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जीएलए के बीबीए, बीबीए फैमिली बिजनेस और बी.कॉम के छात्रों ने देखा राष्ट्रपति भवन
टीम डिजिटल /अमर उजाला, दिल्ली
Updated Mon, 09 May 2016 02:54 PM IST
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राष्ट्रपति भवन के सामने खड़े छात्र एवं छात्राएं
- फोटो : gla university
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आज के प्रतिस्पर्धामयी युग में शैक्षणिक ज्ञान की बहुत उपयोगिता है। इसी कड़ी में जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा (उत्तर प्रदेश) के बीबीए, बीबीए फैमिली बिजनेस और बी.कॉम के छात्रों ने राष्ट्रपति भवन का भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान राष्ट्रपति भवन के टूर गाइट बी.के शर्मा ने भवन के इतिहास के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि भवन का निर्माण सन 1911 में शुरू हुआ था लेकिन 1912 में द्वितीय विश्वयुद्ध के शुरू होने के कारण निर्माण कार्य में बाधाएं उत्पन्न हुईं और काम को रोकना पड़ा। उन्होंने बताया कि बाद में इसकी पुनः शुरुआत की गई और 1929 में पूरी इमारत बनकर तैयार हुई।
उन्होंने जानकारी दी कि पहले इस भवन को गर्वनर हाउस का नाम दिया गया लेकिन 1950 में जब भारत गणतंत्र बना और हमारे प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद इसमें रहने आए तो इसका नाम बदलकर राष्ट्रपति भवन रख दिया गया। उन्होंने बताया कि वैसे तो इस भवन में 360 कक्ष हैं लकिन मुख्य रूप से तीन कक्ष, दरबार हॉल, अशोका हॉल और वैंक्वेट हॉल की शोभा देखते ही बनती है। इस भवन का पूरा परिसर 365 एकड़ में फैला हुआ है। इसी भवन में एक पुस्तकालय भी है जिसके अंदर देश-विदेश के शिक्षकों और शिक्षाविदों द्वारा लिखी गई 3000 से ज्यादा पुस्तकों का संग्रह है।
इस परिसर में एक भव्य उद्यान भी है जिसको मुगल गार्डन के नाम से जाना जाता है जो कि श्रीनगर के शालीमार गार्डन के तर्ज पर बना है। इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट के निदेशक तथा प्रतिकुलपति प्रोफेसर आनंद मोहन अग्रवाल ने छात्रों के राष्ट्रपति भवन से लौटने पर हर्ष व्यक्त किया और छात्रों को आश्वासन दिया कि इसी तरह के भ्रमण समय-समय पर आयोजित कराए जाएंगे।
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विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सोमेश धमीजा ने बताया कि विश्वविद्यालय की और से छात्रों के व्यक्तित्व विकास हेतु समय-समय पर ऐसे शैक्षणिक भ्रमण आयोजित कराए जाते हैं जिससे की छात्रों को शिक्षण के अलावा भी देश क विभिन्न गतिविधियों के बारे में जानकारी मिलते रहे। छात्रों के भ्रमण विभाग के शिक्षक ऋतेश शर्मा, कृष्णवीर सिंह, विजय कुमार और शुभी अग्रवाल के नेतृत्व में संपन्न हआ। भ्रमण से लौटे छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन का आभार जताया।
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उन्होंने जानकारी दी कि पहले इस भवन को गर्वनर हाउस का नाम दिया गया लेकिन 1950 में जब भारत गणतंत्र बना और हमारे प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद इसमें रहने आए तो इसका नाम बदलकर राष्ट्रपति भवन रख दिया गया। उन्होंने बताया कि वैसे तो इस भवन में 360 कक्ष हैं लकिन मुख्य रूप से तीन कक्ष, दरबार हॉल, अशोका हॉल और वैंक्वेट हॉल की शोभा देखते ही बनती है। इस भवन का पूरा परिसर 365 एकड़ में फैला हुआ है। इसी भवन में एक पुस्तकालय भी है जिसके अंदर देश-विदेश के शिक्षकों और शिक्षाविदों द्वारा लिखी गई 3000 से ज्यादा पुस्तकों का संग्रह है।
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इस परिसर में एक भव्य उद्यान भी है जिसको मुगल गार्डन के नाम से जाना जाता है जो कि श्रीनगर के शालीमार गार्डन के तर्ज पर बना है। इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट के निदेशक तथा प्रतिकुलपति प्रोफेसर आनंद मोहन अग्रवाल ने छात्रों के राष्ट्रपति भवन से लौटने पर हर्ष व्यक्त किया और छात्रों को आश्वासन दिया कि इसी तरह के भ्रमण समय-समय पर आयोजित कराए जाएंगे।
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विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सोमेश धमीजा ने बताया कि विश्वविद्यालय की और से छात्रों के व्यक्तित्व विकास हेतु समय-समय पर ऐसे शैक्षणिक भ्रमण आयोजित कराए जाते हैं जिससे की छात्रों को शिक्षण के अलावा भी देश क विभिन्न गतिविधियों के बारे में जानकारी मिलते रहे। छात्रों के भ्रमण विभाग के शिक्षक ऋतेश शर्मा, कृष्णवीर सिंह, विजय कुमार और शुभी अग्रवाल के नेतृत्व में संपन्न हआ। भ्रमण से लौटे छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन का आभार जताया।
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