राजन के लिए क्या है मोदी के पास?
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भारतीय रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन के लिए उनका गवर्नर बने रहना थोड़ा मुश्किल लगता है। सुब्रहमण्यम स्वामी ने राजन को पद से हटाने के लिए पीएम को चिठ्ठी लिखी थी तभी से राजन को पद से हटाए जाने की चर्चा गर्म है। हालांकि स्वामी और राजन के आर्थिक विचारों में पीढ़ी का अंतर है लेकिन फिर भी कई चीजें समान हैं। दोनों का शैक्षणिक रिकॅार्ड बहुत शानदार रहा है, दोनों ने ही इकनॅामिक्स की पढ़ाई की है। उच्च शिक्षा के लिए मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में भी पढ़ाई की है। सबसे बड़ी बात दोनों ने ही विश्व की शीर्ष यूनिवर्सिटीज में पढ़ाया भी है। स्वामी राजनीतिक संकट के समय देश का साथ देने के लिए वापस लौट आए जबकि राजन आर्थिक संकट के समय। दोनों ही अपने विचारों को हमेशा व्यक्त करते रहते हैं।
द् इकनॅामिक्स टाइम्स के मुताबिक 70 के दशक के किसी भी संघ से जुड़े व्यक्ति से पूछो कि वो आपको बताएगा कि कैसे स्वामी आर्थिक भारत के विजन से उन्हें पूरी तरह से अभिभूत दिखते थे। राजन ने भी लगभग वही किया। संघ से जुड़े व्यक्ति के हिसाब से स्वामी के आत्मविश्वास और घमंड न होने की वजह से उन्होंने तीन दशक तक राजनीति का नेतृत्व किया। दोनों में भिन्नताएं भी हैं। जहां स्वामी हार्वर्ड की नौकरी छोड़ कर हमेशा के लिए भारत वापस आ गए, वहीं राजन भारत तो आए पर तब उनके पास पास था अमेरिकी ग्रीन कॉर्ड।
स्वामी के राजन पर लगाए गए आरोपों के पीछे अगर गौर करें तो असल वजह ईर्ष्या लगती है। आपको बताते चले कि इससे पहले उन्होंने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा पर लगाए थे। राज्यसभा सांसद स्वामी को यकीन हो रहा है कि राजन वो सपना पूरा करने जा रहे है जो खुद स्वामी पिछले चालीस साल से देख रहे थे। प्रधानमंत्री को राजन की बर्खास्तगी को लेकर लिखी गई चिठ्ठी में उन्होंने आरोप लगाया हैं कि राजन ने अर्थव्यवस्था को ब्याज दर बढ़ाकर बर्बादी की तरफ ढकेल दिया है। साथ ही यह भी लिखा गया है कि वो दिमागी रूप से भारतीय नहीं हैं जो भारतीय रिजर्व बैंक का प्रमुख बन सके।
स्वामी का कहना है कि 'हम संप्रग सरकार की तरफ से नियुक्त किया गया कंडीडेट क्यों रखें जब हमारे देश में बहुत से राष्ट्रवादी विचारधारा के विशेषज्ञ मौजूद हैं। स्वामी भले ही अपने राजनीतिक तरीके से यह सब कर रहे हों लेकिन राजनीतिक पंडितों की मानें तो पीएम मोदी कुछ अलग ही सोच रहे हैं। वैसे मोदी मीडिया में गर्म चर्चाओं को नजर अंदाज कर रहे हैं। लगता है निर्णय वो अपनी व्यक्तिगत खोज के आधार पर ही लेंगे।
बहुत से आरोप जो स्वामी ने राजन पर लगाए हैं उनमें से कई पर तो स्वंय मोदी राजन की वाह-वाही कर चुके हैं। फिर चाहें वो मुद्रास्फीति हो या बैंको के लक्ष्यीकरण सभी पर राजन के विचार प्रबल हैं। अगर बात करें कि राजन संप्रग के उम्मीदवार हैं तो याद दिला दें कि मोदी हमेशा विपक्षियों को भी अपने फायदे के अनुसार प्रयोग कर लेते हैं।
उन्होंने शिवसेना के भारी विरोध के बाबजूद सुरेश प्रभु को रेलमंत्री बनाया जिन पर आरोप थे कि वो राजनीतिक व प्रशासनिक पृष्ठभूमि से नहीं आते हैं। लेकिन राजन के मामले में ऐसा क्यों नहीं हो पा रहा है?
राजन ने कहा है कि मैं एक भारतीय नागरिक हूं और मैं हमेशा एक भारतीय नागरिक रहा, और मेरे पास भारतीय पासपोर्ट है। मैंने किसी दूसरे देश की नागरिकता के लिए आवेदन कभी किया ही नहीं, मैं किसी दूसरे देश का नागरिक नहीं हूं और मैंने कभी किसी दूसरे देश की निष्ठा की शपथ नहीं ली। मैं एक ग्रीन कार्ड होल्डर हूं लेकिन यह कभी भी किसी दूसरे देश की निष्ठा की शपथ लेने के लिए आप को विवश नहीं करता है। यह बस एक वर्क परमिट है जो आपको दूसरे देश में काम करने का परमिट देता है।
कारवां पत्रिका में 2012 में स्वामी की एक रिपोर्ट छपी थी जिसमें लिखा था मैं अमेरिका के खिलाफ नहीं हूं बल्कि अमेरिकन ही हूं।
तथ्य यही बताते हैं कि यदि राजन चाहते हैं तो मोदी उन्हें दूसरा कार्यकाल दे सकते हैं।