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37 साल की उम्र में सीजेएम बने हैं ये शख्स, स्ट्रगल हैरान कर देगा
ब्यूरो/अमर उजाला, नूंह(मेवात)
Updated Fri, 26 Aug 2016 01:46 PM IST
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सीजेएम तैयब हुसैन
- फोटो : फाइल फोटो
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कक्षा 2 में 7 साल की उम्र से ही घर से 70 किलोमीटर का सफर तय कर पढ़ाई करने वाले तैय्यब हुसैन आज सीजेएम हैं। हरियाणा का नूंह(मेवात) जिला। पढ़ाई के लिए बेहद सीमित संसाधन। बावजूद इसके कोई असुविधा उन्हें अपनी तकदीर खुद बनाने से दूर नहीं कर पाई। महज 37 साल के सीजेएम कोर्ट के बेहद व्यस्त शेड्यूल के बावजूद समय निकालकर जिले में लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं और जिले में युवाओं के नए रोल मॉडल के तौर पर सामने आ रहे हैं।
पढ़ाई के लिए घंटों करते थे सफर
सीजेएम तैय्यब हुसैन की शुरूआती पढ़ाई नूंह यानी तत्कालीन मेवात में हुई। वह कक्षा 2 में सात साल की उम्र से ही घर से 70 किलोमीटर का सफर तय कर मेवात मॉडल स्कूल पढने आते-जाते थे। आठवीं तक ऐसे ही पढ़ाई की और बाद में दिल्ली के साकेत स्थित स्कूल भी कई किलोमीटर साइकिल से सफर तय करने पढ़ाई की। रोहतक से आगे की पढ़ाई की और इसके बाद लॉ की पढ़ाई में मास्टर की डिग्री ली। फिर पढ़ने और पढ़ाने का दौर शुरू हुआ और इसके बाद सीजेएम तक का सफर तय किया।
मां और एक रिश्तेदार बने प्रेरणा
सीजेएम तैय्यब हुसैन की मां रशीदन घर गृहस्थी संभालने के साथ ही इलाके के लोगों की समस्या भी दूर करती थीं और अनकही समाजसेवी थीं। बकौल सीजेएम हुसैन यहीं से उन्हें समाज के बीच जुड़ने की सीख मिली। इसके अलावा न्यायपालिका में आने के लिए प्रेरणा उनके बड़े जीजा डॉ. बदरुद्दीन के बड़े भाई शमसुद्दीन से मिली।
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नशे से दूर युवा बना सकते देश को मजबूत
युवाओं के लिए सीजेएम तैय्यब हुसैन सिर्फ एक बात कहते हैं कि अगर युवा नशे से दूर हो जाएं तो देश की तकदीर बदलकर तरक्की की राह पर ला सकते हैं। इससे देश तो मजबूत होगा ही, लोगों का खुद का भाग्य भी चमकेगा। हालांकि वह इस बात को भी जोड़ते हैं अब की जनरेशन पहले से ज्यादा पॉजिटिव एटीट्यूड की है।
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पढ़ाई के लिए घंटों करते थे सफर
सीजेएम तैय्यब हुसैन की शुरूआती पढ़ाई नूंह यानी तत्कालीन मेवात में हुई। वह कक्षा 2 में सात साल की उम्र से ही घर से 70 किलोमीटर का सफर तय कर मेवात मॉडल स्कूल पढने आते-जाते थे। आठवीं तक ऐसे ही पढ़ाई की और बाद में दिल्ली के साकेत स्थित स्कूल भी कई किलोमीटर साइकिल से सफर तय करने पढ़ाई की। रोहतक से आगे की पढ़ाई की और इसके बाद लॉ की पढ़ाई में मास्टर की डिग्री ली। फिर पढ़ने और पढ़ाने का दौर शुरू हुआ और इसके बाद सीजेएम तक का सफर तय किया।
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मां और एक रिश्तेदार बने प्रेरणा
सीजेएम तैय्यब हुसैन की मां रशीदन घर गृहस्थी संभालने के साथ ही इलाके के लोगों की समस्या भी दूर करती थीं और अनकही समाजसेवी थीं। बकौल सीजेएम हुसैन यहीं से उन्हें समाज के बीच जुड़ने की सीख मिली। इसके अलावा न्यायपालिका में आने के लिए प्रेरणा उनके बड़े जीजा डॉ. बदरुद्दीन के बड़े भाई शमसुद्दीन से मिली।
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नशे से दूर युवा बना सकते देश को मजबूत
युवाओं के लिए सीजेएम तैय्यब हुसैन सिर्फ एक बात कहते हैं कि अगर युवा नशे से दूर हो जाएं तो देश की तकदीर बदलकर तरक्की की राह पर ला सकते हैं। इससे देश तो मजबूत होगा ही, लोगों का खुद का भाग्य भी चमकेगा। हालांकि वह इस बात को भी जोड़ते हैं अब की जनरेशन पहले से ज्यादा पॉजिटिव एटीट्यूड की है।