डिजिटल पेमेंट का सुरक्षित माध्यम यूपीआई या वॉलेट?
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पिछले छह महीने से 36 साल के देवेंद्र मिश्र डिजिटल पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं। डिजिटल पेमेंट सिस्टम को वह सुविधाजनक पाते हैं, लेकिन इन टूल्स की सुरक्षा के प्रति भी वह चिंतित रहते हैं और यह जानना चाहते हैं कि यूपीआई, पेटीएम, गूगल-पे और दूसरे डिजिटल पेमेंट सिस्टम्स में क्या फर्क है और इनमें से कौन सबसे अच्छा है। मुसीबत हमें जो चीज समझाती है, वह है अपना अस्तित्व बचाए रखने की क्षमता विकसित करना और जो सबसे अच्छा विकल्प है, उसे अपनाना। डिजिटल पेमेंट तकनीक आए कई साल हो गए हैं और तकनीक तथा नियमों में लगातार बदलाव के साथ निरंतर नए खिलाड़ी मैदान में आ रहे हैं, जिससे उपयोगकर्ताओं में भ्रम और चिंता है। ऑनलाइन पेमेंट और फंड ट्रांसफर के कई तरीके हैं, जैसे कि क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, डिजिटल बैंकिंग, नेट बैंकिंग, बैंक ट्रांसफर मोड्स, ई-वॉलेट्स और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई)। इन सभी विकल्पों के अपने फायदे हैं।
वॉलेट्स और यूपीआई
यूपीआई एक रीयल टाइम पेमेंट सिस्टम है, जो मोबाइल प्लेटफॉर्म के जरिये दो बैंक खातों में पैसे तुरंत ट्रांसफर कर सकता है। यूपीआई के जरिये आप अनेक बैंक खातों को एक मोबाइल एप्लिकेशन के जरिये संचालित कर सकते हैं। इसके विपरीत पेटीएम और जीपे जैसे डिजिटल वॉलेट्स के जरिये डिजिटल लेन-देन से पहले इनमें रुपये डालने पड़ते हैं। इन सभी ने वित्तीय लेन-देन के माध्यम के तौर पर नकदी की जरूरत और इस पर निर्भरता कम कर दी है। यूपीआई की उपयोगिता बहुत ज्यादा है, इसी कारण वॉलेट्स भी इसका सपोर्ट करते हैं और अपने प्लेटफॉर्म्स पर इसे लेन-देन के एक माध्यम के रूप में मान्यता देते हैं।
यूपीआई का सबसे बड़ा लाभ यह है कि वॉलेट्स के विपरीत, जिसमें आपका पैसा रखने के लिए एक थर्ड पार्टी एप की जरूरत पड़ती है, इसमें एक बैंक से दूसरे बैंक में पैसा सीधे ट्रांसफर होता है। भीम (भारत इंटरफेस फॉर मनी) एप जैसे यूपीआई पर लगभग सभी बैंकों के वित्तीय लेन-देन का संचालन होता है। भीम के आने के साथ ही वृत्त पूरा हो गया है, क्योंकि यह 2 जी मोबाइल नेटवर्क पर भी चलता है, जिस कारण दूरस्थ और ग्रामीण इलाकों के लोगों की भी इस तक पहुंच है। भीम के जरिये यूपीआई खाताधारक उन लोगों के साथ भी वित्तीय लेन-देन कर सकते हैं, जो यूपीआई खाताधारक नहीं हैं।
कौन बेहतर है?
यूपीआई और वॉलेट्स, दोनों के अपने फायदे हैं और दोनों सुरक्षित हैं। पर तकनीक का गलत फायदा उठाने वाले धोखेबाज भी होते हैं। ऐसे में, डिजिटल पेमेंट रूट का प्रयोग करते हुए हमेशा सतर्क रहना चाहिए। चूंकि सभी एप्लिकेशन डिजिटल लेन-देन के सभी मोड को सपोर्ट नहीं करते, इसलिए पेमेंट के अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करना बेहतर है। पर यूपीआई और भीम के इस्तेमाल से डिजिटल लेन-देन के सभी तरीके कवर हो जाते हैं। डिजिटल माध्यम से लेन-देन के लिए आपके बैंक खाते में पैसा होना जरूरी है। आपको इन प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर करना होगा तथा अपने वित्तीय लेन-देन पर ध्यान भी रखना होगा। जरूरी यह भी है कि आपका स्मार्टफोन इन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को सपोर्ट करे। इससे आपका वित्तीय लेन-देन जल्दी हो जाता है। इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते हुए आपको कई सारे कदम उठाने पड़ते हैं।
डेबिट या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हुए आपको कार्डधारक का नाम, कार्ड नंबर और एक्सपायरी डेट डालना पड़ता है। जबकि यूपीआई में आपके यूपीआई आईडी डालते ही यूपीआई एप पर पेमेंट का अनुरोध आ जाता है। लॉग इन कर तथा पिन डालकर तुरंत आप पेमेंट को मंजूरी दे सकते हैं। वॉलेट्स का फायदा यह है कि सीधे लेन-देन पर लॉयलिटी बेनेफिट्स और डिस्काउंट्स मिलते हैं। अगर वॉलेट्स का स्मार्ट इस्तेमाल किया जाए, तो देवेंद्र मिश्र को इससे लाभ मिलेगा। लेकिन वॉलेट्स पर केवाईसी (नो योर कस्टमर) की औपचारिकता पूरी करने के बाद ही वित्तीय लेन-देन करें।