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कौन नहीं पहचानता है हर कोई उसको जानता, भारत का दंभ बढ़ाया है, तभी अटल कहलाया है
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रिपोर्ट - संजीव पंगोत्रा
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चंडीगढ़। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र (संस्कृति मन्त्रालय, भारत सरकार) द्वारा ‘भारत रत्न अटल स्मृति अखिल भारतीय ई-कवि सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। ऑनलाइन कवि सम्मेलन का शुभारम्भ मध्यप्रदेश से श्री
अभिषेक ‘अटल’ ने अटल जी की आवाज में उनकी कविता ‘कदम चलाकर चलना होगा’ तथा ‘मौत से ठन गई’ से किया। तत्पश्चात आरैया, उश्रर प्रदेश से अजय
अंजाम ने ‘अमरीका ने थे धरा गगन तक चुंगी नाके कर डाले, उस जिद्दी बेटे ने फिर भी परमाणु धमाके कर डाले’, हिमाचल प्रदेश से सर्वेश कुमार मिश्र ने ‘आसान बहुत है, सिक्के का कोई पटल होना, मुश्किल बहुत है मगर, आदमी का अटल होना’, दिल्ली से मंजू शाक्य ने ‘राष्ट्र प्रेम वाली वाय हिय में जलाए आप’, पालमपुर, हिमाचल प्रदेश से कर्नल वी.पी. सिंह ने ‘शांत हूं, स्थिर हूं अपितु गहरा भी हूं मैं, सैकड़ों ताण्डव लिये ठहरा भी हूं मैं’, उत्राखंड से श्रीकांत ने ‘भले ही दीप से पूजा तू, आठोयाम मत करना, मिले कोई मोहल्लेे में तो राधेश्याम मत करना’, जम्मू एवं कश्मीर से केवल कृष्ण केवल ने ‘कौन नहीं पहचानता है हर कोई उसको जानता, भारत का दंभ बढ़ाया है, तभी अटल कहलाया है’ सुनाकर ख़ूब वाह वाही लूटी ।
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