ्ते पहले, कुछ भाजपा कार्यकर्ता आए थे लेकिन वे भी जमीनी स्तर के लोग थे। जो कोई भी चुनाव जीते और सत्ता में आए, हमारा अनुरोध गांव के नाम को बदलना होगा।"
धरम सिंह को इस बात का कोई अंदाजा नहीं है कि गांव को राफेल क्यों कहा जाता है और इसका क्या मतलब है।
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता, लेकिन यह नाम दशकों से है, जब साल 2000 में छत्तीसगढ़ बना था, उससे भी पहले से है। मुझे नाम के पीछे का तर्क नहीं पता है।"
भारतीय जनता पार्टी के चंदूलाल साहू महासमुंद से मौजूदा सांसद हैं और फिर से इस निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। वह कांग्रेस के धनेंद्र साहू और बहुजन समाज पार्टी के धनसिंग कोसरिया के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल फ्रांस के साथ राफेल लड़ाकू जेट सौदे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार पर लगातार निशाना साध रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रत्येक विमान की कीमत में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी की गई थी और इस सौदे से उद्योगपति अनिल अंबानी को फायदा पहुंचेगा। सरकार और अंबानी ने आरोपों से इनकार किया है।
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इस छोटा से गांव 'राफेल' में लगभग 200 परिवार रहते हैं और यह छत्तीसगढ़ के महासमुंद निर्वाचन क्षेत्र में आता है, जो 18 अप्रैल को मतदान करेगा।
गांव के सबसे उम्रदराज 83 वर्षीय धर्म सिंह कहते हैं, "दूसरे गांवों के लोग हमारा मजाक उड़ाते हैं, कहते हैं कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है, तो हमारी जांच की जाएगी। हम अपने गांव का नाम बदलने के अनुरोध के साथ मुख्यमंत्री कार्यालय भी गए, लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो सकी।"
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उन्होंने कहा, "सिर्फ राफेल विवाद के कारण लोगों का ध्यान गांव की ओर नकारात्मक रूप से जाता है, लेकिन हमारे गांव की किसी को परवाह नहीं है।" उन्होंने कहा, "राज्य के बाहर बहुत से लोगों को गांव के बारे में नहीं जानते हैं।"
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सिंह के मुताबिक गांव में पानी और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। खेती बारिश पर निर्भर है क्योंकि सिंचाई की कोई सुविधा नहीं है।
उन्होंने कहा, "राजनेताओं ने देश भर में कई गांवों को गोद लिया है, लेकिन कोई भी हमारे गांव का दौरा नहीं करता है। दो हफ्ते पहले, कुछ भाजपा कार्यकर्ता आए थे लेकिन वे भी जमीनी स्तर के लोग थे। जो कोई भी चुनाव जीते और सत्ता में आए, हमारा अनुरोध गांव के नाम को बदलना होगा।"
धरम सिंह को इस बात का कोई अंदाजा नहीं है कि गांव को राफेल क्यों कहा जाता है और इसका क्या मतलब है।
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता, लेकिन यह नाम दशकों से है, जब साल 2000 में छत्तीसगढ़ बना था, उससे भी पहले से है। मुझे नाम के पीछे का तर्क नहीं पता है।"
भारतीय जनता पार्टी के चंदूलाल साहू महासमुंद से मौजूदा सांसद हैं और फिर से इस निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। वह कांग्रेस के धनेंद्र साहू और बहुजन समाज पार्टी के धनसिंग कोसरिया के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल फ्रांस के साथ राफेल लड़ाकू जेट सौदे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार पर लगातार निशाना साध रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रत्येक विमान की कीमत में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी की गई थी और इस सौदे से उद्योगपति अनिल अंबानी को फायदा पहुंचेगा। सरकार और अंबानी ने आरोपों से इनकार किया है।