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अकाली दल में आने के बाद मेयर की मुश्किलें बढ़ीं, कांग्रेस का झटका

Fri, 12 Aug 2016 12:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मोहाली
अमर उजाला ब्यूरो, मोहाली Updated Fri, 12 Aug 2016 12:20 AM IST
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mohali mayor kulwant singh's troubles increased by congress after join SHAD,
balveer singh sidhu, MLA Mohali - फोटो : amar ujala
मोहाली मेयर कुलवंत सिंह व उनके आजाद ग्रुप के पार्षदों के अकाली दल में शामिल होने के बाद वीरवार को कांग्रेस ने अपना समर्थन वापस लेने की घोषणा कर दी। विधायक बलबीर सिंह सिद्धू ने फेज-1 स्थित पार्टी आफिस में इस संबंध में प्रेस कांफ्रेंस में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मोहाली के विकास के लिए उन्होंने कुलवंत सिंह के आजाद ग्रुप को समर्थन दिया था।
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कुलवंत उन्हें छोड़कर गए हैं, वे तो अभी भी अपनी बात पर कायम थे। वहीं, उन्होंने साफ किया है कि निगम के सीनियर डिप्टी मेयर रिशव जैन अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि कुलवंत को मेयर बनाने में उनके दल का अहम योगदान रहा है। विधायक बलबीर सिंह सिद्धू की प्रेस कांफ्रेंस में कांग्रेस के सभी पार्षद मौजूद रहे।
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विधायक ने बताया कि बुधवार शाम तक वह अपने स्टैंड पर कायम थे, लेकिन जब साफ हो गया कि कुलवंत अपने दल के पार्षदों के साथ अकाली दल में शामिल हो गए हैं तो उन्हें भी अपना स्टैंड साफ करना पड़ा। उन्होंने बताया कि मोहाली के विकास के लिए उन्होंने कुलवंत सिंह को समर्थन दिया था। पिछले एक साल में शहर में हुआ विकास भी किसी से छिपा नहीं है। सफाई के मामले में मोहाली में नंबर वन हो गया। इसके अलावा कई अहम काम करवाए गए जो कि कई वर्ष से अटके थे। उन्होंने कहा कि जिसके लिए उन्हें समर्थन दिया था, उसमें वह कामयाब रहे हैं।
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अकाली दल छोड़ने पर मिलीं थीं 10 सीटें

mohali mayor kulwant singh's troubles increased by congress after join SHAD,
मोहाली मेयर कुलवंत सिंह - फोटो : amar ujala
कुलवंत ही बता पाएंगे वजह
विधायक बलबीर सिंह सिद्धू ने बताया कि कुलवंत के अकाली दल में शामिल होने की वजह वह ही बता पाएंगे। उन्होंने बताया कि उन्हें नहीं पता कि उन पर कोई प्रेशर था या फिर उन्होंने अपना कोई फायदा देखकर अकाली दल ज्वाइन किया है।

गुरुद्वारा साहिब में खाई कसम भूले
विधायक ने बताया कि जब अपना समर्थन दिया था उसके बाद वह, कुलजीत सिंह बेदी, मनजीत सिह सेठी और सरदार कुलवंत सिंह ने गुरुद्वारा साहिब में माथा टेका था। साथ ही इकट्ठे होकर अरदास करवाई थी। साथ ही कहा था कि हम हर हाल में कायम रहेंगे। किसी भी स्थिति में साथ नहीं छोड़ेंगे। उस समय उन्हें भी हमें आफर आए थे, लेकिन उन्होंने कुलवंत का साथ नहीं छोड़ा था।

अकाली दल छोड़ने पर मिलीं थीं 10 सीटें
विधायक ने कहा कि इलाके के लोग अकाली दल से नाराज थे। जब कुलवंत ने अकाली दल से अलग होकर अपना दल बनाया था तो लोगों ने उन्हें वोट डाले थे। लोगों को भी उनसे काफी उम्मीदें थीं। सिद्धू का कहना है कि अगर कुलवंत ने अकाली दल में रहकर चुनाव लड़ा होता तो स्थिति कुछ और होती। 
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